• About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
Tuesday, May 19, 2026
  • Login
  • Register
Page3News Worldwide
  • Home
  • Page 3 Family
    • E-Paper
    • E-Magazine
    • Management Team
  • Subscriptions
  • Countries
    • USA
    • Canada
    • India
    • Balochistan
    • Thailand
    • UK
    • Australia
  • Language Wise News
    • Thai News
    • Punjabi News
    • Hindi News
  • Other News
    • World News
    • Latest Movie Reviews
    • Culture
    • Finance
    • Hollywood
    • Business
    • Entertainment
    • Sports
    • Lifestyle
    • Fashion
    • food
    • Health
    • Travel
    • Politics
    • Science
    • Tech
  • Multilingual Editorial
    • English Editorials
    • Thai Editorials
    • Hindi Editorials
    • Punjabi Editorials
    • Page3News Special
No Result
View All Result
  • Home
  • Page 3 Family
    • E-Paper
    • E-Magazine
    • Management Team
  • Subscriptions
  • Countries
    • USA
    • Canada
    • India
    • Balochistan
    • Thailand
    • UK
    • Australia
  • Language Wise News
    • Thai News
    • Punjabi News
    • Hindi News
  • Other News
    • World News
    • Latest Movie Reviews
    • Culture
    • Finance
    • Hollywood
    • Business
    • Entertainment
    • Sports
    • Lifestyle
    • Fashion
    • food
    • Health
    • Travel
    • Politics
    • Science
    • Tech
  • Multilingual Editorial
    • English Editorials
    • Thai Editorials
    • Hindi Editorials
    • Punjabi Editorials
    • Page3News Special
No Result
View All Result
Page3News Worldwide
No Result
View All Result
Home Hindi Editorials

वैश्विक तनाव,कच्चे तेल और शेयर बाजारों का उथल- पुथल भरा सप्ताह: निवेशकों की बढ़ती धड़कनों के बीच विश्व अर्थव्यवस्था का नया संकेत- डॉलर की मार रुपया 96 पार- गिरते भारतीय रुपए से खलबली?

by Page 3 News International Desk
May 18, 2026
in Hindi Editorials
0
0
SHARES
1
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on WhatsappShare on TelegramShare on LineShare on Email

RelatedPosts

पेपर लीक प्रकरण- केमिस्ट्री, बायोलॉजी टीचरों सहित पूर्व टीचर कोचिंग संस्थान का मालिक गिरफ्तार -“घर का भेदी लंका ढाए” से “कोचिंग उद्योग की काली अर्थव्यवस्था” तक -भारती,य परीक्षा प्रणाली के सामने सबसे बड़ा संकट

परीक्षा पेपर लीक,मूल्यांकन अनियमितताएं परीक्षा माफियाओं का बढ़ता नेटवर्क डंक -सीबीएसई की पारदर्शिता- 10वीं 12वीं,उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन की सुविधाएं-19 मई से 22 मई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन -समग्र व्यापक विश्लेषण

नीट-यूजी पेपर लीक प्रकरण 2026- दोबारा परीक्षा 21 जून 2026- नीट परीक्षा 2027 से पूरी तरह कंप्यूटर आधारित -सवाल वही डिजिटल युग,पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था का संकट: क्या तकनीक से तेज हो गया है परीक्षा माफियाओं का नेटवर्क?

दुनियाँ की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस बात से डरी हुई हैं कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पर किसी प्रकार का संकट उत्पन्न होता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है

