
नई टीम आने वाले समय में संगठन के विकास, अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा और न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य करने की उम्मीद -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
गोंदिया – भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां केवल राजनीतिक संस्थाओं में ही नहीं, बल्कि सामाजिक, पेशेवर और संस्थागत संगठनों में भी लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन किया जाता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में जिला बार एसोसिएशन का चुनाव 30 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह चुनाव न केवल स्थानीय अधिवक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण था, बल्कि यह न्यायिक प्रणाली के उस मजबूत स्तंभ का भी प्रतीक है, जो समाज को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अधिवक्ता किसी भी न्यायिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं, क्योंकि वे ही पक्ष और विपक्ष के बीच संतुलन स्थापित कर न्यायालय के समक्ष सच्चाई को प्रस्तुत करते हैं। ऐसे में बार एसोसिएशन के चुनाव का महत्व और भी सटीकता से बढ़ जाता है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र ने इस चुनाव की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हुए यह स्पष्ट रूप से महसूस किया कि इस बार का चुनाव पहले की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धात्मक और चुनौतीपूर्ण था। मतदान सुबह 8 बजे से प्रारंभ होकर दोपहर 3 बजे तक शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ। पूरे दिन अधिवक्ताओं में उत्साह और सक्रियता देखने को मिली। मतदान के बाद सभी की निगाहें परिणामों पर टिकी थीं, जो शाम करीब 8:30 बजे घोषित किए गए। चुनाव में कुल छह प्रमुख श्रेणियों में उम्मीदवार मैदान में थे प्रेसिडेंट, वाइस-प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी,जॉइंट सेक्रेटरी,ट्रेज़रर और एग्जीक्यूटिव मेंबर्स।
साथियों, प्रेसिडेंट पद के लिए चार उम्मीदवारों के बीच मुकाबला था। इसमें एडवोकेट सचिन आर. बोरकर ने 128 वोट प्राप्त कर शानदार जीत दर्ज की। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी एडवोकेट रूपेंद्रनाथ ओ. कटरे को 91 वोट मिले, जबकि एडवोकेट आरती के. भगत को 32 और एडवोकेट रामाशंकर जी. राय को 18 वोट प्राप्त हुए। इस परिणाम से यह स्पष्ट हुआ कि बोरकर ने अपने अनुभव,संपर्क और रणनीति के दम पर अधिवक्ताओं का विश्वास जीतने में सटीक सफलता हासिल की।
साथियों, वाइस-प्रेसिडेंट पद पर भी कड़ा मुकाबला देखने को मिला। इस पद के लिए एडवोकेट मंजुलता चतुर्वेदी ने 117 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की। उनके मुकाबले एडवोकेट विकास ए. करहाड़े को 81 और एडवोकेट सुचाना जे. मेश्राम (चौरे) को 68 वोट मिले। यह परिणाम महिला नेतृत्व के बढ़ते प्रभाव और स्वीकार्यता का भी संकेत देता है।
साथियों, सेक्रेटरी पद के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें एडवोकेट नीना एल. दुबे ने 99 वोट प्राप्त कर जीत दर्ज की। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी एडवोकेट शैलेन्द्र के. गडपायले को 86 और एडवोकेट सरिता एस. मेश्राम (कुलकर्णी) को 81 वोट मिले। यह मुकाबला बेहद करीबी रहा, जिससे चुनाव की प्रतिस्पर्धा का स्तर स्पष्ट होता है।
