राहों में काँटे हों तो कदमों को रुकना नहीं सिखाएँ,
अँधियारे कितने भी गहरे हों,उम्मीद के दीप जलाएँ,
मंज़िल केवल चाहने से नहीं,तपने से मिला करती है,
सफ़लता के लिए अपनी संकल्प शक्ति को बढ़ाएँ।
जब भाग्य की रेखाएँ मौन हों,कर्म की कलम उठाएँ,
हार अगर दरवाज़ा खटखटाए,हौसलों से उसे लौटाएँ,
वक्त परीक्षा लेता है केवल हमारे धैर्य और इरादों की,
गिरकर फ़िर उठने की आदत को अपना संस्कार बनाएँ।
दुनियाँ अक्सर चमकते सूरज को ही सलाम करती है,
संघर्ष की काली रात कहाँ किसी को दिखाई पड़ती है,
इसलिए तालियों से नहीं,अपने अंतर्मन से शक्ति पाएँ,
भीड़ के पीछे चलने के बदले अपना रास्ता स्वयं बनाएँ।
सफ़ल वही नहीं जो धन-दौलत के ऊँचे शिखर चढ़ जाए,
सफ़ल वह भी है जो गिरते इंसान को हाथ देकर उठाए,
ज़िसकी जीत से किसी और की आँखों में आँसू न आएँ,
ऐसी सफ़लता पाएँ,मानवता भी हम पर गर्व कर पाए।
जीवन क्षणभंगुर है,फिर क्यों डरकर सपनों को दफनाएँ,
जो आज हमारे हाथ में है,उसे कल के भरोसे क्यों गँवाएँ,
किशन संकल्प जब सेवा,सत्य व सत्कर्म से जुड़ जाता है
तब इंसान ही नहीं,उसके विचार भी इतिहास बन जाते हैं



