झूठ भले पलभर को चेहरे पर मुस्कान सजाता है,
विश्वास के आँगन में चुपके से दरार बनाता है।
सच कड़वा होकर भी रिश्तों को बचा जाता है,
झूठ मीठा बनकर अपनों को अपनों से दूर कर जाता है।
जहाँ सच की नींव हो,वहाँ रिश्ते मजबूत बनते हैं,
विश्वास के धागे फिर जीवनभर साथ चलते हैं।
झूठी बुनियाद पर बने महल ढह जाया करते हैं,
सच के सहारे टूटे दिल भी जुड़ जाया करते हैं।
झूठ केवल जुबाँ से नहीं,मन में भी बोझ बढ़ाता है,
भीतर का सुकून छीनकर चेहरे पर तनाव सजाता है।
सच बोलने वाला कठिनाइयों से घबराता नहीं,
अपने ही अंतर्मन से कभी नज़रें चुराता नहीं।
सच में भले ही कुछ पल के लिए विरोध सहना पड़े,
अपने ही शब्दों के कारण कभी अकेले रहना पड़े।
मगर सत्य का साहस अंतर्मन को निर्भय बनाता है,
और समय आने पर वही विश्वास लौटकर आता है।
रिश्तों की असली दौलत न धन है,न कोई उपहार,
सच और भरोसे से ही खिलता है प्रेम का संसार।
किशन झूठ से जीतकर भी इंसान भीतर से हार जाता है,
सच पर टिककर चलने वाला दिलों में स्थान पाता है।

