शब्द हवा से भी तेज़,दूर तलक चले जाते हैं,
मीठे बोल किसी के दिल में फूल खिला जाते हैं।
कड़वे शब्द रिश्तों में अनजानी दरारें कर जाते हैं,
इसलिए बोलने से पहले शब्दों को तौल लिया करें।
पीठ पीछे किसी की निंदा,मन को मैला करती है,
दूसरों की कमियाँ गिनकर अपनी ही गरिमा घटती है।
जिस बात से सामने वाला आहत हो सकता है,
उस बात को मौन की चादर में ढक लिया करें।
वाणी में मिठास रहे तो हर दिल अपना लगता है,
सम्मान भरा एक शब्द भी जीवन का दीपक जलाता है।
कटुता बाँटने से मनुष्य कभी महान नहीं होता,
प्रेम से बोला शब्द ही सच्ची पहचान बनाता है।
शब्द निकल जाएँ तो फिर लौटकर नहीं आते,
घाव दिए हुए बोल वर्षों तक मन में रह जाते।
इसलिए वाणी को संयम की डोर से बाँधकर रखना,
हर शब्द में प्रेम और हर स्वर में सम्मान रखना।
चलो ऐसी भाषा बोलें जो दिलों को जोड़ती जाए,
हर बात किसी उदास चेहरे पर मुस्कान लाए।
किशन निंदा नहीं,सद्भावना को अपना जीवन-मंत्र बनाएँ,
हमारे शब्द जाएँ जहाँ, वहाँ खुशियाँ छोड़ आएँ।

