अच्छे सत्कर्म जीवन में,खुशियों की फुहार लाते हैं,
सूने मन के आँगन में,आशाओं के दीप जलाते हैं।
निष्काम भाव से जो करें,मन निर्मल हो जाता है,
अंतर्मन की तपती धरती पर, शीतल सावन आता है।
किसी के आँसू पोंछें तो,मन को सुकून मिल जाता है,
भूखे को रोटी दें तो,भीतर उजियारा छा जाता है।
दुख में किसी का हाथ थामें,रिश्तों में प्यार जगाते हैं,
छोटे-छोटे नेक कर्म ही,जीवन को सुंदर बनाते हैं।
सत्कर्मों की राह कठिन हो,फिर भी कदम बढ़ाते रहो,
स्वार्थ की धूल हटाकर,मानवता को सजाते रहो।
दुनिया चाहे भूल जाए,कर्म कभी नहीं खोता है,
नेकी का हर एक बीज,समय आने पर फल देता है।
धन-दौलत साथ न जाएगी,कर्म ही साथ निभाएंगे,
महल-मुकुट सब छूटेंगे,नेक कर्म याद आएंगे।
जिसने बाँटी प्रेम की खुशबू,उसका जीवन महकता है,
पवित्र कर्मों का दीपक,अँधियारे में भी चमकता है।
इसलिए हर दिन ऐसा हो,जिससे किसी का भला हो जाए
तेरे कारण किसी चेहरे पर, मुस्कान की किरण आ जाए।
किशन सत्कर्मों से मन शीतल हो,हृदय प्रेम से भर जाए,
जीवन की अंतिम साँस तक, इंसानियत अमर हो जाए।
