चंदन सिंह, पेज 3 न्यूज़ ब्यूरो, नई दिल्ली |
नई दिल्ली राजधानी में बढ़ते प्रदूषण स्तर को काबू में करने के लिए आज लोकनिवास (राजनिवास) में उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की संयुक्त अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि प्रदूषण नियंत्रण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और समन्वित तरीके से लगातार कार्रवाई तेज रखनी होगी।
बैठक में शहरी विकास मंत्री आशीष सूद, मुख्य सचिव राजीव वर्मा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में यह जोर दिया गया कि राजधानी में धूल प्रदूषण पर तत्काल लगाम लगानी जरूरी है। अधिकारियों ने बताया कि धूल के साथ-साथ कूड़े और मलबे का बेतरतीब ढंग से जमा होना भी प्रदूषण का बड़ा कारण बन रहा है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि डीडीए अपनी खाली पड़ी जमीनों से तुरंत कूड़ा-मलबा हटाए और सुनिश्चित करे कि दोबारा dumping न हो। एमसीडी को पूरे शहर में सघन सफाई अभियान चलाने और धूल कम करने के लिए अतिरिक्त संसाधन लगाने के आदेश दिए गए। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों की लापरवाही—सड़कों की मरम्मत न होना और नई सड़कों का न बन पाना—आज गंभीर धूल प्रदूषण का बड़ा कारण है।
लापरवाही पर सख्त कार्रवाई, डीएम को मिली बड़ी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि अब किसी भी अधिकारी की उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिलाधिकारियों को अपने क्षेत्र में सफाई और प्रदूषण नियंत्रण कार्यों का प्रतिदिन निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है। डीएम को यह अधिकार भी दिया जा रहा है कि वे लापरवाही करने वाले सरकारी कर्मचारियों की एसीआर लिख सकें।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक विशेष रिव्यू कमेटी बनाई गई है, जो हर दिन प्रदूषण-रोधी उपायों की समीक्षा करेगी और आवश्यक निर्देश जारी करेगी—इनका पालन सभी विभागों के लिए अनिवार्य होगा।
स्थायी समाधान की दिशा में कदम: मिस्ट स्प्रे सिस्टम और सख्त दंडात्मक कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदूषण का स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने आईटीओ क्षेत्र में लगाए गए मिस्ट स्प्रे सिस्टम का आज निरीक्षण किया और बताया कि इसके पायलट परीक्षणों के अच्छे परिणाम मिले हैं। अब सभी प्रमुख सड़कों के लिए बड़े स्तर पर इन सिस्टमों की योजना तैयार की जा रही है। फिलहाल इन्हें प्रदूषण के हॉटस्पॉट्स पर लगाया जा रहा है।
सरकार ने डीपीसीसी को निर्देश दिया है कि साफ-सफाई में कोताही बरतने वाली सरकारी एजेंसियों पर चालान जारी किए जाएं, जबकि बिना अनुमति सड़क काटने और उसे न भरने वाले विभागों पर एफआईआर दर्ज की जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि इसके लिए संबंधित विभाग प्रमुखों को जिम्मेदार माना जाएगा। न सरकारी, न निजी—किसी भी एजेंसी को बख्शा नहीं जाएगा।
अंत में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण में जनभागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे स्वच्छता और पर्यावरण सुरक्षा में सक्रिय सहयोग दें ताकि दिल्ली को प्रदूषण संकट से स्थायी राहत मिल सके।
