
महेंद्र त्रिपाठी
अयोध्या में प्रशासन द्वारा लगाए गए ई-रिक्शा प्रतिबंध ने न केवल चालकों की आजीविका पर संकट खड़ा किया है, बल्कि उनके पूरे परिवार के जीवन को प्रभावित कर दिया है। सैकड़ों परिवार जो वर्षों से इस रोज़गार के माध्यम से अपने बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और बूढ़े माता-पिता की दवाइयों तक का इंतज़ाम करते थे, आज रोज़ी-रोटी के संकट में हैं।
होटल शाने अवध, सिविल लाइंस, अयोध्या में आयोजित प्रेस वार्ता में उत्तर प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने कहा कि यह प्रतिबंध शहर के गरीब तबके के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने ट्रैफिक जाम की समस्या का ठीकरा केवल ई-रिक्शा चालकों पर फोड़ दिया, जबकि असली समस्या अव्यवस्थित यातायात प्रबंधन और सड़कों की संकीर्णता है। अगर किसी व्यवस्था में सुधार की ज़रूरत है, तो उसे व्यवस्थित किया जाता है न कि उस व्यवस्था से जुड़ी हज़ारों ज़िंदगियों को बेरोज़गार कर दिया जाता है। यह निर्णय गरीबों की मेहनत, उनकी गरिमा और उनके अस्तित्व पर सीधा हमला है।
उन्होंने कहा कि यह केवल ई-रिक्शा चालकों का मामला नहीं है, बल्कि पूरे समाज के उस वर्ग का है जो उनके जरिए अपने जीवन से जुड़ा हुआ है। जब ई-रिक्शा बंद होंगे, तो सवारी की कमी से गलियों के छोटे होटल, ठेलेवाले, दुकानदार और बाजारों में काम करने वाले लोगों तक की आमदनी घट जाएगी। अयोध्या की भीतरी गलियों में चलने वाले ई-रिक्शा आम लोगों के लिए जीवन रेखा हैं ये न केवल रोज़गार का साधन हैं, बल्कि शहर की गतिशीलता का आधार भी हैं।
शहर के ट्रैफिक प्रबंधन की जिम्मेदारी प्रशासन की होती है, न कि गरीब रिक्शा चालकों पर प्रतिबंध लगाकर बोझ डालने की। यदि प्रशासन जनभावनाओं को समझे और सभी पक्षों से संवाद करे, तो इस समस्या का संतुलित और मानवीय समाधान संभव है।
शरद शुक्ला ने यह भी कहा कि आश्चर्य की बात यह है कि जिन ई-रिक्शाओं को प्रशासन ने ‘जाम का कारण’ बताया है, उनकी जगह अब गोल्फ कार्ट जैसी महंगी गाड़ियाँ चलवाने की तैयारी की जा रही है।
“गोल्फ कार्ट असल में खुले ट्रैफिक वाले रास्तों के लिए नहीं बनी हैं — वे बंद परिसरों, होटलों और हवाई अड्डों जैसी जगहों के लिए होती हैं। प्रशासन का यह निर्णय साफ़ दिखाता है कि गरीब रिक्शा चालकों को सड़कों से हटाकर कुछ सेठों और बड़े कारोबारियों की जेब भरने की कोशिश हो रही है।”
उन्होंने कहा कि यह फैसला जनविरोधी और पक्षपातपूर्ण है। एक ओर गरीब आदमी का पसीना सूखने नहीं दिया जा रहा, दूसरी ओर पूंजीपतियों के हित में फैसले लिए जा रहे हैं।
शरद शुक्ला ने प्रशासन से इस निर्णय को तत्काल वापस लेने और ई-रिक्शा संचालन के लिए संतुलित व्यवस्था लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जाम की समस्या से निपटने के लिए उन्होंने प्रशासन को कई व्यवहारिक और जनहितकारी सुझाव भी दिए हैं।
“हमारा उद्देश्य टकराव नहीं, समाधान है। अगर प्रशासन संवाद की राह चुने, तो हम हर सहयोग के लिए तैयार हैं। लेकिन अगर गरीबों की आवाज़ को अनसुना किया गया, तो युवा कांग्रेस सड़कों पर उतरकर उनके हक़ की लड़ाई लड़ेगी।”
प्रेस वार्ता में बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चालकों, उनके परिवारों, समाजसेवियों और स्थानीय व्यापारियों ने हिस्सा लिया। सभी ने एक स्वर में यह मांग रखी कि प्रतिबंध को वापस लेकर ई-रिक्शा चालकों को फिर से अपने काम पर लौटने दिया जाए, ताकि उनके परिवारों की रसोई फिर से जल सके।