आर पी तोमर
नई दिल्ली। वैसे तो भारत मे यह सीख हमेशा से ही दी जाती है कि चींटी 99 बार पहाड़ पर चढ़ते हुए फिसली अंततः 100वी बार सफल हुई। कुछ उस तरह की ही सफलता भारतीय महिला क्रिकेट टीम को मिली है जिसने दक्षिणी अफ्रीका को हराकर विश्व चेम्पियन का खिताब अपने नाम किया। इस जीत से भारत मे जिस तरह से पटाखे छोड़कर जश्न मनाया गया, उससे लगने लगा था कि देश में दूसरी दिवाली मनाई जा रही है। वही बीसीसीआई ने भी खिलाड़ियों पर पैसों की बारिश कर दी। वर्मा-शर्मा की जोड़ी का भी रिकार्ड बना। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लिखा- आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 के फ़ाइनल में भारतीय टीम की शानदार जीत। फाइनल में उनका प्रदर्शन अद्भुत कौशल और आत्मविश्वास से भरा रहा। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में असाधारण टीम वर्क और दृढ़ता दिखाई। हमारी खिलाड़ियों को बधाई। यह ऐतिहासिक जीत भविष्य की चैंपियन खिलाड़ियों को खेलों में भाग लेने के लिए प्रेरित करेगी।
नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में दो नवंबर 2025 को इतिहास रचा गया। बारिश के कारण महिला वनडे विश्व कप 2025 का फाइनल मुकाबला दो घंटे देरी से शुरू हुआ। लगातार इंतजार के बाद आखिरकार जब टॉस हुआ तो दक्षिण अफ्रीका ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला लिया। ये वही स्टेडियम है जहां भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रिकॉर्ड चेज करते हुए फाइनल में जगह बनाई थी। इन सब के बीच भारतीय महिला टीम ने शानदार जज्बा दिखाते हुए दक्षिण अफ्रीका को हराया और 52 वर्षों का खिताबी सूखा समाप्त कर लिया। इसमें कोई दो राय नहीं है कि भारत की यह जीत वैसी ही जैसे 1983 में कपिल देव की अगुआई वाली भारतीय पुरुष टीम विश्व कप जीता। उस वक्त भी भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा था और आज महिला टीम की सफलता पर भी प्रशंसकों में उतनी ही खुशी है। भारतीय महिला टीम के लिए ये सफर आसान नहीं था। एक समय तो ऐसा भी था जब टीम को दावेदार भी नहीं माना जाता था। भारतीय टीम इस दौरान दो मौकों पर फाइनल में भी पहुंची, लेकिन उसे ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के हाथों पराजय झेलनी पड़ी। हरमनप्रीत कौर की अगुआई वाली टीम के पास अपनी धरती पर खिताबी सूखा समाप्त करने का ये अच्छा मौका था और इस टीम को इस अवसर को अच्छी तरह भुनाया। भारतीय महिला टीम का वनडे या टी20 विश्व कप में अब तक सफर कैसा रहा, इस पर आने से पहले ये जानना जरूरी है कि इस टीम ने मौजूदा टूर्नामेंट में किस तरह प्रदर्शन किया। दिलचस्प बात ये है कि टीम को ग्रुप चरण में लगातार तीन हार का सामना करना पड़ा था, इसके बावजूद टीम ने सेमीफाइनल की उम्मीद नहीं छोड़ी थी। भारत ने महिला विश्व कप में अपने अभियान की शुरुआत सह मेजबान श्रीलंका को बारिश से बाधित मुकाबले में 59 रनों से हराकर की। इसके बाद उसने अगले मैच में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 88 रनों से हराया। लगातार दो जीत के बाद भारतीय अभियान को उस वक्त झटका लगा जब उसने हार की हैट्रिक लगाई और उस वक्त लगा कि कहीं भारत का सफर ग्रुप चरण में ही ना थम जाए। भारत को पहले इसी दक्षिण अफ्रीका टीम के खिलाफ तीन विकेट से हार मिली जिसके खिलाफ उसने रविवार को फाइनल खेला। फिर टीम को ऑस्ट्रेलिया ने तीन विकेट से और इंग्लैंड ने चार रन हराया। भारत के लिए अब न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच जीतना बहुत अहम था। दोनों ही टीमों के लिए यह मैच वर्चुअल नॉकआउट की तरह था, लेकिन भारतीय टीम ने स्मृति मंधाना और प्रतिका रावल की शानदार पारियों से न्यूजीलैंड के सामने विशाल लक्ष्य रखा और बारिश से बाधित मुकाबले में डीएलएस के जरिये 53 रनों से जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में जगह बनाई। भारतीय टीम का ग्रुप चरण का अगला मैच बांग्लादेश से था, लेकिन बारिश के कारण ये मुकाबला धुल गया। फिर टीम ने सेमीफाइनल में सात बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को हराकर बाहर का रास्ता दिखाया था।
