जीवन की सार्थकता पहचान,स्वयं को यूँ न व्यर्थ गँवाएँ,
लक्ष्य बनाकर मन में अपने,हर दिन आगे कदम बढ़ाएँ,
राह कठिन हो,धूप कड़ी हो,हिम्मत फिर भी न हारें,
प्रयत्नों की ज्योति जलाकर,सफ़लता के द्वार सँवारें।
समय अमूल्य है जीवन का,इसका मोल समझते जाएँ,
बीते कल की भूलों से हम,नई सीख हर रोज़ कमाएँ,
छोटी कोशिश बड़ी बनेगी,विश्वास हृदय में जगाएँ,
मेहनत की हर एक बूँद से,सपनों के फूल खिलाएँ।
काँटों वाली राह मिले तो,पाँव कभी पीछे न हटाएँ,
गिरकर फ़िर उठने का साहस,अपने भीतर रोज़ जगाएँ,
भाग्य भरोसे बैठ न जाएँ,कर्म को अपना साथी बनाएँ,
निष्ठा,धैर्य और सत्कर्मों से,जीवन सफल बनाएँ।
अंधियारा चाहे घेर ले मन,आशा का दीप जलाएँ,
विफ़लता को अंत न समझें,उससे आगे बढ़ते जाएँ,
जिस उद्देश्य से जन्म मिला है,उस उद्देश्य को पहचानें,
अपने कर्मों की खुशबू से हम,जग में सुंदर नाम कमाएँ।
जब जीवन की संध्या आए,मन में कोई मलाल न हो,
जो पाया उससे संतोष रहे,खोने का कोई सवाल न हो,
किशन कह सकें कर्म किए हैं,मानवता के हित में सारे,
सार्थक जीवन वही कहलाए,जिससे जग में उजियारे।

क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318
