आर पी तोमर
नई दिल्ली, 10 दिसंबर।
लोकसभा में आज चुनाव सुधार पर दो दिन चर्चा हुई। चुनाव सुधार पर चर्चा के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, अखिलेश यादव, डिंपल यादव, रविशंकर प्रसाद, असदुद्दीन ओवैसी समेत पक्ष-विपक्ष के कद्दावर नेताओं ने अपनी बात रखी। विपक्षी दलों के वक्ताओं ने ईवीएम की जगह बैलट से चुनाव कराने, मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करने वाली कमेटी में राज्यसभा में विपक्ष के नेता और सीजेआई को भी शामिल करने की डिमांड की। गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में चुनाव सुधार पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे हैं। अमित शाह ने कहा कि हम भी विपक्ष में रहे हैं। चुनाव जीतने जीते हैं, उससे ज्यादा हारे हैं, लेकिन कभी चुनाव आयोग पर आरोप नहीं लगाए। हम लोगों का तो पौना जीवन ही विपक्ष में ही गुजर गया। सारे इंडी अलायंस वाले चुनाव आयोग पर ही आरोप लगा रहे हैं. चुनाव कराने वाली तटस्थ संस्था है। चुनाव आयोग को मान्यता राजनीतिक दलों ने नहीं दी। यह एक संवैधानिक संस्था है। आप पूरी दुनिया में लोकतंत्र की छवि धूमिल कर रहे हैं। मतदाता के मन में कोई डाउट नहीं है, उसे मालूम है कि हमने वोट दिया है तो चुनकर आए हैं। वोट चोरी-वोट चोरी करते रहो, यात्रा निकालते रहो. इसी सरकार के होते हुए आप कई चुनाव जीते, हम कुछ नहीं बोले. यह चुनाव आयोग की छवि धूमिल करने का प्रयास है। शाह ने 2014 के बाद चुनावी जीत के आंकड़े गिनाते हुए कहा कि 3 लोकसभा चुनाव सहित 44 चुनाव जीते हैं. वह भी 30 चुनाव जीते हैं। राहुल गांधी जहां से चुनाव जीते हैं, उसी वायनाड का प्रेस कॉन्फ्रेंस करके हमारी पार्टी ने इसी तरह की गड़बड़ियां बताई हैं। अमेठी में भी इस तरह की खामियां बताई हैं। मान लेते हैं कि वोटर लिस्ट सही नहीं है। एसआईआर का मतलब ही है मतदाता सूची के शुद्धिकरण की प्रक्रिया। आपकी डिमांड है कि वोटर लिस्ट ठीक हो, चुनाव आयोग यही कर रहा है। अगर कोई पत्रकार कुछ सवाल पूछे और इनको पसंद न आए, तो कहते हैं तुम बीजेपी के एजेंट हो। केस हारते हैं तो जज पर आरोप करते हैं। चुनाव हारते हैं तो ईवीएम और वोट चोरी को दोष देने लगते हैं। बिहार में यात्रा निकाली और फिर भी ये हार जाते हैं. चुनाव हारने का कारण नेतृत्व है। कांग्रेस के कार्यकर्ता इनका हिसाब मांगेंगे। आजादी के बाद ऐसा कभी नहीं हुआ है कि कोई जज खिलाफ फैसला दे, तो उसके खिलाफ इम्पीचमेंट लेकर आते हैं। वोट बैंक को संभालने के लिए एक हाईकोर्ट के जज के सामने इम्पीचमेंट लेकर आए हैं। जजमेंट क्या है। ये है कि एक पहाड़ी पर सबसे ऊपर दिया जलाया जाए। जनता इनको माफ नहीं करेगी। सबने साइन कर दिया, उद्धव जी ने भी साइन किया है। इस पर विपक्ष के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। अमित शाह ने गौरव गोगोई का नाम लेकर कहा कि बैठ जाओ, अभी नया मुद्दा शुरू हो रहा है, फिर उठना पड़ेगा। अमित शाह ने कहा कि वोट चोरी की जहां तक बात है। प्रधानमंत्री कौन बनेगा, यह कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्षों के वोट से तय हुआ। 28 प्रदेश अध्यक्षों ने सरदार पटेल के लिए वोट किया और दो ने पंडित नेहरू के लिए. पंडित नेहरू प्रधानमंत्री बने। दूसरी वोट चोरी अनैतिक तरीके से चुनाव जीतना. इंदिरा गांधी रायबरेली से चुनाव जीतीं और राजनारायण कोर्ट गए। कोर्ट ने तय कर दिया कि इंदिरा गांधी अनैतिक तरीके से जीतीं. इसे ढंकने के लिए संसद में कानून लाया गया कि प्रधानमंत्री के खिलाफ केस ही नहीं चल सकता। विपक्ष के नेता ने चुनाव आयोग की इम्युनिटी को लेकर सवाल पूछा, उसका जवाब तो दूंगा लेकिन इंदिरा गांधी ने इम्युनिटी अपने लिए ले ली, उसका क्या. विपक्ष के हंगामे पर अमित शाह ने कहा कि मोदीजी को लोगों ने बनाया है प्रधानमंत्री, आपकी कृपा से नहीं बना है। इनका आरोप सत्य नहीं है। इंदिरा गांधी ने तीन वरिष्ठ जजों को बाईपास करके चौथे नंबर के जज को मुख्य न्यायाधीश बनाया। तीसरी वोट चोरी का प्रकरण बताया था, योग्यता नहीं है और मतदाता बन गए। अभी अभी एक वाद पहुंचा है कि सोनिया गांधी इस देश का नागरिक बनने से पहले मतदाता थीं। विपक्ष के हंगामे पर शाह ने कहा कि केस चल रहा है, ये फैक्चुअल है। जवाब तो सोनिया गांधी को कोर्ट में देना है। केसी वेणुगोपाल ने कहा कि सोनिया गांधी उस चुनाव में वोटर नहीं थीं। गृह मंत्री को चुनौती देता हूं कि वो यह साबित करें. विपक्ष ने नियम 352 के तहत आपत्ति की। इस पर स्पीकर ने कहा कि इसे हमने भी पढ़ा है। गृह मंत्री ने कोई फैसला नहीं दिया है। एक मामला आया है, उसका बस संदर्भ दिया है। अमित शाह ने कहा कि अभी मैंने कॉन्क्लूजन नहीं दिया है। कॉन्क्लूजन तो उनके जवाब देने के बाद फिर से बताऊंगा। अमित शाह ने कहा कि विपक्ष के नेता की तीनों प्रेस कॉन्फ्रेंस का जवाब दूंगा। एक सादी वाली, एक एटम बम वाली और एक हाइड्रोजन बम वाली. हर सवाल का जवाब दूंगा। राहुल गांधी ने उन्हें बीच में टोका। इस पर अमित शाह ने कहा कि 30 साल से संसद या विधानसभा में चुनकर आ रहा हूं। ऐसा कभी नहीं हुआ. मेरे बोलने का क्रम मैं तय करूंगा, आप नहीं। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि ये डरा हुआ, घबराया हुआ रेस्पॉन्स है. सच्चा रेस्पॉन्स नहीं है। अमित शाह ने कहा कि मैं उनके माथे पर चिंता की लकीरें साफ देख रहा हूं कि क्या बोलूंगा। उनके उकसावे में नहीं आऊंगा, अपने क्रम से बोलूंगा. इससे पहले, राहुल गांधी ने गृह मंत्री के बयान के बीच में उन्हें रोकते हुए कहा कि चुनाव आयोग को फुल इम्युनिटी देने के आइडिया पर सबसे पहले बताएं। हरियाणा में एक उदाहरण दिया इन्होंने, वहां अनेक उदाहरण हैं. राहुल गांधी ने अमित शाह को फ्री प्रेस कॉन्फ्रेंस में डिबेट की चुनौती दी। अमित शाह ने विपक्ष के वोट चोरी के नैरेटिव को काउंटर करते हुए कहा कि मंजू देवी ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उनको गलत जानकारी दी। मेरे जवाब से विपक्ष के पास मुद्दा नहीं बचेगा। विपक्ष के नेता ने खुद कहा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कि वोटर लिस्ट सही नहीं है। एसआईआर उसी का शुद्धिकरण कर रहा है। उन्होंने कहा कि इनका कहना है कि बीजेपी की सरकारों के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी का असर नहीं होता। सही बात है कि केंद्र से राज्य तक हमारी सरकारें बार-बार चुनकर आती हैं। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि हम 2014 के बाद कोई चुनाव हारे नहीं हैं। उन्होंने कर्नाटक-तेलंगाना से छत्तीसगढ़ तक के उदाहरण देते हुए कहा कि जब आप जीतते हो, तब चुनाव आयोग महान है। जब मुंह की खाते हो तो चुनाव आयोग निकम्मा है। अमित शाह ने कहा कि घुसपैठिए यह तय नहीं कर सकते कि सीएम-पीएम कौन हो। