वक्त की अदालत में हर चेहरा बेनकाब हो जाता है,
झूठ का महल कितना भी ऊँचा हो,ढह जाता है।
दुनियाँ की आँखों में धूल झोंक लो चाहे जितनी बार,
वक्त के आईने में सच साफ़ नज़र आता है हर बार।
लोगों को बहकाकर कोई खुद को सच्चा बना सकता है,
झूठी बातों से अपना चेहरा भी चमका सकता है।
मगर वक्त जब हिसाब की किताब खोल देता है,
हर छुपा हुआ राज़ दुनियाँ के सामने बोल देता है।
धोखे की राह पर चलकर मंज़िल मिलती नहीं,
झूठ की चमक हमेशा के लिए खिलती नहीं।
आज भले ही सच्चाई पर पर्दा पड़ा दिखाई दे,
कल वक्त की करवट हर परत को खोलती दिखाई दे।
न वक्त किसी का अपना है,न किसी से बैर रखता है,
हर कर्म का परिणाम अपनी तराज़ू पर रखता है।
जिसने जैसा बोया,वैसा ही सामने आएगा,
वक्त का न्याय देर से सही,मगर सटीक होगा।
इसलिए सच की राह पर बेखौफ़ चलते रहना,
झूठ के शोर से अपने अंतर्मन को न बदलना।
किशन दुनिया चाहे कुछ भी कहे,धैर्य का हाथ थामे रहना
क्योंकि वक्त आएगा,और सच को सच साबित करेगा।
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

