(संतोष,प्रसन्नता और शुक्रगुज़ारी का संदेश)
व्यस्त रहिए,मस्त रहिए,जीवन को आबाद रखिए,
हर पल में खुशियाँ खोज़कर,चेहरे पर मुस्कान रखिए।
कम मिले तो भी संतोष से,अपने दिल को भरते रहिए,
जो मिला है जीवन में,उसके लिए शुक्रगुज़ार रहिए।
न दौलत की अंधी चाहत हो,न शोहरत का अभिमान रहे,
मन में प्रेम,हृदय में शांति,होंठों पर मुस्कान रहे।
छोटी-छोटी खुशियों में भी,खुशियों का संसार मिले,
जो है पास उसी में खुश रहकर, जीने का आधार मिले।
बीते कल का बोझ न पालो,आने वाले कल से न डरो,
आज मिला जो सुंदर अवसर,उसमें खुशियों के रंग भरो।
मेहनत को साथी बनाकर,कर्म की राह पर चलते रहो
सुख हो या दुखहर परिस्थिति में, धैर्य के दीप जलाते रहो
दूसरों से तुलना छोड़ो,अपनी राह सँवारते रहो,
मन के आँगन में उम्मीदों के,सुंदर फूल निखारते रहो।
कम में जीना सीख लिया तो,मन धनवान हो जाएगा,
शुक्रगुज़ारी का भाव जगे तो, हर दिन पर्व बन जाएगा।
व्यस्त रहो अच्छे कर्मों में,मस्त रहो अपने अंदाज़ में,
संतोष रखो अपने मन में,प्रेम भरो हर अल्फ़ाज़ में।
किशन जो मिला प्रसाद समझकर, प्रभु का धन्यवाद करो
जीवन अनमोल धरोहर है,हँसते-हँसते इसे जिया क़रो


