हरे माधव के दर पर आज प्रेम का दीप जलाएँ,
सारी साध-संगत मिलकर भक्ति के रंग में नहाएँ,
अमृत-वर्षा होगी,मन के सूने आँगन खिल जाएँ,
हरे माधव,हरे माधव,गूँजें नाम,हृदय झूम जाएँ।
नौ-दस अक्टूबर का पावन पर्व सुहाना आए,
सतगुरु की कृपा से हर जीवन धन्य हो जाए,
करुणा की बूंद-बूंद बनकर अंतरमन को महकाए,
हरे माधव के नाम से हर पीड़ा दूर हो जाए।
जहाँ सतगुरु का संदेश,वहाँ अज्ञान का अँधियारा मिटता,
जहाँ प्रेम की धारा बहती,वहाँ अहंकार नहीं टिकता,
भक्ति के अमृत से मन का हर सूखा कोना निखरता,
हरे माधव का नाम जपें तो जीवन भीतर से संवरता।
आओ संगत मिलकर प्रेम और श्रद्धा का दीप जलाएँ,
सतगुरु चरणों में अपने मन के सारे भाव चढ़ाएँ,
करुणा बरसे ऐसी कि पत्थर दिल भी फूल बन जाएँ,
हरे माधव, हरे माधव,हर साँस में प्रभु को पाएँ।
वर्सी पर्व का यह अवसर प्रेम का संदेश सुनाए,
टूटा मन हो या थका जीवन,सतगुरु उसे गले लगाए,
किशन अमृत-वर्षा में भीगकर हर भक्त आनंद से मुस्काए
हरे माधव,हरे माधव,नाम सदा अधरों पर आए।
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

