(तन के आभूषण नहीं,मन के संस्कार इंसान को महान बनाते हैं)
मस्तिष्क का गहना है,बड़ों के चरणों में नमन करना,
अपनी बुद्धि पर गर्व नहीं,विनम्रता से जीवन सँवरना।
गले का गहना मधुर वाणी,जो हर दिल में मिठास घोले,
शब्दों में इतनी शालीनता हो,रूठा मन भी प्रेम से बोले।
दिल का गहना गंभीरता,हर बात पर शोर मचाना नहीं,
हर परिस्थिति में धैर्य रखना,भावनाओं को बहकाना नहीं।
जो मौन रहकर भी समझे,वही समझदारी का धनी है,
हृदय में प्रेम बसा हो, उसकी शख्सियत अनमोल बनी है।
पेट का गहना बात पचाना,हर राज़ को सरेआम न करना,
किसी के विश्वास की डोर को,अपने स्वार्थ में न उलझाना
जो सुनकर भी संयम रखे,वही रिश्तों का मान बढ़ाता है,
विश्वास बचाने वाला इंसान,दिलों में जगह बनाता है।
हाथों का गहना दान है, परहित में आगे आना,
दुखियों के सूने जीवन में,उम्मीद का दीप जलाना।
दान वही जो अहंकार नहीं,करुणा का संदेश सुनाए,
दाएँ हाथ से जो नेकी करे,बायाँ हाथ भी न जान पाए।
पैरों का गहना धर्मस्थल जाना,मन में श्रद्धा जगाना,
केवल माथा टेकना नहीं,मानवता को धर्म बनाना।
किशन नमन,मधुरवाणी,धैर्य,सद्भाव,जीवन के सच्चे गहने
दान,त्याग और धर्म के पथ पर,इंसान बने सबके अपने।
