वंदेमातरम सिर्फ नारा नही, आज़ादी का प्रतीक: पीएम मोदी
वंदेमातरम 150 साल से देश की आत्मा: प्रियंका गांधी
जनगण और वंदेमातरम मां भारती की दो आंखे: राजनाथ सिंह
आर पी तोमर
नई दिल्ली, 8 दिसंबर।
‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर लोकसभा में चर्चा शुरूआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपातकाल समेत कई घटनाओं का जिक्र करते हुए विपक्ष पर जमकर हमला बोला। उन्होंने वंदे मातरम को लेकर मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व वाली मुस्लिम लीग के विरोध का जिक्र और तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 1905 में जो वंदे मातरम महात्मा गांधी को राष्ट्र गान के रूप में दिखता था, फिर भी पिछली सदी में इसके साथ इतना बड़ा अन्याय क्यों हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा की शुरुआत की और वंदे मातरम् के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख किया। उन्होंने 1975 में लगाए गए आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि जब राष्ट्रीय गीत के 100 वर्ष हुए, तब देश आपातकाल की जंजीरों में जकड़ा हुआ था और संविधान का गला घोंट दिया गया था। उन्होंने सदन में कहा कि वंदे मातरम् स्वतंत्रता आंदोलन का स्वर बन गया था, हर भारतीय का संकल्प बन गया था। उन्होंने विपक्ष को घेरने के साथ वंदे मातरम को लेकर मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व वाली मुस्लिम लीग के विरोध का जिक्र किया और तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू की भूमिका पर भी सवाल उठाए। मोदी ने कहा कि महात्मा गांधी को साल 1905 में वंदे मातरम महात्मा गांधी को राष्ट्र गान के रूप में दिखता था, इसके बावजूद भी पिछली सदी में इसके साथ इतना बड़ा अन्याय क्यों हुआ। वंदे मातरम के साथ विश्वासघात क्यों हुआ? अन्याय क्यों हुआ? वो कौन-सी ताकत थी, जिसकी इच्छा खुद पूज्य बापू की भावनाओं पर भी भारी पड़ गई? जिसने वंदे मातरम जैसी पवित्र भावना को भी विवादों में घसीटा गया। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर लोकसभा में कहा कि बंगाल का विभाजन तो हुआ लेकिन बहुत बड़ा स्वदेशी आंदोलन हुआ और तब वंदे मातरम् हर जगह गूंज रहा था। अंग्रेज समझ गए थे कि बंगाल की धरती से निकला बंकिम बाबू का यह भाव सूत्र जो उन्होंने तैयार किया था उसने अंग्रेजों को हिला दिया था। इस गीत की ताकत इतनी थी कि अंग्रेजों को इस गाने पर प्रतिबंध लगाने पर मजबूर होना पड़ा था. गाने और छापने पर ही नहीं वंदे मातरम् शब्द बोलने पर भी सज़ा, इतने कठोर कानून लागू किए थे।’
मोदी ने कहा कि जिस मंत्र ने, जिस जयघोष ने देश की आज़ादी के आंदोलन को ऊर्जा और प्रेरणा दी थी,प त्याग और तपस्या का मार्ग दिखाया था, उस वंदे मातरम् का पुण्य स्मरण करना इस सदन में हम सबका बहुत बड़ा सौभाग्य है। हमारे लिए यह गर्व की बात है कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं और हम सभी इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् की 150 वर्ष की यात्रा अनेक पड़ावों से गुजरी है, लेकिन जब वंदे मातरम् के 50 वर्ष हुए थे, तब भी देश गुलामी में जीने के लिए मजबूर था।
राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘कुछ लोग यह नैरेटिव बनाने की कोशिश कर सकते हैं कि जन-गण-मण और वंदे मातरम के बीच एक दीवार खड़ी की जा रही है। ऐसा नैरेटिव बनाने का प्रयास विभाजनकारी सोच है। जो लोग यह बात नहीं समझते है वह मां की ममता को भी नहीं समझ सकते। राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि जन-गण-मन और वंदे मातरम मां भारती की दो आंखें है। मां भारती के दो अमर सपूतों की किलकारियां हैं। वंदे मातरम का उदघोष किसी के खिलाफ नहीं है। बल्कि यह हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान की अभिव्यक्ति है। राजनाथ सिंह ने कहा वंदे मातरम के साथ जो न्याय होना चाहिए था, वह नहीं हुआ। जन-गण-मण राष्ट्रीय भावना में बसी, लेकिन वंदे मातरम को दबाया गया। वंदे मातरम के साथ हुए अन्याय के बारे में हर किसी को जानना चाहिए। अध्यक्ष महोदय, वंदे मातरम के साथ इतिहास का एक बड़ा छल हुआ। इस अन्याय के बावजूद वंदे मातरम का महत्व कभी कम नहीं हो पाया। वंदे मातरम स्वंय में पूर्ण है, लेकिन इसे अपूर्ण बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने आगे कहा कि वंदे मातरम के साथ जो अन्याय हुआ, उसे जानना जरूरी है। क्योंकि देश की भावी पीढ़ी वंदे मातरम के साथ अन्याय करने वालों की मंशा जान सके। आज हम वंदे मातरम की गरिमा को फिर से स्थापित कर रहे हैं। राजनाथ सिंह ने कहा- बंगाल विभाजन के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान वंदे मातरम की गूंज जनमानस में बैठी। ब्रिटिश हुकुमत ने इसके खिलाफ एक सर्कुलर जारी किया। लेकिन फिर भी ब्रिटिश हुकूमत लोगों के मानस से वंदे मातरम को नहीं निकाल सकी। राष्ट्रीय चेतना जागृत करने के लिए उस समय वंदे मातरम समिति भी बनाई गई थी। 1906 में जब पहली बार भारत का पहला झंडा बनाया गया, तब उसके मध्य में वंदे मातरम लिखा था। वंदे मातरम नाम से अखबार भी था।
प्रियंका गांधी ने कहा- नेहरू, परिवारवाद पर चर्चा कर लें एक बार। इसके बाद मंहगाई, बेरोजगारी समेत दूसरे जरूरी मुद्दों पर चर्चा करें। प्रियंका के इतना कहने पर सदन में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। स्पीकर ने कहा- बिना तथ्यों के चर्चा करें। फिर प्रियंका ने कहा- ये इतने सालों से हम पर बिना तथ्यों के हमला करते आए हैं। सरकार देश की असलियत छुपाना चाहती है। इसलिए वंदे मातरम् पर चर्चा करना चाहती है।
प्रियंका गांधी ने कहा वंदे मातरम के इस स्वरूप पर सवाल उठाना, जिसे संविधान सभा ने स्वीकार किया, वह उन महान विभूतियों का अपमान है। प्रियंका गांधी ने रविंद्र नाथ ठाकुर, महात्मा गांधी, मौलाना अबुल कलाम आजाद, भीमराव अंबेडकर जैसे विभूतियों का अपमान है। हमारे प्रधानमंत्री महोदय 12 साल से प्रधानमंत्री हैं, लगभग उतने ही साल पंडित नेहरू ने जेल में बिताए। पंडित नेहरू ने देश की आजादी के लिए 12 साल जेल में बिताए। फिर 17 साल वो प्रधानमंत्री भी रहे। पंडित नेहरू के अपमान के लिए आपके मन में जितनी चीजें उन सभी को जमा कर लीजिए, फिर अध्यक्ष महोदय की अनुमति से लंबी चर्चा कर लीजिए। लेकिन जनता से हमे जिस काम के लिए यहां भेजा है, उस पर बात कीजिए। बेरोजगारी, गरीबी, प्रदूषण… इन पर बात क्यों नहीं होती है? प्रियंका गांधी ने कहा- हमारे पीएम 12 सालों से इस सदन में है। मैं 12 महीनों से हूं, मेरी सलाह है कि उन्होंने बताया था कि विपक्ष ने उनके अपनाने की लिस्ट बनाई थी। मैं उनसे कहती हूं वे नेहरू जी की गलतियों की एक लिस्ट बना दें। हम उन पर चर्चा करेंगे। 20 घंटे 40 घंटे, लेकिन इस सदन का कीमती समय बर्बाद नहीं करें। उन्होंने आगे कहा कि अगर नेहरू ने इसरो नहीं बनाया होता तो आज बंगाल यहां नहीं होता। अगर डीआरडीओ नहीं बनाते तो तेजस कहां बनता। एम्स नहीं बनाते तो कोविड में लोगों का इलाज कहां होता। देश की सेवा करते नेहरू ने दम तोड़ा। प्रियंका गांधी ने कहा कि 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने यह गीत गाया। 1905 में रवींद्रनाथ टैगोर ये गीत गाते हुए ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई में उतरे। ये गीत मातृभूमि के लिए मर मिटने की भावना को जगाता है। 1930 के दशक में सांप्रदायिक की राजनीति उभरी तब ये गीत विवादित होने लगा। उन्होंने आगे कहा कि 1937 में नेताजी कोलकाता में कांग्रेस अधिवेशन का आयोजन कर रहे थे। 20 अक्टूबर का लेटर उन्होंने सुनाया, लेकिन इससे पहले उन्होंने नेहरू को एक चिठ्ठी लिखी थी, इसका पीएम मोदी ने जिक्र नहीं किया। प्रियंका ने कहा कि हम देश के लिए हैं, आप चुनाव के लिए हैं। 17 अक्टूबर को चिठ्ठी के जवाब में नेहरू ने 20 अक्टूबर की चिठ्ठी में लिखा- मैंने तय किया है कि मैं 25 अक्टूबर कोलकाता आऊंगा, टैगोर से मिलूंगा। 