• About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
Tuesday, March 24, 2026
  • Login
  • Register
Page3News Worldwide
  • Home
  • Page 3 Family
    • E-Paper
    • E-Magazine
    • Management Team
  • Subscriptions
  • Countries
    • USA
    • Canada
    • India
    • Balochistan
    • Thailand
    • UK
    • Australia
  • Language Wise News
    • Thai News
    • Punjabi News
    • Hindi News
  • Other News
    • World News
    • Latest Movie Reviews
    • Culture
    • Finance
    • Hollywood
    • Business
    • Entertainment
    • Sports
    • Lifestyle
    • Fashion
    • food
    • Health
    • Travel
    • Politics
    • Science
    • Tech
  • Multilingual Editorial
    • English Editorials
    • Thai Editorials
    • Hindi Editorials
    • Punjabi Editorials
    • Page3News Special
No Result
View All Result
  • Home
  • Page 3 Family
    • E-Paper
    • E-Magazine
    • Management Team
  • Subscriptions
  • Countries
    • USA
    • Canada
    • India
    • Balochistan
    • Thailand
    • UK
    • Australia
  • Language Wise News
    • Thai News
    • Punjabi News
    • Hindi News
  • Other News
    • World News
    • Latest Movie Reviews
    • Culture
    • Finance
    • Hollywood
    • Business
    • Entertainment
    • Sports
    • Lifestyle
    • Fashion
    • food
    • Health
    • Travel
    • Politics
    • Science
    • Tech
  • Multilingual Editorial
    • English Editorials
    • Thai Editorials
    • Hindi Editorials
    • Punjabi Editorials
    • Page3News Special
No Result
View All Result
Page3News Worldwide
No Result
View All Result
Home Hindi Editorials

अमेरिका-ईरान जंगी तनाव- वैश्विक राजनीति और नागरिकों मतदाताओं की प्राथमिकताएँ- युद्ध, अर्थव्यवस्था और शक्ति- संतुलन का बहुआयामी समग्र विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
February 23, 2026
in Hindi Editorials
0
0
SHARES
4
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on WhatsappShare on TelegramShare on LineShare on Email

RelatedPosts

हमारी रोजमर्रा की व्यवहारिक जिंदगी में राजनीतिक आर्थिक सामाजिक संवाद करते समय हमें शब्दों का चयन सोच समझ कर करना चाहिए

आओ ख़ुशहाल रिश्तों नातों को मज़बूत करने,नजरअंदाजी झुकना व समर्पण का भाव के मन्त्रों को आत्मसत करें

भारतीय रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर: शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज- पश्चिम एशिया संकट,वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल और भारत की आर्थिक परीक्षा -समग्र अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण

अमेरिका-ईरान दोनों क़ा रणनीतिक कारणों से पीछे हटना कमजोरी नहीं,बल्कि विवेकपूर्ण संतुलन के रूप में भी देखा जा सकता है

