आर पी तोमर
नई दिल्ली, 25 नवंबर। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को सेंट्रल लाइब्रेरी में लगाए गए फेस रिकग्निशन सिस्टम (चेहरे की पहचान प्रणाली) को हटाना पड़ा। छात्र इसे निगरानी बढ़ाने, प्रवेश सीमित करने और विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक परंपरा को कमजोर करने वाला कदम मान रहे थे। छात्र संघ ने कहा कि यह जीत उस सामूहिक प्रतिरोध का परिणाम है, जिसमें छात्रों ने किसी भी तरह की निगरानी व्यवस्था को कैंपस में स्थापित होने से रोकने का संकल्प लिया। छात्रों का कहना है कि यह कदम इसलिए भी आवश्यक था क्योंकि मुख्य लाइब्रेरियन मनोरमा त्रिपाठी लगातार इस प्रणाली को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही थीं, जबकि पूर्व छात्र संघ को आश्वासन दिया गया था कि किसी भी निर्णय से पहले एक समिति का गठन होगा और छात्रों से विचार-विमर्श किया जाएगा। छात्रों के अनुसार न तो समिति बनी और न ही कोई चर्चा हुई। इसके उलट, व्यवस्थाओं को चुपचाप आगे बढ़ाया जाता रहा और इसे लागू करने के प्रयास तेज होते गए। छात्रों ने आरोप लगाया कि उनसे बार-बार ईमेल के माध्यम से अपने बायोमेट्रिक डेटा की मांग की जा रही थी, जैसे उनकी सहमति पहले ही ले ली गई हो। प्रशासन इसे तकनीकी सुधार बताकर पेश कर रहा था, जबकि यह व्यवस्था प्रत्यक्ष रूप से छात्रों के अधिकारों, गोपनीयता और कैंपस की लोकतांत्रिक प्रकृति को प्रभावित करती है। जेएनयूएसयू ने कहा विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी केवल छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि शोधार्थियों, पूर्व छात्रों और व्यापक अकादमिक समुदाय के लिए भी खुली जगह होनी चाहिए। दुनिया के प्रमुख विश्वविद्यालय खुले शैक्षणिक माहौल को बढ़ावा देते हैं, जहां सरल पंजीकरण प्रक्रिया स्वीकार्य होती है, लेकिन चेहरे की पहचान जैसी बाधाएं नहीं।
प्रदेश सरकार का बजट ऐतिहासिक- महन्थ गिरीश पति त्रिपाठी मेयर
महेंद्र त्रिपाठी अयोध्या।महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश सरकार के बजट को ऐतिहासिक करार दिया है। उन्होंने कहा...
