पापाज़ी की कीमत उनके जाने के बाद नहीं समझना
उनके रहते हर पल को प्यार से सजाना
सिर पर हाथ हो उनका,तो किस्मत मुस्कुराती
ये दौलत फिर दुनिया में कहाँ मिल पाती
उनकी डाँट में छिपा हुआ प्यार पहचान लेना,
उनकी खामोशी में भी दिल का हाल जान लेना।
आज जो पास हैं,कल तस्वीर बन सकते हैं,
बीते हुए ये पल फिर कहाँ लौट सकते हैं।
उनके थके कदमों को थोड़ा सहारा देना,
उनकी आँखों में खुशियों का उजियारा भर देना।
उन्होंने उम्र गुज़ारी है हमारी राह बनाने में,
अब हमारी बारी है उन्हें मुस्कुराने में।
पापाज़ी के रहते उनका सम्मान किया करो,
उनके हर त्याग का दिल से मान किया करो।
बाद में फूल चढ़ाने से दर्द कम नहीं होता,
जीते-जी दिया प्यार कभी कम नहीं होता।
आज उनके पास बैठो,दो बातें प्यार से कर लो,
उनके माथे को चूमकर दिल का आभार भर लो।
कल अगर आवाज़ उनकी सुनाई न दे पाएगी,
तब उनकी याद ही आँखों में नमी लाएगी।
इसलिए पापाज़ी की कीमत आज ही समझ लेना,
उनके रहते हर रिश्ता दिल से अपना लेना।
किशन जिनके साए में जीवन ने चलना सीखा है,
उनके रहते ही कह दो“पापाज़ी,आपसे बहुत प्यार है।”
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318