आइए अब जानते हैं पिछले कई वर्षों में भारतीय महिला टीम का वनडे और टी20 विश्व कप में सफर कैसा रहा। किस तरह हरमनप्रीत ने वो कर दिखाया जो डायना एडुल्जी और मिताली राज भी नहीं कर सकी थीं…
विश्व कप में भारतीय महिला टीम का सफर
1973: आईसीसी महिला वनडे विश्व कप का पहला संस्करण इंग्लैंड में खेला गया था, लेकिन भारतीय टीम ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। 1978: भारत ने इस टूर्नामेंट की मेजबानी की, लेकिन अपने पहले विश्व कप में टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और सफर ग्रुप चरण में ही थम गया।
1982: न्यूजीलैंड की मेजबानी में हुए उस टूर्नामेंट में भारत ने विश्व कप की अपनी पहली जीत दर्ज की और एडुल्जी के नेतृत्व में दम दिखाने की कोशिश की, लेकिन यहां भी टीम ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ सकी। 1988: महिला विश्व कप का आयोजन ऑस्ट्रेलिया में हुआ, लेकिन भारतीय टीम इसका हिस्सा नहीं थी। 1993: भारत इंग्लैंड में हुए इस टूर्नामेंट में राउंड रॉबिन स्टेज में चौथे स्थान पर रहा। उस वक्त तक विश्व कप में टीम का यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। 1997: भारत ने दूसरी बार इस वैश्विक खेल की मेजबानी की और सेमीफाइनल में जगह बनाने में सफल हुई जहां उसे ऑस्ट्रेलिया से हार मिली। 2000: भारत ने न्यूजीलैंड में खेले गए इस टूर्नामेंट में एक बार फिर सेमीफाइनल में जगह बनाई, लेकिन वहां उसे न्यूजीलैंड के हाथों हार मिली। 2005: भारत ने दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी में हुए टूर्नामेंट में पहली बार खिताबी मुकाबले में जगह बनाई। मिताली की अगुआई वाली टीम को हालांकि, ऑस्ट्रेलिया से हार मिली। 2009: अपने पहले खिताब की तलाश में उतरी भारतीय टीम को तीसरे स्थान के प्लेऑफ में ऑस्ट्रेलिया से हार मिली। 2013: भारत ने तीसरी बार विश्व कप की मेजबानी की, लेकिन इस बार टीम सुपर छह चरण में भी नहीं पहुंच सकी और चार टीमों के ग्रुप ए में सबसे आखिरी स्थान पर रही। 2017: भारत ने दूसरी बार फाइनल में जगह बनाई, लेकिन इस बार भी मिताली राज की अगुआई वाली टीम चैंपियन नहीं बन सकी और उसे लॉर्ड्स में खेले गए फाइनल में इंग्लैंड से हार मिली। 2022: न्यूजीलैंड की मेजबानी में हुए विश्व क में भारत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था और टीम सेमीफाइनल में भी नहीं पहुंच सकी थी। भारत राउंड रॉबिन प्रारूप में खेले गए टूर्नामेंट में पांचवें स्थान पर रही थी। 2025: खुद की मेजबानी में दक्षिण अफ्रीका को हराकर खत्म किया वर्षों का इंतजार।
टी20 विश्व कप में भारतीय महिला टीम का सफर
2009: सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड से मिली हार। 2010: सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने हराया। 2012: ग्रुप चरण में सफर समाप्त। 2014: ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ सकी टीम।
2016: ग्रप चरण की बाधा पार नहीं कर भारतीय टीम। 2018: सेमीफाइनल में पहुंची, लेकिन इंग्लैंड से मिली हार। 2020: पहली बार फाइनल में पहुंची, लेकिन खिताबी मैच में हारकर उपविजेता रही।
