अलग-अलग धर्मों के अपने संस्कार होते हैं,
जीवन जीने के अलग-अलग विचार होते हैं।
रीति-रिवाज़,परंपराएँ, संस्कृति की शान हैं,
इन्हीं विविधताओं से समाज की पहचान है।
किसी धर्म में सेवा,किसी में त्याग का मान है,
कहीं प्रेम की शिक्षा,कहीं करुणा का गान है।
हर धर्म के मूल्य उसकी विरासत बताते हैं,
पीढ़ी-दर-पीढ़ी संस्कारों के दीप जलाते हैं।
अपनी आस्था पर गर्व करना अधिकार है,
पर दूजे की आस्था का मान रखना संस्कार है।
अपनी परंपरा से प्रेम करना अच्छी बात है,
पर दूसरे का सम्मान भी इंसानियत का साथ है।
धर्म की पहचान केवल वेशभूषा नहीं होती,
सच्चाई के बिना कोई पूजा पूरी नहीं होती।
वाणी में मधुरता हो, व्यवहार में सम्मान हो,
दीन-दुखियों की सेवा ही सच्चे धर्म की शान हो।
धर्मों के रंग अलग, पर प्रेम का रंग एक है,
पूजा के ढंग अनेक, पर करुणा का ढंग एक है।
किशन अपने-अपने मूल्यों को संजोकर आगे बढ़ते रहें,
मानवता के सूत्र में बँधकर सब मिलकर चलते रहें।