भारतीय रुपये की कमजोरी का सीधा अर्थ, विदेशों से आयातित वस्तुएं, कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, औद्योगिक मशीनें और कई कच्चे माल डॉलर में खरीदे जाते हैं महंगे होने की संभावना -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर मई 2026 का दूसरा सप्ताह वैश्विक अर्थव्यवस्था,भारतीय वित्तीय बाजारों और आम नागरिकों के लिए अत्यंत संवेदनशील और चिंताजनक संकेत लेकर आया। यह सप्ताह केवल शेयर बाजारों के उतार-चढ़ाव तक सीमित नहीं रहा,बल्कि इसने यह स्पष्ट कर दिया कि आज की दुनियाँ में अर्थव्यवस्था,भू- राजनीति,ऊर्जा संकट, मुद्रा विनिमय और निवेशक मनोविज्ञान एक-दूसरे से कितनी गहराई से जुड़े हुए हैं। एक ओर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊंचाई पर पहुंचा दिया, वहीं दूसरी ओर डॉलर की मजबूती और रुपया जो कि अब डॉलर के मुकाबले संभवतः 96 पार चला गया है,इसकी ऐतिहासिक कमजोरी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दीं। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि भारतीय व वैश्विक शेयर बाजारों व भारतीय तथा वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में लगातार बदलते रुझानों ने निवेशकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर आने वाले दिनों में विश्व अर्थव्यवस्था किस दिशा में जाएगी। पूरे सप्ताह भारतीय शेयर बाजार अस्थिरता के दौर से गुजरते रहे। सप्ताह की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई, लेकिन बीच में तेज वापसी भी देखने को मिली।निवेशकों को ऐसा लगा कि शायद बाजार संभल जाएगा, परंतु अंतिम कारोबारी दिन फिर दबाव बढ़ गया। शुरुआती घंटों में तेजी दिखाई देने के बाद अंतिम घंटे में अचानक बिकवाली बढ़ी और बाजार नीचे फिसल गया।यह स्थिति इस बात का संकेत थी कि निवेशकों के भीतर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। बंबई शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुआ जबकि राष्ट्रीय शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक भी नीचे आ गया। यह गिरावट भले ही प्रतिशत के हिसाब से बहुत बड़ी न लगे, लेकिन इसके पीछे छिपे संकेत अत्यंत गंभीर हैं। बाजार का अंतिम घंटे में टूटना यह दर्शाता है कि बड़े निवेशकों में भरोसे की कमी बनी हुई है और वे सटीक जोखिम लेने से बच रहे हैं।
साथियों, इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा कारण वैश्विक तनाव रहा। पश्चिम एशिया में ईरान और अन्य शक्तियों के बीच बढ़ती तनातनी ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता पैदा कर दी। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस बात से डरी हुई हैं कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पर किसी प्रकार का संकट उत्पन्न होता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है। दुनिया के बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में तनाव बढ़ने का सीधा असर ऊर्जा कीमतों पर पड़ता है और यही इस सप्ताह देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने उन देशों की चिंता बढ़ा दी जो आयातित तेल पर निर्भर हैं। भारत भी उन्हीं देशों में शामिल है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, इसलिए तेल की कीमतों में हर वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डालती है।तेल महंगा होने का अर्थ केवल पेट्रोल और डीजल का महंगा होना नहीं है। इसका प्रभाव परिवहन, उद्योग, कृषि, बिजली उत्पादन और रोजमर्रा की वस्तुओं तक पहुंचता है। जब परिवहन लागत बढ़ती है तो खाद्य सामग्री से लेकर उपभोक्ता वस्तुओं तक हर चीज महंगी होने लगती है। यही कारण है कि बाजार में महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। निवेशकों को डर है कि यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं तो भारतीय रिजर्व बैंक को ब्याज दरों को लेकर कठोर रुख अपनाना पड़ सकता है। ब्याज दरें ऊंची रहने का अर्थ है उद्योगों के लिए महंगा कर्ज, कम निवेश और आर्थिक गतिविधियों की गति में कमी।
