महेंद्र त्रिपाठी
अयोध्या।
जिला जेल अयोध्या से दो बंदियों की फरारी ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की असलियत उजागर कर दी है। जिस जेल को हाई-सिक्योरिटी माना जाता है, वहीं से बंदियों का इस तरह फरार होना सिस्टम पर बड़ा सवाल बन गया है।
जानकारी के मुताबिक फरार दोनों बंदी विशेष चार नंबर बैरक में बंद थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि उन्होंने बैरक के रोशनदान की ईंट तोड़कर रास्ता बनाया और पहले से जुटाए गए संसाधनों के सहारे जेल की सुरक्षा को चकमा दे दिया।
हैरान करने वाली बात यह है कि मौके से 25 फीट लंबा बांस, 30 फीट की सरिया और एक कंबल बरामद हुआ है। जांच में खुलासा हुआ कि कंबल को रस्सी का रूप देकर दोनों बंदियों ने जेल की ऊंची बाउंड्री वॉल पार की और फरार हो गए। सवाल यह है कि इतनी बड़ी सामग्री बैरक तक पहुंची कैसे—और जिम्मेदार कौन है?
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी जेल शैलेंद्र कुमार मैत्रीए ने स्वयं जिला जेल पहुंचकर निरीक्षण किया। उन्होंने इसे सुरक्षा में गंभीर लापरवाही बताया और कहा कि पूरे घटनाक्रम की गहन जांच की जा रही है। ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
फरार बंदियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस व अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर सघन तलाश अभियान चलाया जा रहा है। डीआईजी जेल ने साफ किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
