चंदन सिंह | पेज 3 न्यूज़ वर्ल्डवाइड
नई दिल्ली।
दिल्ली विधानसभा परिसर में 9 अगस्त 2022 को उद्घाटित किए गए कथित ‘फांसी घर’ की प्रामाणिकता से जुड़े मामले में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक एवं पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, दिल्ली विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष राम निवास गोयल और पूर्व उपाध्यक्ष राखी बिरला शुक्रवार को विशेषाधिकार समिति के समक्ष पेश हुए। तीनों ने समिति के सामने गोपनीयता की शपथ लेकर अपने बयान दर्ज कराए और मामले में अपना पक्ष रखा।

हालांकि, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समिति के समक्ष उपस्थित होने की सहमति देने के बावजूद एक बार फिर पेश नहीं हुए। बताया गया कि इससे पहले भी कई बार संबंधित व्यक्तियों ने समिति की कार्यवाही में उपस्थित होने से परहेज किया था।
विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह राजपूत ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर विषय है कि ‘फांसी घर’ की स्थापना का निर्णय बिना किसी ठोस ऐतिहासिक आधार या तथ्य के कैसे लिया गया। उन्होंने कहा कि समिति के समक्ष आज उपस्थित हुए व्यक्तियों द्वारा अपने दावों के समर्थन में कोई भी तथ्यात्मक दस्तावेज या प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
राजपूत ने कहा कि ‘फांसी घर’ के संबंध में बिना ऐतिहासिक प्रमाण के किए गए दावे न केवल जनता को गुमराह करते हैं, बल्कि शहीदों की स्मृति का भी अपमान करते हैं। उन्होंने बताया कि समिति आज दर्ज किए गए बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर सामूहिक रूप से विचार करेगी।
बैठक में समिति के अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह राजपूत के अलावा सूर्य प्रकाश खत्री, अभय कुमार वर्मा, अजय कुमार महावर, सतीश उपाध्याय, नीरज बसोया, रविकांत, राम सिंह नेताजी और सुरेन्द्र कुमार मौजूद रहे।
दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि अरविंद केजरीवाल और उनके सहयोगियों द्वारा ‘फांसी घर’ के मुद्दे पर एक भ्रामक कथा फैलायी गई है। उनके अनुसार दिल्ली विधानसभा से जुड़े तथ्यों, विशेषकर ‘फांसी घर’ के अस्तित्व और स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़े संदर्भों के बारे में गलत जानकारी देकर जनता को गुमराह करने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि यह मामला औपचारिक रूप से उठाए जाने के बाद विस्तृत जांच के लिए विशेषाधिकार समिति को भेजा गया था। समिति द्वारा समन जारी किए जाने के बावजूद संबंधित व्यक्तियों ने कई बार उपस्थित होने से परहेज किया, जो सदन की अवमानना और विशेषाधिकार के उल्लंघन का मामला बन सकता है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यदि ‘फांसी घर’ के रूप में संदर्भित संरचना की ऐतिहासिक प्रामाणिकता सिद्ध नहीं होती है, तो इस विषय को पारदर्शिता और तथ्यात्मक स्पष्टता के साथ संबोधित किया जाना चाहिए, क्योंकि यह मुद्दा तथ्यों की शुद्धता और सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़ा है।