साथियों, इस सप्ताह की सबसे बड़ी आर्थिक घटनाओं में से एक रही भारतीय रुपये की ऐतिहासिक गिरावट।डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 96 के पार पहुंच गया। यह केवल एक आंकड़ा नहीं बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है। रुपये की कमजोरी का सीधा अर्थ है कि विदेशों से आयातित वस्तुएं और अधिक महंगी हो जाएंगी।कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, औद्योगिक मशीनें और कई महत्वपूर्ण कच्चे माल डॉलर में खरीदे जाते हैं।जब रुपया कमजोर होता है तो भारत को समान मात्रा में वस्तुएं खरीदने के लिए अधिक रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इसका असर अंततः उद्योगों और आम जनता दोनों पर पड़ता है।रुपये की गिरावट के पीछे कई कारण रहे। पहला कारण डॉलरकी वैश्विकमजबूती है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े मजबूत आंकड़ों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया और डॉलर में निवेश को सुरक्षित माना जाने लगा।दूसरा कारण विदेशी निवेशकों का सतर्क रुख रहा। जब वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ता है तो विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी बाजारों की ओर बढ़ते हैं। यही कारण है कि भारत सहित कई विकासशील देशों की मुद्राओं पर दबाव देखने को मिला।हालांकि सप्ताह के कुछ दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी भी की, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने बाजार को संतुलित नहीं रहने दिया। बड़े निवेशकों के इस बदलते व्यवहार ने बाजार में अस्थिरता और बढ़ा दी। छोटे निवेशकों और व्यवस्थित निवेशयोजनाओं में पैसा लगाने वाले लोगों के सामने दुविधा की स्थिति बनी रही। एक ओर गिरते बाजार में सस्ते स्तर पर निवेश काअवसर दिखाई दे रहा था, वहीं दूसरी ओर लगातार बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं ने जोखिम भी बढ़ा दिया।यदि क्षेत्रवार प्रदर्शन देखा जाए तो सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीक से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की रुचि बनी रही। वैश्विक स्तर पर तकनीकी कंपनियों में निवेश बढ़ने का लाभ भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों को भी मिला।इसके अतिरिक्त दैनिक उपभोग से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भी स्थिरता दिखाई दी क्योंकि निवेशक अनिश्चित समय में ऐसे क्षेत्रों को अपेक्षाकृत सुरक्षित मानते हैं। इसके विपरीत धातु, तेल एवं गैस, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक तथा अचल संपत्ति क्षेत्र दबाव में रहे। इन क्षेत्रों पर वैश्विक मांग में कमी, लागत बढ़ने और ब्याज दरों के दबाव का असर साफ दिखाई दिया।
साथियों, पूरे सप्ताह यह स्पष्ट रूप से दिखाई दिया कि अब बाजार केवल आर्थिक आंकड़ों से नहीं चलते, बल्कि भू- राजनीतिक घटनाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो चुकी हैं। युद्ध, प्रतिबंध, तेल आपूर्ति, समुद्री मार्ग और वैश्विक कूटनीति अब शेयर बाजारों की दिशा तय करने लगे हैं। निवेशक अब केवल कंपनियों के लाभ और घाटे को नहीं देख रहे, बल्कि वे यह भी देख रहे हैं कि दुनिया के किस क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है और उसका असर किस उद्योग पर पड़ेगा।भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के बावजूद ऊर्जा आयात पर अत्यधिक निर्भर है। यदि तेल महंगा होता है तो व्यापार घाटा बढ़ता है,रुपया कमजोर होता है और महंगाई का दबाव बढ़ जाता है। यही स्थिति इस समय दिखाई दे रही है। सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक दोनों के सामने संतुलन बनाए रखने की चुनौती है। एक ओर आर्थिक विकास की गति बनाए रखना आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर महंगाई को नियंत्रण में रखना भी जरूरी है।
साथियों, भारतीय रिजर्व बैंक पर दबाव बढ़ सकता है कि वह रुपये को संभालने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करे। लेकिन यह उपाय लंबे समय तक कारगर नहीं हो सकता।यदि वैश्विक परिस्थितियां खराब बनी रहती हैं तो केवल मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप से समस्या हल नहीं होगी। इसके लिए व्यापक आर्थिक रणनीति की आवश्यकता होगी जिसमें ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण, निर्यात वृद्धि और घरेलू उत्पादन क्षमता को मजबूत करना शामिल होगा।आम जनता के स्तर पर भी इस सप्ताह के आर्थिक घटनाक्रम का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देने लगा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संभावित वृद्धि से परिवहन महंगा होगा। इसका असर सब्जियों, खाद्यान्न दूध और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर पड़ेगा। मध्यम वर्ग की बचत और खर्च दोनों प्रभावित हो सकते हैं। जिन लोगों ने शेयर बाजार में निवेश किया है उनके सामने चिंता की स्थिति है, लेकिन दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह अवसर भी माना जा रहा है।