आर पी तोमर
नई दिल्ली, 27 नवंबर।
सुप्रीम कोर्ट में उस वक्त ऐतिहासिक पल देखने को मिला। जब पहली बार छह देशों के मुख्य न्यायाधीश और वरिष्ठ न्यायाधीश भारत की सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही को देखने के लिए एक साथ बैठे। इस दौरान बेंच पर सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची बैठे थे। विदेशी न्यायाधीशों की कार्यवाही में भाग नहीं लिया, लेकिन उनकी उपस्थिति ने इसे एक ग्लोबल बेंच का रूप दे दिया। सर्वोच्च अदालत में इस खास मौके पर भूटान के मुख्य न्यायाधीश ल्योंपो नोरबू त्शेरिंग , केन्याई सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश और अध्यक्ष मार्था के. कूमे, मॉरीशस की मुख्य न्यायाधीश रेहाना बीबी मुंगल्य-गुलबुल, श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश , मलेशियाई फेडरल कोर्ट की सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस तनु श्री दत्ता नलिनी पथमनाथन और नेपाल सुप्रीम कोर्ट की सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस सपना प्रधान मल्ला मौजूद थीं। सुप्रीम कोर्ट में कार्यवाही के दौरान, एक प्रोफेसर पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप से जुड़ा जमानत का मामला और आंध्र प्रदेश शराब घोटाला जैसे अहम मुद्दों पर सुनवाई हुई। कार्यवाही के बाद, सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इतने सारे कानूनी दिग्गजों का एक साथ सुप्रीम कोर्ट में बैठना एक ऐतिहासिक कदम है। भारत सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सभी विदेशी मेहमानों का स्वागत किया। वहीं, वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और राकेश द्विवेदी ने वकीलों की ओर से उनका अभिनंदन किया।क्या बोलीं केन्या की मुख्य न्यायाधीश?
केन्या की मुख्य न्यायाधीश कूमे ने कहा कि केन्या का सुप्रीम कोर्ट भारतीय सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक व्याख्याओं से प्रेरणा लेता है। भूटान के मुख्य न्यायाधीश त्शेरिंग ने बताया कि भारत के सुप्रीम कोर्ट द्वारा विकसित ‘बेसिक स्ट्रक्चर डॉक्ट्रिन’उनके लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी भी इतने सारे वकीलों को एक साथ कोर्टरूम में नहीं देखा। श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि मद्रास में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना 1800 में हुई थी, जबकि श्रीलंका का सुप्रीम कोर्ट 1801 में स्थापित हुआ था। तब से दोनों देशों ने एक ही कानूनी व्यवस्था का पालन किया है। नेपाल की जस्टिस मल्ला ने कहा कि वह इस ‘ग्लोबल बेंच’ का हिस्सा बनकर सम्मानित महसूस कर रही हैं। मलेशिया की जस्टिस पथमनथन ने बताया कि उनके देश का सर्वोच्च न्यायालय भी भारतीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा विकसित फैसलों और न्यायशास्त्र के सिद्धांतों का पालन करता है।
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महेंद्र त्रिपाठीअयोध्याकमिश्नर के निरीक्षण में अनियमितता उजागर, पेशकार निलंबित,कमिश्नर राजेश कुमार के रुदौली तहसील निरीक्षण के दौरान तहसील न्यायिक में...
