पेज 3 न्यूज़
नई दिल्ली। दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन से सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने आईपी डिपो स्थित डीटीसी मुख्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। सेवानिवृत्त बुजुर्ग कर्मचारियों ने कहा कि पेंशन उनके जीवन का एकमात्र सहारा है, लेकिन उन्हें समय पर पेंशन नहीं मिलती है। वहीं, कई वर्षों से उनका चिकित्सा खर्च तक वापस नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार बुजुर्गों के सम्मान की बात करती है, लेकिन हकीकत ये है कि पेंशन के लिए उन्हें बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने डीटीसी के प्रबंध निदेशक (एमडी) से मुलाकात की और अपनी समस्याएं रखीं। इसके बाद एमडी ने सभी मुद्दों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो जाता, आंदोलन जारी रहेगा। डीटीसी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे धर्मपाल सिंह ने बताया कि जनवरी व जुलाई में घोषित डीए आज तक नहीं मिला है। समय पर पेंशन का पैसा भी नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि सरकार बुजुर्गों के सम्मान की बात करती है, लेकिन हम बुजुर्गों को रिटायरमेंट के बाद पेंशन के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है। मंत्री और अफसरों के दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। पूर्व कर्मचारी खजांची लाल ने बातचीत में कहा कि पेंशन कई-कई महीने देर से मिलती है। जनवरी में लागू हुआ 2 प्रतिशत डीए अब तक नहीं दिया गया है, जबकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को यह लाभ मिल चुका है। उन्होंने कहा कि ड्यूटी के दौरान हुए एक गंभीर हादसे के बाद उनके 16 ऑपरेशन हुए। मैंने 37 साल डीटीसी की सेवा की, लेकिन अब इलाज और पेंशन के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। डीटीसी सेवानिवृत्त कर्मचारी संघ के महामंत्री बाला दत्त ने ईटीवी से कहा कि पेंशन उनका जीवन सहारा है, लेकिन अक्सर एक दो महीने देर से आती है। उन्होंने कहा कि कई कर्मचारियों की 25 से 30 लाख रुपये तक की पेंशन राशि सरकार के पास अटकी है। नवंबर की पेंशन भी अब तक नहीं मिली है। उन्होंने सवाल उठाया कि जहां केंद्र सरकार के कर्मचारी हर महीने की 27 से 28 तारीख को पेंशन पा जाती है, वहीं डीटीसी पेंशनर्स को हर बार इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को सरकार स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ देने की बात करती है, लेकिन डीटीसी पेंशनर्स को कैशलेस इलाज की सुविधा तक नहीं मिल पा रही है। डीटीसी से यातायात निरीक्षक के पद से सेवानिवृत्त विनोद कुमार ने ईटीवी भारत से कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी समस्या समय पर पेंशन न मिलना है। पेंशन में देरी के कारण घर चलाने में मुश्किल होती है। उन्होंने बताया कि बुढ़ापे में दवाओं की जरूरत बढ़ जाती है, लेकिन पैसों के अभाव में उनका उपचार भी अधूरा रह जाता है। विनोद कुमार ने कहा कि वर्ष 2017 से हमारे मेडिकल बिलों का पैसा रुका हुआ है। सरकार व कोर्ट ने आदेश दिया है, फिर भी हमें रकम नहीं मिली है। हम चाहते हैं कि या तो सभी विभागों में पेंशन एक समान हो जाए, या फिर हमें भी समय पर पेंशन और कैशलेस इलाज मिले।
वक्त कभी किसी का सगा नहीं
वक्त का पहिया कैसे करवट बदल लेता है - हम खुद अपने ही पुराने और आज के वक्त का विश्लेषण...
