शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने नियंत्रित एवं लाइसेंस आधारित भांग (कैनाबिस) की खेती को औषधीय और औद्योगिक उपयोग के लिए अनुमति देने संबंधी विस्तृत नियम जारी कर दिए हैं। नए प्रावधानों के तहत इच्छुक कंपनियों और संस्थानों को निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा तथा बड़े स्तर पर निवेश की व्यवस्था भी करनी होगी।
सरकार के नए नियमों के अनुसार, भांग की खेती केवल लाइसेंस प्राप्त संस्थाओं द्वारा निर्धारित क्षेत्रों में की जा सकेगी। इसके लिए सुरक्षा, निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण और उत्पादन की ट्रैकिंग जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य रहेंगी, ताकि खेती का उपयोग केवल औषधीय एवं औद्योगिक उद्देश्यों तक सीमित रहे।
नियमों के तहत परियोजना स्थापित करने के लिए कम से कम 100 करोड़ रुपये के निवेश का प्रावधान रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे प्रदेश में औषधीय उद्योग, अनुसंधान, रोजगार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों के लिए भी आय के नए अवसर पैदा होंगे।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह अनुमति नशीले पदार्थों के रूप में उपयोग के लिए नहीं है। खेती, प्रसंस्करण और विपणन की पूरी प्रक्रिया संबंधित विभागों की निगरानी में होगी तथा नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में औद्योगिक हेम्प और औषधीय कैनाबिस के नियंत्रित उपयोग को लेकर नीति-स्तर पर चर्चा चल रही है। हिमाचल प्रदेश सरकार का उद्देश्य वैज्ञानिक, औद्योगिक और चिकित्सा क्षेत्र में भांग आधारित उत्पादों के विकास को बढ़ावा देना है।
