छत्तीसगढ़ रायपुर,
ब्यूरो चीफ आनन्द पाठक
13 दिसम्बर, 2025/ वन संरक्षण का वैज्ञानिक प्रबंधन, वनों को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने और उनके पारिस्थितिक, आर्थिक व सामाजिक लाभों को बनाए रखने के लिए विज्ञान.आधारित तकनीकों का उपयोग करता है। जैव विविधता की सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन का मुकाबला, कीट और आग नियंत्रणऔर सामुदायिक भागीदारी शामिल हैं। वन संरक्षण में उपयोग-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में स्थिरता सुनिश्चित करना, जैव विविधता-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में संरक्षण करना और वनों को गैर-वनों में परिवर्तित करने का विनियमन शामिल है, लेकिन वन विभिन्न स्तरों पर कई हितधारकों को अनेक लाभ प्रदान करते हैं।प्राकृतिक पुनरुत्पादन को बढ़ावा देना
बीजापुर वनमंडल के मोसला कूप, कक्ष क्रमांक 269 में राज्य सरकार और भारत सरकार के समन्वय से चल रही वैज्ञानिक वन प्रबंधन प्रक्रिया के माध्यम से वन संरक्षण और ग्रामीण विकास दोनों को गति मिलने की उम्मीद है। वर्ष 2023-24 से 2032-33 तक की स्वीकृत कार्य-आयोजना के तहत यहां केवल आड़े, तिरछे, सूखे और गिरे हुए वृक्षों के विदोहन की अनुमति दी गई है। इसका उद्देश्य वन को स्वस्थ रखना और प्राकृतिक पुनरुत्पादन को बढ़ावा देना है।
वैज्ञानिक कटाई से वन को मिलेगी नई ऊर्जा
स्वीकृत 181.420 हेक्टेयर क्षेत्र में से 16.338 हेक्टेयर कार्य योग्य भूमि पर कुल 1810 वृक्षों की वैज्ञानिक कटाई प्रस्तावित है। वर्ष 2024-25 में 428 वृक्षों का विदोहन कर लकड़ी को नीलाम डिपो तक सुरक्षित पहुँचाया गया। कूप कार्य पूर्ण न होने के कारण वर्ष 2025-26 में पुनः कार्य प्रारंभ किया गया। 26 नवंबर से 9 दिसंबर 2025 के बीच 160 वृक्षों की कटाई की गई, जिसकी सामग्री कूप में सुरक्षित रखी गई है। वन विभाग ने स्पष्ट किया कि महुआ और तेंदू जैसे फलदार वृक्षों में केवल वही पेड़ काटे गए हैं, जो बरसात के दौरान गिर चुके थे और जिनकी विधिवत मार्किंग की गई थी। इससे फल उत्पादन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
ग्रामीण सहभागिता और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान
विगत 13 सितंबर 2025 को ग्राम पंचायत भवन पेद्दा कोड़ेपाल में आयोजित बैठक में ग्रामीणों को पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी गई। बैठक में प्रस्तावित कार्य और लाभांश राशि समिति के माध्यम से किए जाने वाले विकास कार्य की विस्तृत जानकारी ग्रामीणों को दी गई।
लाभांश से गांव में होंगे विकास कार्य
वन विभाग ने बताया कि स्वीकृत कटाई का उद्देश्य केवल वन स्वास्थ्य सुधारना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास भी है। कटाई से प्राप्त लाभांश राशि गांव की मूलभूत सुविधाओं के विस्तार और विकास कार्यों में उपयोग की जाएगी। सभी कार्य समिति के माध्यम से पारदर्शी तरीके से संपन्न किए जाएंगे।
वन संरक्षण और विकास दोनों को मिलेगी नई दिशा
वन विभाग का कहना है कि वैज्ञानिक वन प्रबंधन की यह पहल एक साथ दो उद्देश्यों को पूरा करेगी। इससे वन क्षेत्र अधिक मजबूत और स्वस्थ होगा। ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। विभाग ने ग्रामीणों से इस प्रक्रिया में सहयोग प्रदान करने की अपील की है, ताकि वन संरक्षण और विकास दोनों को नई दिशा मिल सके।