28 अक्टूबर को कांग्रेस ने वंदे मातरम् को राष्ट्रगीत घोषित किया। इस कार्यसमिति की बैठक में सभी महापुरुष मौजूद थे। सभी इस प्रस्ताव से खुश थे। सहमत थे। प्रियंका गांधी ने कहा- आज इस चर्चा को पीएम ने शुरू किया। भाषण दिया- कहने में कोई झिझक नहीं है कि भाषण अच्छा देते हैं, बस थोड़ा लंबा है। बस एक कमजोरी है उनकी- तथ्यों के मामले में कमजोर हो जाते हैं। मैं तो जनता की प्रतिनिधि हूं कलाकार नहीं हूं। प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि- ‘तथ्यों को तथ्य के रूप में सदन में रखना चाहती हूं। वंदे मातरम् की वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में पीएम ने कहा 1896 में रवींद्र नाथ ने ये एक अधिवेशन में ये गीत गाया। ये अधिवेशन कांग्रेस का था। वंदे मातरम् की क्रोनॉलॉजी में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने पहले दो अंतरे लिखे। 1882 में उपन्यास आनंदमठ प्रकाशित किया, इसमें चार अंतरे और जोड़े गए। उन्होंने कहा कि ‘आपका मकसद है इसी अतीत में मंडराते रहें। जो हो चुका है, जो बीत चुका है, ये सरकार वर्तमान, भविष्य की ओर देखना नहीं चाहते। आज मोदी जी वो पीएम नहीं रहे जो पहले थे। उन्होंने आगे कहा- ये दिखने लगा है। इनकी नीतियां देश को कमजोर कर रही हैं। सत्ता पक्ष के लोग भी इससे सहमत हैं, इसलिए चुप हैं। देश को लोग तमाम समस्याओं से घिरे हैं। इनके पास इसका हल नहीं है। कल समय आ रहा है चुनाव पर चर्चा होगी, उस पर भी बोलेंगे। प्रियंका गांधी ने कहा- ये गीत 150 साल से देश की आत्मा का हिस्सा है। देश के लोगों के दिल में बसा है। 75 साल से ये देश में है। आज इस पर बहस की चर्चा क्यों हो रही है। मकसद क्या है इसका। जनता का विश्वास, दायित्व उनके प्रति हमारी जिम्मेदारी हम कैसे निर्वाहन कर रहे हैं। प्रियंका गांधी ने कहा- आपने बहस मांगी है। आप इलेक्टोरल रिफॉर्म की बहस नहीं मान रहे थे। इसकी वजह क्या है। हम क्यों आज ये बहस कर रहे हैं। राष्ट्रगीत पर क्यों बहस कर रहे हैं। बहस का कारण- बंगाल का चुनाव है। दूसरा मकसद- जिन्होंने स्वतंत्रता की आजादी लड़ी, सरकार उन पर नए आरोप लादना चाहती है। प्रियंका गांधी ने इशारों में सत्तापक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ही यह चर्चा कराई जा रही है।कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा- हमारे संसद में राष्ट्रीय गीत पर चर्चा हो रही है। जो एक भावना के ऊपर है। जब हम वंदे मातरम् का नाम लेते हैं। तो वही भावना उजागर होती है। स्वतंत्रता संग्राम की याद दिलाता है। उसका साहस, बल, नैतिकता याद दिलाता है। ब्रिटिश साम्राज्य इसके सामने झुका। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा- एक समय वो था जब वंदे मातरम् का शताब्दी वर्ष था। उस समय आपातकाल लगाकर देश को अंधकार में डालने का काम किया गया। उन्होंने आगे कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश के संविधान को तार-तार करने का काम किया था। उस समय तो चर्चा भी नहीं हो पाई थी। आज पीएम मोदी ने अपने भाषण में वंदे मातरम् का इतिहास और महत्व को देश के सामने रखा है। शिवसेना उद्धव के अरविंद सावंत ने कहा कि जब मैं स्कूल में था, तब वंदे मातरम्, जन गण मन और झंडा ऊंचा रहे हमारा, ये गीत हर जगह गाए जाते थे। आरएसएस, भाजपा पर परोक्ष कटाक्ष करते हुए कहते हैं कि कुछ संगठनों ने 50 सालों तक राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया। अब इन लोगों का नया प्रेम जागा है। कांग्रेस के नेता हुसैन दलवई ने भारत के मुसलमानों से हाथ जोड़कर अपील की है कि वे वंदे मातरम गीत का विरोध न करें, क्योंकि यह इस्लाम के खिलाफ नहीं है। सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि पीएम मोदी ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को ‘बंकिम दा’ कहा है। हमें इस पर आपत्ति है। बंगाली लोग इस तरह का कैज़ुअल लहजा बर्दाश्त नहीं करेंगे। डीएमके के सांसद ए राजा ने सवाल किया कि वंदे मातरम पर विभाजन किसने पैदा किया? ए राजा ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘विभाजन आपके पूर्वजों ने पैदा किया, मुसलमानों ने नहीं।’ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि सत्ता पक्ष हर चीज पर कब्जा करना चाहता है। अखिलेश ने कहा कि ये लोग हर बात का श्रेय लेने चाहते हैं। जो महापुरुष इनके नहीं हैं, ये उन्हें भी कब्जाने की कोशिश करते हैं। इनकी बातों से लगता है कि वंदे मातरम इन्हीं का बनवाया हुआ गीत है।
