आर पी तोमर
नई दिल्ली, 16 दिसंबर।
लोकसभा में विपक्ष के जबरदस्त हंगामे के बीच सरकार ने ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ पेश किया, जो महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्थान पर लाया गया है। ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच यह विधेयक पेश करने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दी। संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर को शुरू हुआ था। 18वीं लोकसभा का यह छठा सत्र है और राज्यसभा का 269वां सत्र है। यह सत्र 19 दिसंबर तक चलेगा। विपक्ष द्वारा लोकसभा में जारी हंगामे के बीच मंगलवार को सरकार ने कई अहम विधेयक पेश किए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीमा क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) को 100 प्रतिशत तक बढ़ाने के प्रावधान वाला विधेयक पेश किया। साथ ही ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ भी आज लोकसभा में पेश किया गया। लोकसभा में आज ‘जी राम जी’ बिल पेश किया गया। संसद में इस पर घमासान मचा हुआ है। केंद्र सरकार मनरेगा कानून खत्म करके नया ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून लेकर आई है। इसका नाम ‘वीबी जी राम जी’ बिल रखा गया है। इस बिल में 100 दिन के बजाय 125 दिन रोजगार की गारंटी होगी। वहीं, मनरेगा में 100 दिन रोजगार की गारंटी होती थी। इस बिल को लेकर संसद में हंगामा मचा है। इसके फुल फॉर्म को भी वजानते हैं, जिससे अधिकतर लोग अनभिज्ञ होंगे।
फुल फॉर्म – विकसित भारत गारंटर फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण है।
मनरेगा को खत्म करने के लिए लाए गए ‘वीबी- जी रामजी’ बिल पर संसद में बहस के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सख्त लहजे में विरोध किया है। उन्होंने कहा कि नया बिल रोजगार के कानूनी अधिकार को कमजोर करता है, केंद्र का नियंत्रण बढ़ाता है, राज्यों पर वित्तीय बोझ डालता है और संविधान व पंचायती राज की भावना के खिलाफ है। “इस विधेयक को पुरस्थापित करने पर अपनी सख्त आपत्ति दर्ज करना चाहती हूं। नए बिल से रोजगार का कानूनी अधिकार कमजोर हो रहा है। प्रियंका गांधी ने कहा, “हर योजना का नाम बदलने की जो सनक है, ये समझ में नहीं आती है। जब-जब ये किया जाता है, तो सरकार को पैसे खर्च करने पड़ते हैं। यह विधेयक वापस लिया जाना चाहिए और सरकार को नया विधायक पेश करना चाहिए। इस बिल को स्थायी समिति पास भेजा जाना चाहिए। कोई भी विधेयक किसी की निजी महत्वाकांक्षा, सनक और पूर्वाग्रहों के आधार पर न तो पेश होना चाहिए और न ही पास होना चाहिए। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने योजनाओं का नाम बदलने के प्रति सरकार के ‘जुनून’ की आलोचना करते हुए कहा कि ‘वीबी जी राम जी’ बिल सत्ता को केंद्रीकृत करता है और मनरेगा के तहत पहले से गारंटी वाले अधिकारों को कमजोर करता है। उन्होंने ऐसे गैर-जरूरी बदलावों के पीछे के तर्क पर सवाल उठाया, जिनमें भारी खर्च होता है और स्थानीय शासन कमजोर होता है। प्रियंका गांधी ने कहा, “मनरेगा कानून पिछले बीस सालों से ग्रामीण भारत को रोजगार देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सक्षम रहा है। यह इतना क्रांतिकारी कानून है कि जब इसको बनाया गया तो सदन के सभी सियासी दलों ने इस पर सहमति जताई थी। इससे हमारे गरीब से गरीब भाई-बहनों को सौ दिन का रोजगार मिलता है। उन्होंने आगे कहा कि जब हम अपने क्षेत्रों में जाते हैं, तो दूर-दूर से दिख जाता है कि मनरेगा मजदूर कौन है। सबसे गरीब होता है। चेहरे पर झुर्रियां होती हैं। हाथ मिलाने पर हाथ पत्थरों की तरह कठोर होते हैं क्योंकि वे बहुत मजदूरी करते हैं। इस कानून के तहत जो रोजगार की गारंटी और अधिकारी मिलता है, मांग के आधार पर संचालित होता है। मांग के आधार पर देना अनिवार्य है। इस योजना के लिए कितने पैसे और कहां भेजने हैं, वो जमीनी हकीकत और मांग पर आधारित होता है। प्रियंका ने कहा, “संविधान के 73वें संशोधन को नजरअंदाज किया जा रहा है। मनरेगा के जरिए ग्रामसभाओं को योजना की मांग को जमीनी परिस्थितियों के आधार पर तय करने का अधिकार दिया जाता था, लेकिन आज ये कमजोर किया जा रहा है। हमारी संविधान की भावना है कि हर शख्स के हाथों में शक्ति होना चाहिए, वही मूल भावना पंचायती राज में है। और ये बिल उसके विरोध में है। उन्होंने आगे कहा कि नए विधेयक के प्रबंधन से रोजगार का कानूनी अधिकार कमजोर हो रहा है और यह संविधान के खिलाफ है। प्रियंका गांधी ने कहा, “मनरेगा में 90 प्रतिशत अनुदान केंद्र से आता था लेकिन नए बिल में प्रावधान है कि ज्यादातर अनुदान (60 फीसदी) प्रदेशों से आएगा। इसको घटाया गया है। इससे प्रदेशों की अर्थव्यवस्था बहुत भार पड़ेगा। इस विधेयक द्वारा केंद्र का नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है और जिम्मेदारी घटाई जा रही है। इसमें मजदूरी की बढ़ोतरी की कोई बात नहीं है।
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन विधेयक 2025 पर कहा, “यह नाम बदलने वाली सरकार है…पहले सरकार आंकड़े पेश करे कि पिछले 10 सालों में उन्होंने मनरेगा के तहत कितनी मजदूरी दी है…पहले सरकार इस बारे में बात करे।” समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन विधेयक 2025 पर कहा, ‘राजनीति और योजना इसलिए होनी चाहिए जिससे जनता को लाभ पहुंचे। मनरेगा से बहुत से लोगों को काम मिलता था, आज की महंगाई में मानदेय कैसे बढ़े और इस योजना से किसान को कैसे जोड़ा जाए, यह देखना चाहिए…आप पूरा भार राज्य सरकार पर डाल देंगे, बहुत सारे राज्यों को मनरेगा का पैसा ही नहीं मिला है… मुख्यमंत्रियों, राज्य सरकारों के सामने ये संकट पैदा करेंगे और वे लोग इस योजना को लेकर आ रहे हैं जिन्हें पता है कि राज्य और केंद्र में योजनाओं को लेकर पैसा न आने की वजह से बहुत नुकसान होने वाला है। नाम बदलने से कोई बहुत बड़ा काम नहीं होगा।’
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