अमेरिका-ईरान तनाव केवल दो देशों के बीच शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति, क्षेत्रीय संतुलन ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू लोकतांत्रिक प्राथमिकताओं का जटिल संगम है -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर आज के वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य में एक स्पष्ट प्रवृत्ति दिखाई देती है, दुनियाँ भर के नागरिक और मतदाता युद्ध की राजनीति से अधिक अपनी आर्थिक सुरक्षा, महंगाई,रोजगार,ऊर्जा कीमतों और रोजमर्रा के खर्चों को प्राथमिकता देने लगे हैं।लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में यह बदलाव और भी तीखा है, क्योंकि वहां चुनावी परिणाम सीधे जनभावनाओं से प्रभावित होते हैं।जब भी किसी महाशक्ति के सामने युद्ध या सैन्य टकराव का विकल्प आता है, तो उसके भीतर यह प्रश्न उठता है कि क्या यह कदम घरेलू राजनीतिक हितों,आर्थिक स्थिरता और जनसमर्थन के अनुरूप है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि, इसी संदर्भ में डोनाल्ड ट्रम्प का ईरान के प्रति सख्त रुख और मध्य पूर्व में सैन्य जमावड़ा एक महत्वपूर्ण अध्ययन का विषय बन जाता है,विशेषकर तब जब अमेरिका में मध्यावधि चुनाव नजदीक हों और मतदाता महंगाई व जीवन- यापन की लागत से जूझ रहे हों।अमेरिकी राजनीति में लंबे समय से यह बहस चलती रही है कि विदेश नीति और घरेलू अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। यूनाइटेड स्टेट्स के मतदाताओं ने पिछले दो दशकों में अफगानिस्तान और इराक जैसे युद्धों के दीर्घकालिक प्रभावों को देखा है। इन युद्धों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भारी वित्तीय बोझ डाला और हजारों सैनिकों की जान ली। इसी पृष्ठभूमि में फॉरएवर वॉर्स को समाप्त करने का नारा लोकप्रिय हुआ। ट्रंप की राजनीतिक पहचान भी आंशिक रूप से इसी वादे पर टिकी रही कि वे अमेरिका को अनावश्यक विदेशी युद्धों से दूर रखेंगे। ऐसे में यदि ईरान के साथ संभावित टकराव लंबा खिंचता है, तो यह उनके समर्थक आधार में असंतोष पैदा कर सकता है, खासकर तब जब महंगाई और ऊर्जा कीमतें पहले से ही चिंता का विषय हों।दूसरी ओर ईरान की रणनीति को केवल सैन्य शक्ति के चश्मे से नहीं देखा जा सकता। ईरान की राजनीतिक व्यवस्था वैचारिक रूप से प्रतिरोध की अवधारणा पर आधारित है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ईरान ने स्वयं को पश्चिमी दबाव के विरुद्ध खड़े राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत किया है।इसीलिए सार्वजनिक रूप से अमेरिकी दबाव के आगे झुकना उसके नेतृत्व के लिए केवल कूटनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि वैचारिक पराजय के रूप में देखा जा सकता है। ईरानी नेतृत्व यह समझता है कि यदि वह कठोर रुख अपनाता है, तो घरेलू स्तरपर राष्ट्रवादी समर्थन मजबूत होगा और क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच उसकी विश्वसनीयता बनी रहेगी। इस पूरी स्थिति को समझने के लिए मेरे द्वारा तैयार किए गए कुछ प्रश्नों के संभावित उत्तरों का अध्ययन कर इसका निष्कर्ष निकलना होगाअब मूल प्रश्नों क़ी हम हर पैराग्राफ में चर्चा करेंगे