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से एसआईआर हुआ। चुनाव आयोग की ड्यूटी है यह तय करना कि कौन मतदाता है और कौन नहीं। उन्होंने कहा कि वोटर होने के लिए यह जरूरी है कि संबंधित व्यक्ति सबसे पहले भारत का नागरिक हो। राहुल गांधी का नाम लेकर अमित शाह ने कहा कि वह हरियाणा का एक मकान नंबर बताते हुए दावा करते हैं कि इस घर में इतने वोटर हैं। चुनाव आयोग ने वेरिफिकेशन किया तो यह दावा ही गलत था। वोट चोरी का फर्जी नैरेटिव बनाने की कोशिश हो रही है। इस पर विपक्ष की ओर से हंगामा हो गया। अमित शाह ने कहा कि मुझे अपनी बात पूरी करने दें, इसके बाद विपक्ष के नेता को मौका दिया जाए और मैं उसका भी जवाब देने के लिए तैयार हूं। गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव सुधार पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि चुनाव के लिए चुनाव आयोग जिम्मेदार है। यह व्यवस्था जब बनी, तब हम थे ही नहीं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था है और अनुच्छेद 324 में चुनाव आयुक्त को विशेष अधिकार दिए गए। अनुच्छेद 326 में मतदाता की पात्रता तय की गई है। मनीष तिवारी कह रहे थे कि एसआईआर का अधिकार चुनाव आयोग को है ही नहीं, तो उनको बताना चाहता हूं कि यह अधिकार चुनाव आयोग को अनुच्छेद 327 में है। उन्होंने विपक्ष पर एसआईआर को लेकर झूठ फैलाने का आरोप लगाया और इसका इतिहास भी गिनाया. अमित शाह ने कहा कि 2000 के बाद तीन बार एसआईआर हुआ और दो बार बीजेपी-एनडीए की सरकार थी, एक बार मनमोहन सिंह की सरकार थी। तब किसी ने विरोध नहीं किया। यह चुनाव को पवित्र रखने की प्रक्रिया है। चुनाव जिस आधार पर होते हैं, वह वोटर लिस्ट ही अशुद्ध है, तो चुनाव कैसे पवित्र हो सकते हैं। यह एसआईआर कुछ नहीं है, मतदाता सूची का शुद्धिकरण है। मानता हूं कि कुछ दलों को इस देश के लोग वोट देते नहीं हैं, जो वोट देते हैं, उनके नाम भी कट जाएंगे। उनसे सहानुभूति भी है। अमित शाह ने यह भी कहा कि 2010 में एक चुनाव आयुक्त ने तय कर दिया था कि किसी का नाम वोटर लिस्ट से नहीं काटा जाएगा। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि दो दिन संसद की कार्यवाही नहीं चल सकी। लोगों के बीच इस तरह का संदेश देने की कोशिश की गई कि हम चर्चा नहीं चाहते। हम बीजेपी और एनडीए के लोग डिबेट से कभी नहीं भागे। संसद सबसे बड़ी पंचायत है। चर्चा के लिए हमने ना कहा, इसके पीछे भी कारण थे। विपक्ष की डिमांड थी एसआईआर पर चर्चा की। यह चुनाव आयोग का काम है। इस पर चर्चा होगी तो जवाब कौन देगा। जब ये चुनाव सुधार पर चर्चा के लिए तैयार हुए, हमने दो दिन चर्चा की। अमित शाह ने कहा कि चर्चा तय हुई चुनाव सुधार पर, लेकिन विपक्ष के सदस्यों ने एसआईआर पर ही बोला। जवाब तो मुझे देना पड़ेगा. मैंने पहले के भी सभी एसआईआर का गहन अध्ययन किया है और कांग्रेस की ओर से फैलाए गए झूठ का अपने तर्कों के हिसाब से जवाब देना चाहता हूं. चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। राजस्थान के बांसवाड़ा से भारत आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि मेरे संसदीय क्षेत्र में मेरे ही नाम के दो राजकुमार खड़े किए गए। मेरी फोटो चोरी की गई, उनके सामने मेरी फोटो लगाई गई। मेरी पार्टी के सिंबल से मिलता-जुलता सिंबल दिया गया और उनको एक लाख 20 हजार वोट भी मिले। मैं चुनाव के समय से ही उन्हें खोज रहा हूं, वो आजतक मुझे नहीं मिले। दमन दीव के निर्दलीय सांसद उमेश भाई पटेल जब बोल रहे थे, आसन से जगदंबिका पाल ने उन्हें रोका। जगदंबिका पाल ने कहा कि आपकी बात आ गई। इस पर उमेशभाई बाबूभाई पटेल ने कहा कि यहां वोट चोरी पर बात हो रही है, आप तो भाषण चोरी कर रहे हैं। इससे भड़के जगदंबिका पाल ने आसन से उनको सभापति के आसन की मर्यादा रखने की नसीहत दी। हनुमान बेनीवाल ने चुनाव सुधार पर चर्चा के दौरान लोकसभा में कहा कि 1990 के दशक तक लोग जानते ही नहीं थे चुनाव आयोग की ताकत. इसे लोगों ने तब जाना, जब टीएन शेषन मुख्य चुनाव आयुक्त बने. उन्होंने एसआईआर के लिए तय समय सीमा एक महीने के लिए बढ़ाने की डिमांड की और कहा कि जो मतदाता तीन बार वोट न डालें, उनका नाम काटा जाना चाहिए।
राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि एक जमाना वह भी था, जब बिहार में पूरा चुनाव ही चार महीने बाद कराना पड़ा. लालू यादव सत्ता में आए, और कहा कि सवर्ण खलनायक हैं। नीतीश कुमार आए और गरीबों का हाथ थाम लिया है. यह जीत उसी का परिणाम है। उन्होंने लालू यादव का नाम लिए बिना कहा कि मैं वह सदस्य हूं, जो एक परिवार के लगभग सभी सदस्यों से चुनाव लड़ चुका हूं, जिनमें से दो राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री थे। पार्टी अनुमति देगी तो आने वाले दो-चार चुनाव में जो दो-चार लोग बचे होंगे, उनसे भी लड़कर जीत लूंगा। रूडी ने सदन में यह भी कहा कि शायद यह वर्ल्ड रिकॉर्ड हो। असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव सुधार पर चर्चा के दौरान चुनाव आयोग पर संसद के बनाए नियम और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग ने पब्लिक डोमेन ऑर्डर डाले बिना 35 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम काट दिए। हम एसआईआर का विरोध करते हैं। ओवैसी ने एसआईआर की कवायद को बैकडोर एनआरसी बताया और संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव आंबेडकर को भी कोट किया। बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने एसआईआर पर सरकार और चुनाव आयोग, दोनों को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि बीएलओ और अधिकारियों ने 2024 के चुनाव नतीजों को आधार बनाकर नाम काटने का काम किया। जिस विधानसभा क्षेत्र में ये जितने वोट के अंतर से हारे थे, उस विधानसभा क्षेत्र में उतने वोट काटे गए। अधिकारियों और बीएलओ ने वोटर लिस्ट लेकर एक जगह बैठकर नाम काटे। उन्होंंने बिहार चुनाव में घुसपैठिए के नाम पर एक कम्युनिटी के खिलाफ नफरत फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि इस एसआईआर का आधार क्या था। हमारे वोट काटे गए, इनके वोट काटे गए। पप्पू यादव ने सीसीटीवी फुटेज संरक्षित रखने और सीईसी की नियुक्ति में सीजेआई के शामिल होने की भी डिमांड की। हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से बीजेपी की सांसद कंगना रनौत ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि ये हर दिन एसआईआर, एसआईआर कर हंगामा कर रहे थे। दिल दहल जाता था इनको देखकर। कल राहुल गांधी जी जब बोल रहे थे, बार-बार वही खादी में धागा है, धागे से कपड़ा है, करते रहे। अंत में वह ले देकर विदेशी महिला की फोटो पर आ गए। वह खुद कई बार कह चुकी हैं कि कभी भारत नहीं गई हूं। उनकी तस्वीर के इस्तेमाल के लिए संसद की तरफ से माफी मांगती हूं। ये ईवीएम हैक करने की बात करते हैं, भूल गए हैं कि प्रधानमंत्री दिलों को हैक करते हैं। कंगना ने राजनारायण बनाम इंदिरा केस का जिक्र करते हुए कहा कि ये धांधलियां इन्होंने की हैं। प्रियंका गांधी कहती हैं छोड़ो पुरानी बातें. आपकी माता जी के पास जब नागरिकता नहीं थी, नागरिकता मिलने के कितने वर्षों पहले से वह वोट देती आई हैं। आपलोगों ने कभी भी इस देश की कानून-व्यवस्था का, संविधान का सम्मान नहीं किया हुआ है। कंगना रनौत ने कहा कि वन नेशन, वन इलेक्शन की मांग की और बिहार में एसआईआर का बचाव भी किया। उन्होंने कहा कि बिहार में 60 से 65 लाख वोटर्स के नाम काटे गए।
कमिश्नर राजेश कुमार ने पेशकार राघवेंद्र सिंह को किया निलंबित
महेंद्र त्रिपाठीअयोध्याकमिश्नर के निरीक्षण में अनियमितता उजागर, पेशकार निलंबित,कमिश्नर राजेश कुमार के रुदौली तहसील निरीक्षण के दौरान तहसील न्यायिक में...
