सुख़ महलों की ऊँची दीवारों में नहीं मिलता,
न सोने-चाँदी के भंडारों में मिलता,
जिस मन में धैर्य का दीपक जलता रहे,
वहीं सच्चा सुख़ हर पल ख़िलता रहे।
धन से खरीदी जा सकती है सुविधा अपार,
पर मन की शांति का नहीं होता कोई बाजार,
धैर्य की छाँव में चिंताएँ ढल जाती हैं,
और सूनी राहें भी खुशियों से भर जाती हैं।
हालात चाहे कितने ही विपरीत क्यों न हों,
धैर्यवान मन के सपने कभी मृत क्यों न हों,
जो तूफानों में भी विश्वास संभाल लेता है,
वही जीवन का असली आनंद पा लेता है।
बाहर की चमक पलभर में फीकी पड़ जाती है,
मन की समृद्धि उम्रभर साथ निभाती है,
जिसने संतोष और संयम को अपना धन माना,
उसने बिना दौलत के भी सुख को पहचाना।
इसलिए सुख को दुनियाँ में मत ढूँढ़ते रहना,
अपने अंतर्मन में विश्वास का दीप जलाए रखना,
किशन धन घटे-बढ़े,मगर धैर्य कभी कम न होने देना,
यही भीतर की संपदा है,इसे सदा संजोए रखना।

