प्रयास ऐसे करो कि पत्थर भी राह छोड़ने लगें,
पसीने की हर बूँद से सोए भाग्य जागने लगें,
अपने कर्म की मशाल कभी हालात के आगे मत बुझाना,
क्या पता तुम्हारे हौसले से कितने जीवन सँवरने लगें।
जब पुरुषार्थ की सीमा पर थके हुए कदम ठहर जाएँ,
जब अपने भी मुश्किल घड़ी में पराए नज़र आएँ,
तब बंद आँखों से उस परम शक्ति को पुकार लेना,
प्रार्थना में झुके हाथ अक्सर गिरते इंसान को उठाएँ।
कर्म तुम्हारा धर्म बने,पर अहंकार कभी साथ न हो,
सफ़लता सिर पर चढ़ जाए,इतना छोटा अपना कद न हो
रोटी मिले तो भूखे की थाली का भी ध्यान रखना,
ऐसी जीत भी क्या जीत,जिसमें किसी के दर्द का भाव न हो
प्रयास सिखाता है,अपनी तक़दीर स्वयं सँवारो,
प्रार्थना कहती है,हर उपलब्धि पर स्वयं को मत निहारो,
जो मिला है उसमें दुनिया के आँसुओं का भी हिस्सा है,
ऊँचे उठो तो नीचे खड़े लोगों को भी हाथ देकर उबारो।
कर्म करो जैसे हर परिणाम तुम्हीं पर निर्भर है,
प्रार्थना करो जैसे हर साँस उसी ईश्वर की धरोहर है,
किशन पुरुषार्थ और विश्वास,एक राह के साथी बन जाएँ
इंसान का प्रयास पूजा,और जीवन स्वयं मंदिर हो जाएँ
