रिटायर हो गए,क्या बात है अपनी,
अब दिन भी अपना,अब रात भी अपनी।
शुरू हो गई पेंशन अपनी,
खत्म हो गई नौकरी वाली टेंशन अपनी।
जब चाहूँ तब उठूँ,जब चाहूँ सो जाऊँ,
मन चाहे तो घूमूँ,मन चाहे तो गाऊँ।
न बॉस की डाँट,न छुट्टी की अर्जी अपनी,
अब तो चलेगी पूरी आज़ादी और मर्जी अपनी।
पहले सबसे मिलते थे कम,अब मुलाकातें होंगी हरदम,
दोस्तों की महफ़िल सजेगी,खुशियों से महकेगा हर मौसम
रिश्तों को देंगे वक्त,अपनों के संग बिताएँगे रात अपनी,
दिल से दिल जुड़ेगा,हर मुलाकात बनेगी खास अपनी
कभी तीर्थों की यात्रा होगी,कभी पहाड़ों की सैर अपनी,
कभी किताबों से दोस्ती होगी,कभी कलम से बात अपनी
जो सपने नौकरी में छूटे,अब उनको पूरा कर जाएँगे,
जिंदगी के बचे हुए हर पल को उत्सव-सा मनाएँगे।
न उम्र से हारेंगे हम,न सपनों को विराम देंगे,
हँसते-गाते जीवन को हम नए मुकाम देंगे।
किशन अनुभव की पूँजीसाथ,उल्लासपूर्ण जीवन मनाएंगे
रिटायरमेन्ट के सुनहरे दिनों क़ो समर्पित इतिहास रचेंगे