साथियों बात अगर हम यदि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध होता है तो क्या पूरा मध्य पूर्व जंग का मैदान बन जाएगा? इसको समझने की करें तो इस प्रश्न का उत्तर सरल हाँ या नहीं में नहीं दिया जा सकता,परंतु संभावना अत्यंत प्रबल है कि संघर्ष केवल द्विपक्षीय न रहे। ईरान के पास प्रत्यक्ष पारंपरिक सैन्य क्षमता के अलावा प्रॉक्सी नेटवर्क है, इराक, सीरिया, लेबनान और यमन में उससे जुड़े समूह सक्रिय हैं। यदि सीधा युद्ध छिड़ता है, तो ये समूह अमेरिकी ठिकानों और उसके सहयोगियों को निशाना बना सकते हैंविशेष रूप से इजरायल,सऊदी अरब और खाड़ी देशों की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ सकता है। फारस की खाड़ी और होरमुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का महत्वपूर्ण मार्ग हैं;वहां किसी भी सैन्य टकराव से ऊर्जा बाजारों में उथल-पुथल हो सकती है, जिसकासटीकता से प्रभाव वैश्विक महंगाई पर पड़ेगा।
साथियों बात अगर हम क्या अमेरिका-ईरान युद्ध तय माना जा रहा है? इसको समझने की करें तो, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तय जैसा शब्द शायद ही कभी सटीक होता है। दोनों देशों के बीच दशकों से तनाव है, परंतु पूर्ण युद्ध कई बार टला भी है। कूटनीति, बैक-चैनल वार्ता, क्षेत्रीय मध्यस्थता और वैश्विक शक्तियों का दबाव अक्सर सीधे युद्ध को रोकने में भूमिका निभाते हैं।अमेरिका यह जानता है कि ईरान के साथ खुला युद्ध केवल सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से भी भारी पड़ेगा। वहीं ईरान भी जानता है कि अमेरिकी सैन्य क्षमता उससे कई गुना अधिक है। इसलिए दोनों पक्ष सीमित टकराव या नियंत्रित तनाव की रणनीति अपनाते हैं, जिससे शक्ति प्रदर्शन भी हो और पूर्ण युद्ध से बचाव भी।
साथियों बात अगर हम क्या दुनियाँ तीन गुटों में बंट सकती है? इसको समझने की करें तो शीत युद्ध के समय जैसा स्पष्ट द्विध्रुवीय या त्रिध्रुवीय विभाजन आज नहीं है, लेकिन रणनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ रहा है। अमेरिका के पारंपरिक सहयोगी-यूरोपीय देश,जापान,ऑस्ट्रेलिया आम तौर पर उसके साथ खड़े होते हैं, जबकि ईरान को रूस और चीन से कुछ हद तक राजनीतिक या आर्थिक समर्थन मिल सकता है। परंतु यह समर्थन पूर्ण सैन्य गठबंधन में बदल जाए, यह निश्चित नहीं। आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था इतनी परस्पर जुड़ी हुई है कि अधिकांश देश व्यापक युद्ध से बचना चाहते हैं। इसलिए तीन गुटों में बंटना एक अतिशयोक्ति पूर्ण आशंका हो सकती है, पर ध्रुवीकरण और क्षेत्रीय संरेखण अवश्य तेज हो सकते हैं।
साथियों बात अगर हम क्या ईरान वास्तव में अमेरिकाका मुकाबला कर सकता है? इसको समझने की करें तो पारंपरिक सैन्य शक्ति की तुलना में अमेरिका कहीं अधिक शक्तिशाली है वायुसेना, नौसेना, साइबर क्षमता और वैश्विक तैनाती के मामले में उसकी बढ़त स्पष्ट है। लेकिन युद्ध केवल टैंकों और विमानों से नहीं जीते जाते; असममित युद्ध में कमजोर पक्ष भी लंबे समय तक प्रतिरोध कर सकता है। ईरान की मिसाइल क्षमता, ड्रोन तकनीक,साइबर हमले की संभावनाएँ और प्रॉक्सीसमूहों का नेटवर्क उसे प्रतिरोध की शक्ति प्रदान करते हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि वह अमेरिका को निर्णायक रूप से हरा सकता है,पर वह संघर्ष को महंगा,लंबा और राजनीतिक रूप से असुविधाजनक बना सकता है।
