
राजस्थान के डेयरी क्षेत्र को एक नई दिशा और राष्ट्रीय पहचान देने के उद्देश्य से जोबनेर में नेशनल डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) और एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज के संयुक्त तत्वावधान में श्री करण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय (SKNAU) के परिसर में दो दिवसीय “रंगीलो डेयरी महाकुंभ” का भव्य आयोजन किया गया । इस महाकुंभ का मुख्य लक्ष्य कृषि और डेयरी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के अधिकारियों, स्वयं सेवी संस्थाओं तथा दुग्ध सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों के साथ – साथ किसान, डेयरी विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों और नीति-निर्माताओं को एक मंच पर लाया गया।
कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ मुख्य अतिथि माननीय राज्य मंत्री गृह विभाग गोपालन विभाग राजस्थान सरकार श्री जवाहर सिंह बेडम के साथ श्रीमती श्रुति भारद्वाज, प्रबंध निदेशक, आरसीडीएफ, डॉ पुष्पेंद्र चौहान, कुलपति, श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, डॉ मीनेश शाह, चेयरमैन एनडीडीबी और डॉ सीपी देवानंद, प्रबंध निदेशक, एनडीडीबी डेरी सर्विसेस की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। माननीय मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने डेयरी क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ‘रीढ़’ बताते हुए पशुपालकों की समृद्धि पर जोर दिया । उन्होंने राज्य सरकार द्वारा डेयरी सेक्टर का बजट 1000 करोड़ से बढ़ाकर 2000 करोड़ रुपये करने की ऐतिहासिक घोषणा की । मंत्री जी ने किसानों से आह्वान किया कि वे नई तकनीक और नवाचारों को अपनाकर दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करें । उन्होंने पशुपालकों के सशक्तिकरण और डेयरी व्यवसाय को आधुनिक बनाने के लिए सरकार की पूर्ण प्रतिबद्धता दोहराई ।
एनडीडीबी अध्यक्ष डॉ मीनेश शाह ने कहा कि ‘रंगीलो’ केवल एक प्रतियोगिता या प्रदर्शनी नहीं है; यह जमीनी स्तर पर वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन लाने का एक सशक्त प्रयास है । जब दुग्ध उत्पादन को पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीकों से रिकॉर्ड किया जाता है, तो यह किसानों के आत्मविश्वास को बढ़ाता है और उन्हें अपने पशुधन की वास्तविक क्षमता का आकलन करने में मदद करता है । हमारा उद्देश्य देशी और उन्नत दोनों नस्लों की उत्पादकता में सुधार करना है ताकि किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित की जा सके ।
कार्यक्रम के उद्देश्यों के बारे में जानकारी देते हुए एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज के जनरल मैनेजर श्री श्वेत अवस्थी ने कहा कि यह कार्यक्रम इंपैक्ट-फोकस्ड दृष्टिकोण के साथ किसान भाइयों और उनके परिवार के सदस्यों को वैकल्पिक आजीविका प्रदान करने की दिशा में एक सार्थक पहल है।
इस कार्यक्रम में एनडीडीबी के आमंत्रण पर उबंटू फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने दो तकनीकों सत्रों तथा उत्पाद प्रदर्शनियों में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई।उबंटू फाउंडेशन की प्रशिक्षिका और महिला उद्यमी रिंकू ठाकुर ने पहले तकनीकी सत्र में अपनी बात रखते हुए ‘वेस्ट से बेस्ट’ तकनीक के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया। उन्होंने ‘वेस्ट से बेस्ट’ तकनीक साझा करते हुए बताया कि गुड़, पानी और फलों के छिलकों के 1:3:10 के अनुपात से 90 दिनों में प्रभावशाली बायो-एंजाइम तैयार किया जा सकता है जो आय का एक अन्य स्रोत हो सकता है।
वही दूसरे तकनीकी सत्र में उबंटू फाउंडेशन के डिजिटल साक्षरता और फाइनेंसियल इंक्लूजन के विशेषज्ञ श्री अभिषेक अग्रवाल ने डेयरी से जुड़ी लोक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए उबंटू फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी प्रदान की। साथ ही उन्होंने डेयरी से जुड़े किसानों और महिला समूहों के लिए वित्तीय साक्षरता, बैंकिंग सुविधाओं तक पहुँच और आय के विविध स्रोत विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
फाउंडेशन से जुड़ी महिला उद्यमी अनु, संगीता श्री, वीना शर्मा, अपर्णा, अनीता द्वारा लगाए गए स्टॉल पर प्रीमियम मोमबत्ती, प्राकृतिक साबुन, प्राकृतिक गुलाल, क्रोशिया के उत्पाद और बायो एंजाइम सहित विभिन्न उत्पादों को प्रदर्शित किया गया और कार्यक्रम में भाग लेने आये प्रतिनिधियो तथा किसान। बंधुओं ने उत्पादों की गुणवत्ता और नवाचार की सराहना की।दो दिनों के दौरान अच्छी बिक्री के साथ कई नए ऑर्डर भी प्राप्त हुए। विशेष रूप से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने उत्पाद निर्माण की प्रक्रिया, लागत निर्धारण और विपणन के बारे में विस्तार से जानकारी ली। कई छात्रों ने प्रशिक्षण लेने और भविष्य में सहयोग की इच्छा जताई।
इस महाकुंभ में स्वदेशी और विदेशी नस्लों की पशु प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र बनी जहां भैंस, बकरी, भेड़ और ऊँट शो के माध्यम से पशुधन की विविधता और उनकी आर्थिक उपयोगिता को रेखांकित किया गया। तकनीकी प्रदर्शन क्षेत्र में आधुनिक डेयरी उपकरणों और नवाचारों की लाइव डेमोंस्ट्रेशन दी गई। पैनल चर्चाओं में “पशु, किसान और उनकी कहानियाँ” तथा “कृषि और डेयरी के माध्यम से समाज को योगदान” जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में घूमर और मारवाड़ की लोक झलक ने ग्रामीण संस्कृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।दो दिवसीय इस आयोजन ने स्पष्ट संदेश दिया कि जब कृषि, डेयरी, कौशल और बाजार एक साथ आते हैं, तो ग्रामीण विकास को नई दिशा मिलती है।