साथियों, जॉइंट सेक्रेटरी पद पर एडवोकेट चंदन वाय. वानखेड़े ने 114 वोट प्राप्त कर विजय प्राप्त की। उनके मुकाबले एडवोकेट मीना एस. भोवाते को 90 और एडवोकेट कमलेश बी. चिखलोंडे को 63 वोट मिले। इसी प्रकार ट्रेज़रर पद के लिए भी चार उम्मीदवारों के बीच मुकाबला था, जिसमें एडवोकेट परवेजुद्दीन जेड. शेख ने 93 वोट प्राप्त कर जीत दर्ज की। उनके प्रतिद्वंद्वियों में एडवोकेट विश्वनाथ आर. रहांगडाले को 85, एडवोकेट अंजलि एन. चौहान को 45 और एडवोकेट मनीष ए. नेवारे को 44 वोट मिले।
साथियों, एग्जीक्यूटिव मेंबर्स के लिए चुनाव में भी जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। इस श्रेणी में कई उम्मीदवारों ने भाग लिया, जिनमें एडवोकेट पिंकी के. जामरे (202 वोट),एडवोकेट तेजस आर. रूपारेल (224 वोट), एडवोकेट भाविक आर. दवे (203 वोट), एडवोकेट प्रफुल एल. ऊके (162 वोट), एडवोकेट एकता एस. गणवीर (173 वोट) और एडवोकेट प्रीति वी. तुरकर का चयन हुआ। इन सभी ने अपने-अपने स्तर पर प्रभावी प्रचार और संपर्क अभियान चलाकर अधिवक्ताओं का समर्थन प्राप्त किया।
साथियों, चुनाव परिणाम घोषित होते ही पूरे परिसर में उत्सव जैसा माहौल बन गया। विजयी उम्मीदवारों का ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया गया और उन्हें बधाइयों का तांता लग गया। यह दृश्य लोकतंत्र की उस जीवंतता को दर्शाता है,जहां प्रतिस्पर्धा के बाद भी आपसी सौहार्द और सम्मान बना रहता है। हारने वाले उम्मीदवारों ने भी विजेताओं को शुभकामनाएं दीं, जो इस पेशे की गरिमा और परिपक्वता को दर्शाता है।इस चुनाव की एक खास बात यह रही कि लगभग हर पद के लिए कई उम्मीदवार मैदान में थे, जिससे मुकाबला बेहद कठिन हो गया था। मैंने करीब 15 वर्षों के वकालत अनुभव में यह पहली बार देखा गया कि वोट हासिल करने के लिए इतनी व्यापक और संगठित कैनवसिंग की गई। हर प्रत्याशी ने अपने स्तर पर पूरी मेहनत की, व्यक्तिगत संपर्क बनाए, अपने दृष्टिकोण और योजनाओं को अधिवक्ताओं के सामने रखा। यह चुनाव केवल पद प्राप्त करने का माध्यम नहीं था, बल्कि यह अधिवक्ताओं के बीच संवाद, सहभागिता और संगठनात्मक एकता को भी मजबूत करने का अवसर बना।
हालांकि पद सीमित होते हैं और जीत केवल कुछ ही उम्मीदवारों को मिलती है, लेकिन इस चुनाव में भाग लेने वाले सभी उम्मीदवारों की मेहनत और समर्पण सराहनीय रहा। हारने वाले उम्मीदवारों के लिए भी यह अनुभव भविष्य के लिए एक मजबूत आधार साबित होगा। जिस प्रकार उन्होंने इस चुनाव में सक्रियता दिखाई, उससे यह उम्मीद की जा सकती है कि वे आने वाले चुनावों में और अधिक मजबूती के साथ वापसी करेंगे।
गोंदिया जिला बार एसोसिएशन का यह चुनाव इस बात का उदाहरण है कि लोकतंत्र केवल संसद और विधानसभा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर उस संस्था में जीवित है जहां लोग सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में भाग लेते हैं। अधिवक्ताओं का यह संगठन न केवल उनके पेशेवर हितों की रक्षा करता है, बल्कि न्यायिक प्रणाली को भी मजबूती प्रदान करता है।
अंततः, इस चुनाव के माध्यम से एक नई नेतृत्व टीम का गठन हुआ है, जिससे अधिवक्ताओं को नई उम्मीदें और अपेक्षाएं हैं। यह टीम आने वाले समय में संगठन के विकास,अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा और न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य करेगी। सभी विजयी उम्मीदवारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं, और सभी प्रतिभागियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं। यह चुनाव न केवल एक प्रक्रिया थी, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों, पेशेवर प्रतिबद्धता और संगठनात्मक एकता का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी बनकर सामने आया।
संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र