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नई दिल्ली, 23 नवंबर।
नोएडा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने और वायु गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने आदेश जारी करते हुए नोएडा और ग्रेटर नोएडा में ई-कॉमर्स व ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं में पेट्रोल और डीजल वाहनों के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगाने का निर्णय लिया है. यह आदेश 1 जनवरी 2026 से लागू होगा. इसके बाद किसी भी डिलीवरी कंपनी को पेट्रोल-डीजल वाली बाइक, स्कूटर, ऑटो या छोटे चारपहिया वाहन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। इस निर्देश का सीधा प्रभाव स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट, अमेज़न, फ्लिपकार्ट जैसी प्रमुख कंपनियों और हजारों डिलीवरी पार्टनर्स पर पड़ेगा, जिन्हें अगले डेढ़ साल के भीतर अपनी संपूर्ण डिलीवरी फ्लीट को सीएनजी या इलेक्ट्रिक वाहन में बदलना होगा. आदेश के अनुसार, डिलीवरी सेवाओं में शामिल हर दोपहिया, तिपहिया और छोटे कमर्शियल वाहन को ‘क्लीन फ्यूल’ पर चलाते हुए ही सड़कों पर उतरने की अनुमति मिलेगी। गौरतलब है कि इसी आदेश को प्रभावी रूप से लागू करने की तैयारियों को लेकर नोएडा एआरटीओ कार्यालय सेक्टर-32 में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि 2026 की समयसीमा को किसी भी स्थिति में आगे नहीं बढ़ाया जाएगा, इसलिए कंपनियों को अभी से अपनी योजना शुरू कर लेनी चाहिए, ताकि बाद में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। एआरटीओ (प्रशासन) नंद कुमार ने बताया कि यह कदम केवल परिवहन व्यवस्था बदलने के लिए नहीं, बल्कि शहर की बिगड़ती वायु गुणवत्ता को सुधारने की दिशा में आवश्यक और कठोर पहल है। पेट्रोल-डीजल वाहनों से होने वाला धुआं प्रदूषण का प्रमुख कारण है, और डिलीवरी वाहनों की संख्या अधिक होने के कारण यह प्रदूषण में महत्वपूर्ण योगदान देता है। ऐसे में 2026 से केवल सीएनजी और इलेक्ट्रिक डिलीवरी वाहनों को ही अनुमति मिलने से शहर की हवा को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
प्रदेश सरकार का बजट ऐतिहासिक- महन्थ गिरीश पति त्रिपाठी मेयर
महेंद्र त्रिपाठी अयोध्या।महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश सरकार के बजट को ऐतिहासिक करार दिया है। उन्होंने कहा...