2023: सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया से हारी। 2024: ग्रुप चरण में ही थम गया सफर।
महिला टीम पर पैसों की बारिश
आईसीसी ने टूर्नामेंट की शुरुआत से पहले घोषणा की थी कि महिला वनडे विश्व कप 2025 की विजेता टीम को अब तक की सबसे बड़ी इनामी राशि मिलेगी और ऐसा ही हुआ है। इस बार की चैंपियन टीम भारतीय टीम को 51 करोड़ करोड़ रुपये दिए गए। यह इनामी राशि पिछले संस्करण यानी 2022 में हुए महिला वनडे विश्व कप की तुलना में चार गुना ज्यादा हैं।पिछले महिला वनडे विश्व कप 2022 (न्यूजीलैंड) में विजेता टीम को 1.32 मिलियन डॉलर यानी करीब 11.65 करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन 2025 संस्करण में प्राइज मनी का ढांचा पूरी तरह बदल दिया गया है। इस बार कुल इनामी राशि 13.88 मिलियन डॉलर (करीब 122.5 करोड़ रुपये) रही।दिलचस्प बात यह है कि यह प्राइज मनी पुरुष वर्ल्ड कप 2023 (10 मिलियन डॉलर यानी 88.26 करोड़ रुपये) से भी ज्यादा है।
गूगल व माइक्रोसॉफ्ट ने दी बधाई
भारतीय टीम की खास विजय पर देश ही नहीं बल्कि दुनिया के कई दिग्गजों ने प्रसन्नता जाहिर की है। इस शानदार जीत पर गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने प्रतिक्रिया देते हुए महिला टीम को बधाई दी है। उन्होंने लिखा कि यह महिला क्रिकेट विश्वकप का फाइनल बेहद रोमांचक था। ये मैच 1983 और 2001 की यादें ताजा करने वाला था। टीम इंडिया को इस शानदार जीत के लिए बधाई।माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला ने भी इसी भावना को दोहराया है। उन्होंने लिखा कि महिला क्रिकेट के लिए यह एक ऐतिहासिक दिन है। आज नए अध्याय लिखे गए, बाधाएं टूटीं, दिग्गजों का जन्म हुआ। यह जीत भारतीय महिला क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक क्षण साबित हुई, जिसने दशकों से चली आ रही हार का अंत किया है। हरमनप्रीत कौर की निडर टीम ने आखिरकार 2005 और 2017 की हार को भुलाकर खचाखच भरे स्टेडियम में एक इतिहास रच दिया।
जो पहले खेला वही चेम्पियन
महिला वनडे विश्व कप के फाइनल में टॉस जीतना जितना अहम है, उतना ही बड़ा फैसला होता है- पहले बल्लेबाजी करना या गेंदबाजी। आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो दशकों में पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम का पलड़ा भारी रहा है। साल 2000 से अब तक हुए सात महिला वनडे विश्व कप फाइनल में छह बार खिताब उसी टीम ने जीता है जिसने पहले बल्लेबाजी की। अब भारत भी इस लिस्ट में शामिल हो चुका है। दक्षिण अफ्रीका ने 2025 वनडे विश्व कप के फाइनल में टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला लिया था। यानी उन्होंने खुद ही भारत को तोहफे में जीत दी। न्यूजीलैंड में हुए 2000 विश्व कप फाइनल में मेजबान टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 184 रन बनाए और ऑस्ट्रेलिया को 180 पर रोककर चार रन से ऐतिहासिक जीत दर्ज की। सात फाइनल्स में सिर्फ 2009 में नतीजा अलग रहा, बाकी छह बार पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम का झंडा बुलंद रहा। 2005 (मेजबान: दक्षिण अफ्रीका): ऑस्ट्रेलिया ने पहले बैटिंग करते हुए भारत के खिलाफ 215 रन बनाए और 98 रनों से जीता। भारतीय टीम 46 ओवर में 117 रन पर सिमट गई।
