
आर पी तोमर
नई दिल्ली, 4 जनवरी।
दिल्ली सरकार राजधानी के सभी डबल-शिफ्ट सरकारी स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से सिंगल-शिफ्ट में बदलने की योजना पर काम कर रही है। अगर यह योजना पूरी तरह से लागू होती है, तो इससे कक्षाओं में भीड़ कम होगी, पढ़ाई का समय बढ़ेगा और सरकारी स्कूलों के शैक्षणिक परिणाम बेहतर होने की उम्मीद है।
ख़बरें दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों के लिए आने वाले सालों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। दिल्ली सरकार अब राजधानी में चल रहे डबल-शिफ्ट (सुबह–शाम) स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से सिंगल-शिफ्ट स्कूलों में बदलने की योजना बना रही है. इस प्रस्ताव पर काम शुरू हो चुका है और इसे जल्द ही दिल्ली विधानसभा के आगामी सत्र में चर्चा के लिए रखा जा सकता है। दिल्ली स्कूलों में बंद होगी शाम की शिफ्ट, सिर्फ सिंगल शिफ्ट में होगी पढ़ाई। जो छात्र शाम की शिफ्ट में पढ़ते हैं, उन्हें सुबह की शिफ्ट में लाने के लिए एक्स्ट्रा क्लास और स्कूल की जरूरत होगी। दिल्ली में शिक्षा निदेशालय के तहत कुल 799 स्कूल हैं। इनमें से 284 स्कूल ऐसे हैं, जहां दो शिफ्टों में पढ़ाई होती है। यानी एक ही स्कूल में सुबह एक शिफ्ट और शाम को दूसरी शिफ्ट में पढ़ाई कराई जाती है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सभी डबल-शिफ्ट स्कूलों को सिंगल-शिफ्ट में बदलना आसान नहीं होगा। इसकी सबसे बड़ी वजह है जगह की कमी। फिलहाल जो छात्र शाम की शिफ्ट में पढ़ते हैं, उन्हें सुबह की शिफ्ट में लाने के लिए एक्स्ट्रा क्लास और स्कूल की जरूरत होगी। इस समस्या से निपटने के लिए शिक्षा निदेशालय हर साल करीब 10 नए स्कूल बनाने की योजना पर काम कर रहा है। 2029 तक लगभग 50 नए स्कूल बनाए जा सकते हैं। इसके लिए विभिन्न भूमि एजेंसियों द्वारा आवंटित 70 खाली प्लॉट चिन्हित किए गए हैं। जिला स्तर पर डिप्टी डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन से नई स्कूल बिल्डिंग, खेल सुविधाएं, लाइब्रेरी और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रस्ताव भी मांगे गए हैं। कई मौजूदा स्कूल कैंपस में खाली जमीन उपलब्ध है, जिसका इस्तेमाल नई बिल्डिंग, एक्स्ट्रा क्लास, खेल मैदान, मल्टीपर्पज हॉल, लाइब्रेरी और लैब बनाने के लिए किया जा सकता है। जहां स्कूल कैंपस में विस्तार संभव नहीं होगा, वहां नए स्थानों की पहचान कर स्कूल बनाए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि सिंगल-शिफ्ट सिस्टम से कक्षाओं में छात्रों की भीड़ भी कम होगी। दिल्ली के कई इलाकों में अभी भी छात्र–कक्षा अनुपात काफी ज्यादा है, जिसे शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तय स्टैंडर्ड के अनुसार कम करने की जरूरत है। इसके लिए नए स्कूल और एक्स्ट्रा क्लास जरूरी हैं। फिलहाल दिल्ली के एक तिहाई से ज्यादा सरकारी स्कूल शाम की शिफ्ट में चलते हैं और इनमें से अधिकतर केवल लड़कों के स्कूल हैं। आंकड़े बताते हैं कि इन स्कूलों का प्रदर्शन सुबह या को-एड स्कूलों के मुकाबले कमजोर रहता है। साल 2024 में शाम की शिफ्ट वाले स्कूलों का पासिंग प्रतिशत 95.33% रहा, जबकि सुबह की शिफ्ट वाले स्कूलों का पासिंग प्रतिशत 96.96% था। वहीं सिंगल-शिफ्ट में चलने वाले ‘जनरल’ स्कूलों का रिजल्ट सबसे बेहतर रहा, जहां पासिंग प्रतिशत 98.19% दर्ज किया गया। साल 2024 में कक्षा 12वीं के नतीजों में भी यही ट्रेंड दिखा। केवल लड़कों के स्कूलों का पासिंग प्रतिशत 95.96% रहा, जबकि को-एड स्कूलों में यह 98.07% और लड़कियों के स्कूलों में 97.35% रहा।
गुणवत्ता सूचकांक यानी छात्रों के औसत अंकों में भी लड़कों के स्कूल पीछे रहे। लड़कों के स्कूलों का एवरेज स्कोर 299.67 रहा, जबकि को-एड स्कूलों का 321.28 और लड़कियों के स्कूलों का 316.23 दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि सिंगल-शिफ्ट सिस्टम से पढ़ाई का समय बढ़ेगा और शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव भी कम होगा। एक अधिकारी के अनुसार, “दो शिफ्ट में स्कूल चलाने से पढ़ाने का समय सीमित हो जाता है। सिंगल-शिफ्ट में बच्चों को पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए ज्यादा समय मिलेगा.” सरकार की योजना है कि सिंगल-शिफ्ट स्कूलों को स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित शिक्षक और बेहतर बुनियादी ढांचे से लैस किया जाए। अधिकारी के मुताबिक, सरकार का उद्देश्य सिर्फ स्कूलों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाना है।