सोच अगर उजली हो तो,राहें खुद संवर जाती हैं,
मीठे बोलों की खुशबू से,दूरियाँ भी मिट जाती हैं,
नेक कर्म जब साथ चलें तो,किस्मत करवट लेती है,
इंसान की अपनी मेहनत ही,तकदीर नई लिख़ देती है।
हर क़दम पर सोच हमारी,एक नया संदेश लिखती है,
हर शब्द की गूँज जिंदगी में,अपना असर दिखाती है,
कर्मों के बीज जो बोते हैं,वैसा ही फ़ल पाते हैं,
अपने ही हाथों से अक्सर,अपने भाग्य बनाते हैं।
न सोच में छल हो कोई,न शब्दों में अभिमान रहे,
कर्मों में सच्चाई हो और,दिल में नेक अरमान रहे,
मुश्किल चाहे लाख मिले पर,हौसला कभी न हारना,
क्योंकि कर्मों की स्याही से,किस्मत का पन्ना वारना।
वक्त बदलता रहता है लेकिन,कर्म नहीं खोते जाते,
आज किए हर अच्छे कर्म के,कल परिणाम हैं आते,
दुनिया चाहे भाग्य कहे या,किस्मत का कोई खेल,
मेहनत,सोच और कर्मों से ही,जीवन बनता है बेमिसाल।
इसलिए सोच को दीप बनाओ,वाणी को मधुर बनाओ,
हर कर्म में सच्चाई भरकर,जीवन को सुंदर बनाओ,
किशन भाग्य कहीं बाहर नहीं,अपने भीतर उसे तलाशो,
सोच,बोल और कर्मों से,अपनी तकदीर खुद लिख़ डालो।


