किसी के दबाव में आकर अपना फैसला नहीं करना,
सच की राह छोड़कर किसी के आगे नहीं झुकना,
चाहे राह कठिन हो,फिर भी हौसले से आगे बढ़ना,
अपने ज़मीर की आवाज़ सुनकर ही हर कदम रखना।
दुनियाँ चाहे लाख कहे,पर विवेक को मत खोना,
झूठे दबाव के आगे अपने उसूलों को मत बेचना,
जो सही लगे दिल को, उसी राह पर चलते रहना,
हालात बदल जाएँ फिर भी सत्य का दामन थामे रहना।
किसी की धमकी से अपने इरादों को मत डराना,
किसी के प्रभाव में आकर खुद को मत बदलना,
सम्मान वही जो अपने फैसलों पर कायम रहना,
गिरकर भी उठना,मगर गलत के आगे नहीं झुकना।
पद और शक्ति से कोई तुम्हें खरीद न पाए,
लालच की चमक भी तुम्हारा ईमान न डिगा पाए,
अपने कर्मों की कसौटी पर हर निर्णय को कसना,
सही के लिए अकेले पड़ो,फिर भी सही रास्ते पर चलना।
दबाव के आगे झुकना आसान,मगर चरित्र वहीं बनता है,
जब इंसान अकेला होकर भी अपने सत्य पर अडिग रहता है,
किशन दुनियाँ की आवाज़ नहीं,ज़मीर की आवाज़ को मानना
यही असली जीत है,अपने सिद्धांतों पर सदा कायम रहना।