साथियों बात अगर हम क्या अमेरिका का युद्ध से पीछे हटना उसकी वैश्विक छवि को ठेस पहुंचाएगा? इसको समझने की करें तो, यह प्रश्न जटिल है। एक दृष्टिकोण कहता है कि यदि अमेरिका कड़े बयान के बाद पीछे हटता है,तो उसकी डिटरेंस क्षमता कमजोर पड़ सकती है और विरोधी उसे अनिश्चित मान सकते हैं।दूसरा दृष्टिकोण यह है कि अनावश्यक युद्ध से बचना परिपक्व नेतृत्व का संकेत है। आज की दुनियाँ में आर्थिक शक्ति, तकनीकी नेतृत्व और कूटनीतिक प्रभाव भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितनी सैन्य क्षमता। यदि पीछे हटना रणनीतिक गणना का हिस्सा हो और उसे कमजोरी के बजाय विवेक के रूप में प्रस्तुत किया जाए, तो इससे छवि पर स्थायी आघात जरूरी नहीं।
साथियों बात अगर हम ईरान अमेरिकी दबाव में झुकने की अपेक्षा युद्ध को प्राथमिकता क्यों देता प्रतीत होता है? इसको समझने की करें तो इसके पीछे कई परतें हैं।पहली, वैचारिक- क्रांतिकारी पहचान और प्रतिरोध की धुरी का नैरेटिव। दूसरी रणनीतिक-यदि वह झुकता है तो क्षेत्रीय सहयोगियों और घरेलू समर्थकों के बीच उसकी विश्वसनीयता कम हो सकती है।तीसरी, राजनीतिक- बाहरी खतरा अक्सर आंतरिक असंतोष को कम करने में मदद करता है।चौथी, मनोवैज्ञानिक- शक्ति संतुलन में यदि कमजोर पक्ष पूरी तरह झुक जाए, तो भविष्य में उसके साथ और कठोर शर्तें जोड़ी जा सकती हैं। इसलिए सीमित टकराव के माध्यम से वह यह संदेश देना चाहता है कि वह पूरी तरह असहाय नहीं है।
साथियों बात अगर हम सभी प्रश्नों को एक खाक़े में रख सोचने की करें तो, यह समझना आवश्यक है कि आधुनिक विश्व में पूर्ण युद्ध की लागत केवल सैनिकों की जान तक सीमित नहीं रहती;वह वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं ऊर्जा बाजारों, शेयर बाजारों और आम नागरिक की रसोई तक पहुंचती है। यदि फारस की खाड़ी में संघर्ष बढ़ता है, तो तेल कीमतों में उछाल आएगा, जिससे अमेरिका सहित पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ सकती है। ऐसे में मतदाता सरकारों से युद्ध नहीं, बल्कि स्थिरता और आर्थिक राहत की अपेक्षा रखते हैं। यही कारण है कि अमेरिका के भीतर भी कई रणनीतिकार चुनाव से पहले सैन्य विस्तार के जोखिमों को लेकर सतर्कता की सलाह देते हैं।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि अमेरिका-ईरान तनाव केवल दो देशों के बीच शक्ति प्रदर्शन नहीं,बल्कि वैश्विक राजनीति, क्षेत्रीय संतुलन,ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू लोकतांत्रिक प्राथमिकताओं का जटिल संगम है। युद्ध की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता,पर उसे अनिवार्य भी नहीं माना जा सकता।दोनों पक्ष अपनी- अपनी सीमाओं और क्षमताओं को जानते हैं। दुनियाँ तीन स्पष्ट गुटों में बंटे,यह निश्चित नहीं,पर ध्रुवीकरण बढ़ सकता है। ईरान अमेरिका को परास्त करने की स्थिति में नहीं, पर संघर्ष को महंगा बना सकता है। और अमेरिका यदि रणनीतिक कारणों से पीछे हटता है,तो उसे कमजोरी नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण संतुलन के रूप में भी देखा जा सकता है। अंततः लोकतंत्रों में मतदाता की प्राथमिकता- रोजगार, महंगाई, सुरक्षा और स्थिरता ही नीति की दिशा तय करती है, और यही तत्व भविष्य की किसी भी संभावित टकराव की वास्तविक सीमा निर्धारित करेंगे।