2009 (मेजबान: ऑस्ट्रेलिया): अपवाद यह रहा, जब इंग्लैंड ने 2009 महिला वनडे विश्व कप के फाइनल में चेज करते हुए न्यूजीलैंड को चार विकेट से हराया। यानी एकमात्र मौका जब पीछा करने वाली टीम चैंपियन बनी। पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड की टीम 47.2 ओवर में 166 रन पर सिमट गई। जवाब में इंग्लैंड ने 46.1 ओवर में छह विकेट गंवाकर लक्ष्य हासिल कर लिया। 2013 (मेजबान: भारत): ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी की और वेस्टइंडीज को 114 रनों से हराकर खिताब जीता। पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने 50 ओवर में सात विकेट पर 259 रन बनाए। जवाब में वेस्टइंडीज की टीम 43.1 ओवर में 145 रन पर सिमट गई। 2017 (मेजबान: इंग्लैंड): इंग्लैंड ने पहले बैटिंग करते हुए भारत को नौ रनों से मात दी। लॉर्ड्स में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में सात विकेट गंवाकर 228 रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम 48.4 ओवर में 219 रन पर ऑलआउट हो गई। 2022 (मेजबान: न्यूजीलैंड): ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी में 356 रन ठोककर इंग्लैंड को 71 रनों से हराया। क्राइस्टचर्च में ऑस्ट्रेलिया ने 50 ओवर में पांच विकेट गंवाकर 356 रन बनाए थे। जवाब में इंग्लैंड की टीम 43.4 ओवर में 285 रन पर ऑलआउट हो गई। 2025 (मेजबान: भारत/श्रीलंका): टीम इंडिया ने महिला वनडे विश्व कप 2025 के फाइनल में द. अफ्रीका को 52 रन से हरा दिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 50 ओवर में सात विकेट पर 298 रन बनाए थे। जवाब में दक्षिण अफ्रीका की टीम 246 रन पर सिमट गई। दीप्ति शर्मा ने पांच विकेट लेकर मैच पलट दिया। 2025 में भी यही ट्रेंड दोहराएगा गया।
कमाल: शर्मा-वर्मा, यानी जीत की गारंटी
क्रिकेट में अक्सर कुछ नाम अपनी गूंज छोड़ जाते हैं। लेकिन जब एक ही उपनाम वाली जोड़ी दो अलग-अलग टूर्नामेंट्स में चमक बिखेर दे, वो भी महिला और पुरुष क्रिकेट में, तो कहानी अपने आप में ऐतिहासिक बन जाती है। दो महीने पहले एशिया कप में ‘शर्मा-वर्मा’ की जोड़ी यानी अभिषेक शर्मा और तिलक वर्मा ने भारतीय पुरुष टीम को खिताब दिलाया था। अब वही जादू महिला विश्व कप में दीप्ति शर्मा और शेफाली वर्मा ने दोहराया है। सितंबर में खेले गए एशिया कप 2025 में युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा और ओपनर अभिषेक शर्मा ने मिलकर भारत को शानदार जीत दिलाई थी। अभिषेक ने फाइनल छोड़ लगभग हर मैच में आक्रामक अंदाज दिखाया था, जबकि फाइनल में तिलक वर्मा का बल्ला क्या खूब चला था। पूरे टूर्नामेंट में जहां अभिषेक की विस्फोटक बल्लेबाजी दिखी, वहीं फाइनल में तिलक का क्लासिक टच दिखा। ये जोड़ी भारत की नई पीढ़ी की ताकत बनकर उभरी थी। अब महिला विश्व कप 2025 के फाइनल में वही कहानी दोहराई गई, लेकिन इस बार नायक नहीं, नायिकाएं थीं। शेफाली वर्मा, जो टूर्नामेंट के शुरू होने से कुछ दिन पहले ही टीम में शामिल हुईं, ने फाइनल में धुआंधार पारी खेली, साथ ही दो विकेट भी चटकाए और भारत को जीत की राह दिखाई। वहीं, दीप्ति शर्मा ने गेंद से कमाल करते हुए पूरे टूर्नामेंट में 22 विकेट झटके, जो विश्व कप इतिहास में संयुक्त रूप से दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इसके अलावा फाइनल में 58 रन की पारी भी खेली। वह प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहीं। अब इसे अजब संयोग कहें या कुछ और, जहां एशिया कप फाइनल में तिलक वर्मा प्लेयर ऑफ द मैच और अभिषेक शर्मा प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे थे, वहीं महिला विश्व कप में शेफाली वर्मा प्लेयर ऑफ द मैच और दीप्ति शर्मा प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहीं। दोनों बार भारत के लिए शर्मा-वर्मा नाम की जोड़ी ही ट्रॉफी जीतने वाली साबित हुई। इन चारों खिलाड़ियों ने दिखा दिया कि भारतीय क्रिकेट अब सिर्फ नाम नहीं, ब्रांड ऑफ टैलेंट बन चुका है, जो किसी भी मंच पर मैच बदल सकता है। फैंस तो यहां तक कहने लगे हैं- शर्मा-वर्मा, यानी जीत की गारंटी।
