
भारत श्री रत्नम् सम्मान–2025 में सांसद प्रवीण खंडेलवाल का आह्वान – “स्वदेशी अपनाओ, आत्मनिर्भर भारत बनाओ”
नई दिल्ली | विशेष संवाददाता
भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर राजधानी में एकता, स्वावलंबन और राष्ट्रनिर्माण की भावना से ओतप्रोत भारत श्री रत्नम् सम्मान–2025 समारोह का आयोजन किया गया।
यह भव्य आयोजन इंस्टीट्यूट फॉर सोशल रिफॉर्म्स एंड हायर एजुकेशन (ISRHE) द्वारा इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, लोदी गार्डन, नई दिल्ली में किया गया, जिसमें देशभर के समाजसेवियों, शिक्षाविदों और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सरदार पटेल के आदर्शों से प्रेरित समारोह
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ और समापन राष्ट्रीय गान के साथ हुआ।
समारोह के मुख्य अतिथि चांदनी चौक से सांसद श्री प्रवीण खंडेलवाल, अति विशिष्ट अतिथि दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की अध्यक्ष सुश्री सत्या शर्मा, तथा विशिष्ट अतिथि दधीची देह दान समिति के उपाध्यक्ष श्री सुधीर गुप्ता और संयुक्त राष्ट्र के वर्ल्ड पीस एम्बेसडर एवं वर्ल्ड बौद्ध फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. परविंदर सिंह रहे।
ISRHE के अध्यक्ष डॉ. अतुल शर्मा और आयोजन सचिव डॉ. रेशु गुप्ता के नेतृत्व में कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
संचालन सुश्री गौरी शर्मा और सुश्री गीत शर्मा ने किया, जबकि मीडिया प्रबंधन की जिम्मेदारी ओम शर्मा, दीपक उपाध्याय, और सुमित ने निभाई।
सरदार पटेल: भारत की एकता के शिल्पकार
कार्यक्रम में सरदार पटेल की महानता को नमन करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने भारत के 562 रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर “अखंड भारत” की नींव रखी।
उनकी दृढ़ता, संगठन क्षमता और प्रशासनिक दृष्टि आज भी शासन और नेतृत्व के लिए आदर्श हैं।
उनका संदेश — “देश पहले, स्वयं बाद में” — आज के भारत के लिए प्रेरणा बना हुआ है।
सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा —
“सरदार पटेल ने जिस अखंड भारत का सपना देखा था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसी विरासत को आत्मनिर्भर भारत के रूप में साकार कर रहे हैं। आज समय है कि हर नागरिक स्वदेशी अपनाए और भारत को आर्थिक रूप से सशक्त बनाए।”
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की 500 से अधिक योजनाएँ — आत्मनिर्भर भारत, स्वच्छ भारत, स्किल इंडिया, मुद्रा योजना, आयुष्मान भारत — राष्ट्र की प्रगति की रीढ़ हैं।
उन्होंने जनता से अपील की कि वे स्वदेशी अपनाकर भारत को वैश्विक शक्ति बनाने में सहभागी बनें।
70 समाजसेवियों को “भारत श्री रत्नम् सम्मान”
समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए 70 विशिष्ट समाजसेवियों, जिनमें महिलाएँ और पुरुष दोनों शामिल थे, को शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, पर्यावरण और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
सभी सम्मानित व्यक्तित्वों ने सरदार पटेल की विचारधारा को अपना प्रेरणा स्रोत बताया और एक स्वर में “स्वदेशी और आत्मनिर्भरता” के पथ पर चलने की शपथ ली।
शपथ में कहा गया —
“हम जीवनभर स्वदेशी अपनाएँगे, प्रत्येक नागरिक को आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए जागरूक करेंगे और सरदार पटेल की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाएँगे।”
देहदान: मानवता की सर्वोच्च सेवा
समापन समारोह में श्री सुधीर गुप्ता (उपाध्यक्ष, दधीची देह दान समिति) ने कहा —
“अंगदान और देहदान मानवता की सर्वोच्च साधना है। मृत्यु के बाद भी कोई व्यक्ति किसी अन्य को जीवन दे सकता है — यह सनातन धर्म का सर्वोच्च आदर्श है।”
उन्होंने कहा कि अंगदान जैसे कार्य समाज में नई रोशनी और जीवन का संचार करते हैं।
डॉ. परविंदर सिंह ने अपने संबोधन में भारत को विश्व शांति और नैतिक नेतृत्व का केंद्र बताया, वहीं सुश्री सत्या शर्मा ने ISRHE के समाज सुधार कार्यों की सराहना की एकता और युवा सशक्तिकरण
ISRHE के अध्यक्ष डॉ. अतुल शर्मा ने कहा —
“हमारा उद्देश्य प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें राष्ट्र निर्माण में प्रेरित करना है। शिक्षा और स्वदेशी के माध्यम से भारत को आत्मनिर्भर बनाना ही ISRHE का ध्येय है।”
“भारत श्री रत्नम् सम्मान–2025 समारोह में सांसद प्रवीण खंडेलवाल, सत्या शर्मा, सुधीर गुप्ता और डॉ. परविंदर सिंह सम्मानित समाजसेवियों के साथ सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर स्वदेशी और एकता की शपथ लेते है