चंदन सिंह | पेज 3 न्यूज़ वर्ल्डवाइड | नई दिल्ली

नई दिल्ली| दिल्ली सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में बड़ा सुधार करते हुए निजी विद्यालयों की मान्यता प्रक्रिया को सरल बनाने का निर्णय लिया है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने निजी विद्यालयों के लिए ‘एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट’ की अनिवार्यता समाप्त कर स्व-प्रमाणन (सेल्फ-सर्टिफिकेशन) व्यवस्था लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। साथ ही, नए निजी विद्यालयों की स्थापना एवं पंजीकरण के लिए न्यूनतम भूमि क्षेत्र की अनिवार्यता में भी महत्वपूर्ण राहत दी गई है।
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि यह निर्णय दिल्ली के विद्यालय मान्यता नियमों को ‘बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009’ के अनुरूप बनाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालयों की मान्यता अब केवल आधारभूत संरचना, सुरक्षा मानकों, प्रशिक्षित शिक्षकों और छात्र-शिक्षक अनुपात जैसे वस्तुनिष्ठ मानकों के आधार पर दी जाएगी, न कि किसी क्षेत्र में विद्यालयों की संख्या या उनकी आवश्यकता के आकलन के आधार पर।
दिल्ली स्कूल शिक्षा नियम, 1973 के तहत वर्षों से लागू प्रक्रियागत बाधाओं को समाप्त करते हुए सरकार ने नियम 44(3) और नियम 50(ii) में संशोधन का निर्णय लिया है। इसके तहत अब नए विद्यालय खोलने के लिए पूर्व ‘आवश्यकता’ निर्धारण तथा क्षेत्र में पहले से मौजूद विद्यालयों की संख्या के आधार पर मान्यता देने की व्यवस्था समाप्त कर दी जाएगी।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले महानगर में यह फैसला गुणवत्तापूर्ण विद्यालयों को आवासीय क्षेत्रों के निकट स्थापित करने में सहायक होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भवन सुरक्षा, आधुनिक आधारभूत सुविधाओं और शैक्षणिक गुणवत्ता से जुड़े सभी मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। उनके अनुसार, नई व्यवस्था से अनावश्यक प्रशासनिक औपचारिकताएं समाप्त होंगी और शिक्षा व्यवस्था का फोकस बेहतर अधोसंरचना, योग्य शिक्षकों तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर केंद्रित होगा।
