
दिल्ली/अलीगढ़। नेपाल से आई एक युवती, जो अपने प्रेमी से मिलने भारत आयी थी, रास्ते में अचानक लापता हो गई। करीब 14 दिनों तक वह भटकती रही और स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उसके जीवन पर भी खतरा मंडराने लगा। लेकिन इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका विश्व हिंदू महासंघ की टीम—राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष सचिन वशिष्ठ जी और सामाजिक कार्यकर्ता सुनीता सिंह गौर जी—ने निभाई।
घटना की जानकारी मिलते ही संगठन की टीम सक्रिय हुई। नेपाल से आए युवक ने बताया कि उसकी प्रेमिका भारत पहुँचकर उससे मिसिंग हो गई है। मामले की गंभीरता को समझते हुए विश्व हिंदू महासंघ ने तुरंत सुरागों की तलाश शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि युवती अलीगढ़ में देखी गई है। इसके बाद सचिन वशिष्ठ जी और सुनीता सिंह गौर जी तुरंत अलीगढ़ पहुँचे।
स्थानीय स्तर पर कई मुश्किलों का सामना करते हुए टीम ने युवती को सुरक्षित बरामद किया। युवती किसी अन्य व्यक्ति के पास रह रही थी, लेकिन सौभाग्य से उसके साथ किसी प्रकार की प्रताड़ना नहीं हुई। देर रात पूरी टीम युवती को लेकर दिल्ली वापस लौटी, लेकिन नेपाल (एम्बेसी सहायता केंद्र) बंद होने के कारण उन्हें दरवाजे पर ही रात बितानी पड़ी। बावजूद इसके, सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया।
सुबह होते ही युवती को विधिक प्रक्रिया के तहत दूतावास के सुपुर्द किया गया ताकि उसका भविष्य सुरक्षित रहे। संगठन ने न केवल युवती को सुरक्षित उसके प्रेमी से मिलवाया, बल्कि उसे कानूनी संरक्षण भी दिलवाया।
इस पूरे अभियान में विश्व हिंदू महासंघ ने मानवता, जिम्मेदारी और साहस का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। संगठन की तत्परता से एक युवती का जीवन बर्बाद होने से बच गया। यह घटना साबित करती है कि जब समाज और संगठन मिलकर कार्य करते हैं, तो बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान संभव है।