सतगुरु भाणे में शिष्य का हित छिपा होता है,
हर हुक्म में प्रेम का अमृत घुला होता है।
जो सिर झुकाकर गुरु की रज़ा को मान ले,
उसके जीवन में सुख का दीप जला होता है।
कभी राह कठिन हो, कभी काँटों का सफर हो,
गुरु की कृपा से हर कदम में नया असर हो।
जो अपनी मर्जी छोड़ सतगुरु पर छोड़ दे,
उसके हर दुःख में भी छिपा कोई हुनर हो।
गुरु जो रोकें, उसमें भी कोई भलाई होती है,
गुरु जो मोड़ें, उसमें मंज़िल की राह होती है।
शिष्य समझ न पाए तो भी विश्वास बनाए रखे,
क्योंकि गुरु की हर आज्ञा में सच्ची गवाही होती है।
मन जब डगमगाए, गुरु का नाम सहारा बनता है,
अँधियारी राहों में ज्ञान का सितारा बनता है।
जिसने सतगुरु के भाणे को दिल से स्वीकार किया,
उसका हर पल प्रभु-मिलन का किनारा बनता है।
न अपनी चाह रहे,न अपना कोई अभिमान रहे,
सतगुरु की रज़ा में ही जीवन का सम्मान रहे।
किशन भाणे को मीठा मानकर जो चलता जाए सदा,
उस शिष्य के जीवन में सदा गुरु की कृपा महान रहे।

क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318