
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगे महासमुंद में आज 1 मार्च 15 को रेलवे पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया गया है। यह छत्तीसगढ़ सरकार की रेखाचित्र नीति से प्रभावित है। सरेंडर करने वालों में लीडर लीडर डेवलपमेंट (उर्फ सुदर्शन/बन्ना) शामिल हैं, जो माओवादी संगठन के ‘स्पेशल जोनल कमेटी’ के सदस्य थे। उस पर 25 लाख रुपये का एप्लायंस था.
मिली जानकारी के अनुसार ये सभी सम्मानित बीबीएम (बलां गीर-बरगढ़-महासमुंद) डिवीजन समिति से जुड़े थे, जो छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर सक्रिय थे। इन सभी पर कुल मिलाकर लगभग 73 लाख रुपये की घोषणा की गई थी। सरेंडर करने वाले 15 सदस्यों में 9 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल हैं।
आत्मसमर्पण के दौरान भारी मात्रा में आधुनिक हथियार बंदूकें शामिल हैं, जिनमें 3 AK-47, 2 SLR, 2 इंसास (INSAS) राइफल और 3 .303 राइफल समेत कुल 14 हथियार शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस आशय के साथ ही बीबीएम डिवीजन पूरी तरह से समाप्त हो गया है, जिससे रामपुर-संबलपुर क्षेत्र में आवास मुक्त होना एक बड़ा कदम है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति महासमुंद जिला मुख्यालय में हुई।