सोना इस पूरे दौर में सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत बना हुआ है। वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक परंपरागत रूप से सोने की ओर आकर्षित होते हैं। यही कारण है कि सोने की मांग और कीमतों में मजबूती बनी हुई है। यदि आने वाले दिनों में युद्ध और तेल संकट गहराता है तो सोना और अधिक मजबूत हो सकता है।यह सप्ताह एक और महत्वपूर्ण संदेश देकर गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अभी भी अत्यंत नाजुक स्थिति में है। महामारी के बाद दुनिया जिस स्थिरता की उम्मीद कर रही थी, वह अभी पूरी तरह स्थापित नहीं हो पाई है। युद्ध, ऊर्जा संकट, महंगाई, ब्याज दरें और मुद्रा अस्थिरता लगातार नई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। ऐसे समय में विकासशील देशों के लिए आर्थिक संतुलन बनाए रखना और भी कठिन हो जाता है।
साथियों भारत के संदर्भ में सकारात्मक पक्ष यह है कि देश की दीर्घकालिक विकास क्षमता अभी भी मजबूत मानी जा रही है। विशाल घरेलू बाजार, युवा जनसंख्या, तकनीकी प्रगति और बुनियादी ढांचे में निवेश भारत को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करते हैं। यही कारण है कि वैश्विक संकटों के बावजूद भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में विकास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। लेकिन अल्पकालिक चुनौतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया का तनाव बढ़ता है और तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं तो आने वाले सप्ताहों में भारतीय बाजारों पर और दबाव आ सकता है। रुपया और कमजोर हो सकता है तथा विदेशी निवेशकों की सतर्कता बढ़ सकती है। वहीं यदि कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम होता है और तेल कीमतों में राहत मिलती है तो बाजारों में स्थिरता लौट सकती है।
साथियों अंतरराष्ट्रीय बाजारों की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं रही। अमेरिका के प्रमुख शेयर सूचकांक नई ऊंचाइयों के करीब पहुंचे। वहां तकनीकी कंपनियों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। मजबूत खुदरा आंकड़ों ने यह संकेत दिया कि अमेरिकी उपभोक्ता खर्च अभी भी मजबूत बना हुआ है। इससे निवेशकों को विश्वास मिला कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था फिलहाल मंदी से बची हुई है। लेकिन दूसरी ओर एशियाई बाजारों में भारी अस्थिरता बनी रही। जापान, हांगकांग और चीन के बाजारों में दबाव देखने को मिला। चीन-अमेरिका संबंधों को लेकर चिंता और पश्चिम एशिया संकट ने एशियाई निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।यूरोप के बाजार भी ऊर्जा संकट और तेल कीमतों के दबाव से प्रभावित रहे। जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी देखी गई। यूरोप पहले से ही ऊर्जा आपूर्ति की चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में तेल कीमतों में नई तेजी ने वहां के उद्योगों और उपभोक्ताओं दोनों पर दबाव बढ़ा दिया। यूरोपीय अर्थव्यवस्था की धीमी गति का असर वैश्विक व्यापार पर भी पड़ सकता है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि वर्तमान परिस्थितियां यह भी सिखाती हैं कि निवेश केवल भावनाओं के आधार पर नहीं किया जा सकता। निवेशकों को धैर्य,अनुशासन औरदीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। अल्पकालिक उतार-चढ़ाव बाजार का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन जो निवेशक मजबूत आर्थिक आधार और संतुलित रणनीति अपनाते हैं, वे लंबे समय में बेहतर परिणाम प्राप्त करते हैं।
अंततः मई 2026 का यह सप्ताह विश्व अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी की तरह देखा जाएगा। इसने यह स्पष्ट कर दिया कि आधुनिक दुनिया में किसी एक क्षेत्र का तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। मध्य-पूर्व का संकट भारत की जेब और बाजार दोनों पर असर डाल रहा है। रुपये की कमजोरी और तेल की मजबूरी भारतीय अर्थव्यवस्था की बड़ी चुनौती बनती जा रही है। वैश्विक निवेशक युद्ध, तेल और ब्याज दरों के त्रिकोण में फंसे दिखाई दे रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दुनिया कूटनीति और आर्थिक संतुलन के माध्यम से इन चुनौतियों से कैसे बाहर निकलती है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि यह सप्ताह निवेशकों के लिए धैर्य, रणनीति और समझदारी की कठिन परीक्षा बनकर सामने आया है।