kishan2 2
संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9284141425

Get real time update about this post categories directly on your device, subscribe now.

Unsubscribe
Page 3 News International Desk

Page 3 News International Desk

The Page 3 News is a Multilingual Worldwide daily newspaper founded in 2021. It is published in Bangkok, Thailand by the Page 3 News Thai Limited Partnership. Page 3 News is available to the world in all the three formats i.e. e-Paper, digital and print. The Page 3 News is having offices in many countries like Thailand, India, Canada, USA, etc. and is currently published in English, Thai, Hindi and Punjabi languages.

Related Posts

हमारी रोजमर्रा की व्यवहारिक जिंदगी में राजनीतिक आर्थिक सामाजिक संवाद करते समय हमें शब्दों का चयन सोच समझ कर करना चाहिए

by Page 3 News International Desk
March 24, 2026
0
0

किसी भी विषय वस्तु पर अपनी राय बनाते,शब्दों का चयन करते समय विवेकपूर्ण हाजिर मंथन ज़रूरी सामाजिक राजनीतिक स्तरपर बयान...

आओ ख़ुशहाल रिश्तों नातों को मज़बूत करने,नजरअंदाजी झुकना व समर्पण का भाव के मन्त्रों को आत्मसत करें

by Page 3 News International Desk
March 24, 2026
0
0

आओ खुशियों के ख़ूबसूरत रिश्तों नातों संबंधों की क़द्र करें रिश्तों नातों को ख़ुशहाल बनाने आपसी आत्मविश्वास,समर्पण भाव, सहमति, समर्थन...

भारतीय रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर: शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज- पश्चिम एशिया संकट,वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल और भारत की आर्थिक परीक्षा -समग्र अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
March 24, 2026
0
0

आर्थिक संकेतों के पीछे छिपी वैश्विक कहानी- आर्थिक, राजनीतिक और वैश्विक परिप्रेक्ष्य का नतीजा -समाधान आपसी समझ ज़रूरी पश्चिम एशिया...

सफ़ल होने की कौशलताएं भारतीयों में कूट-कूट कर भरी है बस अपने आपको पहचानने की जरूरत है-हर दिन एक नया इतिहास रच सकते हैं

by Page 3 News International Desk
March 23, 2026
0
13

अपनी बुद्धि का सकारात्मक उपयोग लेने पर अगर हम उतारू हो गए!तो हम सफलताओं का हर दिन एक नया इतिहास...

भ्रष्टाचार करने वाले ध्यान दें- भ्रष्टाचारी धन दुर्घटना,गंभीर बीमारी,नुकसान या अन्‍य कारण से निकल जाता है

by Page 3 News International Desk
March 23, 2026
0
5

ईमानदारी वफादारी सुखी जीवन का मंत्र भ्रष्टाचार, फरेब, अन्याय, धोखे सहित गलत स्त्रोतों से कमाया गया धन, बीमारी दुखों क्लेश...

परमाणु छाया में सुलगता पश्चिम एशिया- ईरान- इजरायल – अमेरिका टकराव, रेडिएशन का खतरा- कैंसर,जन्मजात विकृतियां, प्रतिरक्षा प्रणाली का कमजोर होना और दीर्घकालिक पर्यावरणीय क्षति -समग्र विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
March 23, 2026
0
5

परमाणु ठिकानों पर हमले- रणनीतिक दबाव या खतरनाक जुआ? -युद्ध का बदलता स्वरूप और बढ़ती आशंकाएँ परमाणु ठिकानों पर हमले,...

Facebook Twitter Youtube Instagram Tumblr Pinterest

Page 3 News Multilingual Worldwide

The Page 3 News is a Multilingual Worldwide daily newspaper founded in 2021. It is published in Bangkok, Thailand by the Page 3 News Thai Limited Partnership. Page 3 News is available to the world in all the three formats i.e. e-Paper, digital and print.

The Page 3 News is having offices in many countries like Thailand, India, Canada, USA, etc. and is currently published in English, Thai, Hindi and Punjabi languages.

Category

Calanderwise News

March 2026
MTWTFSS
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031 
« Feb    

© 2024 Page 3 News - First Multilingual Worldwide Newspaper based in Thailand.

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

*By registering into our website, you agree to the Terms & Conditions and Privacy Policy.
All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • E-Magazine
  • Management Team
  • Subscriptions
  • E-Paper
  • World News
  • Balochistan
  • USA
  • India
  • Thailand
  • Canada
  • UK
  • Australia
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer

© 2024 Page 3 News - First Multilingual Worldwide Newspaper based in Thailand.

This website uses cookies. By continuing to use this website you are giving consent to cookies being used. Visit our Privacy and Cookie Policy.