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नई दिल्ली, 24 दिसम्बर।
इंडिगो संकट के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए तीन नए एयरलाइंस को मंजूरी दी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने तीन प्रस्तावित एयरलाइंस को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी किया। दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते एविएशन मार्केट में बढ़ते डुओपॉली को लेकर चिंताओं के बीच कॉम्पिटिशन को बढ़ावा देना चाहती है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि पिछले सप्ताह उन्होंने तीन नई एयरलाइंस की टीमों से मुलाकात की।
केंद्रीय मंत्री ने लिखा, “पिछले एक हफ्ते में, भारतीय आसमान में उड़ान भरने की चाह रखने वाली नई एयरलाइंस – शंख एयर, अल हिंद एयर और फ्लाई एक्सप्रेस की टीमों से मिलकर खुशी हुई। शंख एयर को पहले ही मंत्रालय से एनओसी मिल चुका है, अल हिंद एयर और फ्लाई एक्सप्रेस को इस हफ्ते एनओसी मिल गए हैं।”
शंख एयर ने अपनी वेबसाइट पर कहा है कि एयरलाइन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से फुल-सर्विस एयरलाइन के तौर पर काम करने की योजना बना रही है। अलहिंद ग्रुप द्वारा समर्थित अल हिंद एयर, एटीआर 72-600 टर्बोप्रॉप विमानों के बेड़े के साथ एक रीजनल कम्यूटर एयरलाइन के रूप में लॉन्च करने की योजना बना रही है, जो शुरू में दक्षिणी भारत में घरेलू रूट्स पर ध्यान केंद्रित करेगी। नागर विमानन मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) मिलने के बाद शंख एयर की 2026 की पहली तिमाही में उड़ान सेवाएं शुरू करने की योजना है। शंख एविएशन ने बुधवार को बयान में कहा कि उसके विमान वर्तमान में तकनीकी समीक्षा से गुजर रहे हैं और भारत में डिलिवरी के लिए तैयार किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश स्थित शंख एविएशन शंख एयर का संचालन करेगा। शंख एविएशन के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक श्रवण कुमार विश्वकर्मा ने नागर विमानन मंत्री के राममोहन नायडू से मुलाकात की और एयरलाइन की योजनाओं के बारे में जानकारी दी। विश्वकर्मा के अनुसार, एयरलाइन की योजना 2026 की पहली तिमाही के आसपास अपनी उड़ान सेवाएं शुरू करने की है। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी का लक्ष्य अगले दो से तीन वर्षों में अपने बेड़े को 20-25 विमानों तक बढ़ाने का है। दिसंबर के शुरुआती 2 सप्ताह में इंडिगो ने 5 हजार से अधिक फ्लाइट कैंसिल की, जिसके वजह से हजारों लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ा। इस संकट ने सरकार को एहसास दिलाया कि देश में किसी एक एयरालइन के पास ज्यादा मार्केट शेयर होना भविष्य में भी इसी तरह की स्थिति पैदा कर सकता है। यही कारण है कि सरकार ने नई एयरलाइंस को एनओसी दी। अगर देश में 3 और नई एयरलाइंस अपना ऑपरेशन शुरू कर देती है तो इससे किसी एक एयरालइन पर निर्भरता कम होगी। पिछले एक दशक में जेट एयरवेज, किंगफिशर एयरलाइंस और गोफर्स्ट जैसी एयरलाइंस के बंद होने और टाटा ग्रुप के एविएशन बिजनेस के रीस्ट्रक्चरिंग के बाद भारत की एयरलाइन इंडस्ट्री में बार-बार कंसोलिडेशन हुआ है। टाटा के नेतृत्व वाले कंसोलिडेशन के परिणामस्वरूप एयरएशिया इंडिया का एयर इंडिया एक्सप्रेस में और विस्तारा का एयर इंडिया में विलय हो गया, जिससे इंडिगो और एयर इंडिया ग्रुप मिलकर घरेलू बाज़ार के 90% से ज्यादा हिस्से को कंट्रोल करते हैं।