WhatsApp Image 2026 05 14 at 7.12.24 PM
संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

Get real time update about this post categories directly on your device, subscribe now.

Unsubscribe
Page 3 News International Desk

Page 3 News International Desk

The Page 3 News is a Multilingual Worldwide daily newspaper founded in 2021. It is published in Bangkok, Thailand by the Page 3 News Thai Limited Partnership. Page 3 News is available to the world in all the three formats i.e. e-Paper, digital and print. The Page 3 News is having offices in many countries like Thailand, India, Canada, USA, etc. and is currently published in English, Thai, Hindi and Punjabi languages.

Related Posts

पेपर लीक प्रकरण- केमिस्ट्री, बायोलॉजी टीचरों सहित पूर्व टीचर कोचिंग संस्थान का मालिक गिरफ्तार -“घर का भेदी लंका ढाए” से “कोचिंग उद्योग की काली अर्थव्यवस्था” तक -भारती,य परीक्षा प्रणाली के सामने सबसे बड़ा संकट

by Page 3 News International Desk
May 19, 2026
0
2

परीक्षा केंद्रों पर ब्लूटूथ डिवाइस माइक्रो ईयरफोन और सॉल्वर गैंग क़ी सक्रियता क़ा पूरा नेटवर्क दर्शाता है परीक्षा अपराध अब...

परीक्षा पेपर लीक,मूल्यांकन अनियमितताएं परीक्षा माफियाओं का बढ़ता नेटवर्क डंक -सीबीएसई की पारदर्शिता- 10वीं 12वीं,उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन की सुविधाएं-19 मई से 22 मई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन -समग्र व्यापक विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
May 17, 2026
0
8

पुनर्मूल्यांकन और रीचेकिंग-19 मई से 22 मई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन- सत्यापन- 26 मई से 29 मई 2026- पुनर्मूल्यांकन यानी...

नीट-यूजी पेपर लीक प्रकरण 2026- दोबारा परीक्षा 21 जून 2026- नीट परीक्षा 2027 से पूरी तरह कंप्यूटर आधारित -सवाल वही डिजिटल युग,पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था का संकट: क्या तकनीक से तेज हो गया है परीक्षा माफियाओं का नेटवर्क?

by Page 3 News International Desk
May 16, 2026
0
7

भारत में प्रतियोगी परीक्षाएं केवल रोजगार या प्रवेश का माध्यम नही, करोड़ों युवाओं के सपनों, सामाजिक प्रतिष्ठा और भविष्य की...

कैंसर बीमारी का बढ़ता प्रकोप- 21वीं सदी की वैश्विक महामारी- सुप्रीम कोर्ट की हस्तक्षेपकारी भूमिका, एक ऐतिहासिक मोड़-एक समग्र विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
May 15, 2026
0
3

कैंसर बीमारी-भारत की चुनौतियाँ और नीति सुधार की अनिवार्यता आधुनिक जीवनशैली, पर्यावरणीय प्रदूषण, तंबाकू, शराब का बढ़ता सेवन,तनाव और शारीरिक...

एक्सपायरी डेट का काला खेल:- उपभोक्ता स्वास्थ्य, कानून और प्रशासनिक जवाबदेही पर वैश्विक परिप्रेक्ष्य में एक समग्र विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
May 15, 2026
0
4

एक्सपायर्ड उत्पाद बेचना या उसकी तारीख बदलना न केवल लाइसेंस शर्तों का उल्लंघन है, बल्कि यह धोखाधड़ी और स्वास्थ्य संकट...

ड्रैगन लैंड में ट्रंप-दिल में तेहरान :ताइवान पर कोहराम- महाशक्ति की महापंचायत- मिशन तेहरान,कुर्बान ताइवान गहरा तनाव का समग्र व्यापक विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
May 15, 2026
0
1

आधुनिक विश्व राजनीति में आदर्शवाद से अधिक महत्व राष्ट्रीय हितों का -हर देश क़ा अपने आर्थिक,सामरिक और राजनीतिक हितों के...

Facebook Twitter Youtube Instagram Tumblr Pinterest

Page 3 News Multilingual Worldwide

The Page 3 News is a Multilingual Worldwide daily newspaper founded in 2021. It is published in Bangkok, Thailand by the Page 3 News Thai Limited Partnership. Page 3 News is available to the world in all the three formats i.e. e-Paper, digital and print.

The Page 3 News is having offices in many countries like Thailand, India, Canada, USA, etc. and is currently published in English, Thai, Hindi and Punjabi languages.

Category

Calanderwise News

May 2026
MTWTFSS
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
« Apr    

© 2024 Page 3 News - First Multilingual Worldwide Newspaper based in Thailand.

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

*By registering into our website, you agree to the Terms & Conditions and Privacy Policy.
All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • E-Magazine
  • Management Team
  • Subscriptions
  • E-Paper
  • World News
  • Balochistan
  • USA
  • India
  • Thailand
  • Canada
  • UK
  • Australia
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer

© 2024 Page 3 News - First Multilingual Worldwide Newspaper based in Thailand.

This website uses cookies. By continuing to use this website you are giving consent to cookies being used. Visit our Privacy and Cookie Policy.