चंदन सिंह | पेज 3 न्यूज़ वर्ल्डवाइड | नई दिल्ली
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में ‘फांसी घर’ के नाम पर कथित भ्रामक प्रचार और सदन की अवमानना के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत चार नेताओं के खिलाफ चेतावनी प्रस्ताव पारित किया गया। यह प्रस्ताव नियम 77(1)(a) के तहत लाया गया, जिसे सदन ने गंभीर विचार-विमर्श के बाद मंजूरी दी।
प्रस्ताव के तहत उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल और पूर्व उपाध्यक्ष राखी बिरला को भी औपचारिक चेतावनी दी गई है। सदन ने माना कि विधानसभा परिसर के भीतर ‘फांसी घर’ को लेकर “मनगढ़ंत और आधारहीन कहानी” प्रचारित की गई, जो सदन की अवमानना की श्रेणी में आता है।
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सदन के पास कठोर दंड देने का अधिकार है, लेकिन विधायिका की गरिमा को ध्यान में रखते हुए फिलहाल चेतावनी जारी की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम न्यायिक संयम का परिचायक है।
अध्यक्ष ने ‘फांसी घर’ के कथित नैरेटिव पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि विधानसभा भवन को इस तरह जोड़ना उसके ऐतिहासिक महत्व के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि अवमानना सिद्ध हो चुकी है और विशेषाधिकार मामलों में अदालतों का हस्तक्षेप सीमित होता है, फिर भी सदन ने मर्यादा के अनुरूप कार्रवाई की है।
सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने दिल्ली विधानसभा के ऐतिहासिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी ने स्वयं इस सदन की कार्यवाही देखी थी और 1919 के रौलट एक्ट से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख अपनी आत्मकथा में किया है। अध्यक्ष के अनुसार, इसी दौर की घटनाओं ने देश में असहयोग आंदोलन की नींव रखी।
अध्यक्ष ने यह भी कहा कि ‘फांसी घर’ जैसी कहानियों से दिल्ली के ग्रामीण शहीदों की उपेक्षा हुई है। उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान आयोजित ‘वार कॉन्फ्रेंस’ और उससे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों का उल्लेख करते हुए बवाना, कंझावला, अलीपुर, बादली, नजफगढ़ और महरौली के शहीदों को याद किया।
अंत में उन्होंने बताया कि विशेषाधिकार समिति की तीसरी रिपोर्ट विशेष रूप से ‘फांसी घर’ से जुड़े कथित झूठे प्रचार पर केंद्रित होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विधानसभा की गरिमा और शुचिता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
