किसी का दिल दुखाकर चैन की नींद कहाँ आती है,
दर्द की हर आह बनकर आत्मा को सताती है।
जिस दिल को तुमने तोड़ा,उसमें भी ज्योति जगमगाती है,
हर जीव के भीतर बैठी वही रब की सत्ता मुस्काती है।
किसी का हक़ छीनकर सुख की रोटी नहीं खा सकते,
पराए हिस्से की दौलत से मन को नहीं बहला सकते।
जिस निवाले में आह हो,उसे अमृत नहीं बना सकते,
रब की अदालत से अपने कर्मों को छिपा नहीं सकते।
किसी की निंदा-चुगली से खुशियों के दीप नहीं जलते,
दूसरों को गिराने वाले स्वयं भी भीतर से पल-पल ढलते।
जो वाणी दिल में ज़हर घोल दें,वे पुण्य नहीं फलते,
कर्मों के बीज समय पाकर अपने ही आँगन में फलते।
जिसे तुम छोटा समझ रहे हो,उसमें भी वही नूर समाया है
हर साँस में उस मालिक ने अपना ही अंश बसाया है।
किसी को ठेस पहुँचाकर किसने सच्चा सुख पाया है?
जिसने प्रेम बाँटा जग में,उसी ने रब को पाया है।
किसी को दुख न देना,यही जीवन की पहचान रहे,
पराए हक़ पर नज़र न रखना,मन में सच्चाई का मान रहे।
किशन निंदा छोड़कर प्रेम बाँटना हर मुख़ पर मुस्कान रहे
हर जीव में रब को देखो,जीवन का सबसे बड़ा ज्ञान रहे।

