बच्चों को हर सुख-सुविधा देना ही परवरिश नहीं कहलाती,
बिन संस्कारों के दौलत भी जीवन में खुशियाँ नहीं लाती।
सुविधाएँ छिन जाएँ तो बच्चा कुछ पल रोकर संभल जाएगा,
संस्कारों से वंचित हो तो जीवनभर पछताएगा।
महँगे खिलौने देकर बचपन को ख़ुशहाल मत समझना,
हर जिद पूरी करके उसे संस्कारी इंसान मत समझना।
सुविधाएँ राह आसान करेंगी,मगर चरित्र नहीं बनाएँगी,
संस्कारों की सीख ही उसे जीवन की मंजिल तक पहुँचाएँगी।
आज सुविधाएँ कम दोगे तो बच्चा थोड़ी देर रोएगा,
कल मेहनत और संघर्ष से अपने पैरों पर खड़ा होगा।
आज संस्कारों से दूर रखा तो कल पछताना पड़ेगा,
अपनों के बीच रहकर भी अकेलेपन में जलना पड़ेगा।
धन-दौलत से ऊँचा संस्कारों का अनमोल खजाना है,
बच्चे के उज्ज्वल भविष्य का यही सच्चा ठिकाना है।
जिस घर में सत्य,सेवा और सम्मान का दीप जलता है,
वहीं बच्चे का व्यक्तित्व जीवनभर सुंदर फलता है।
सुविधाएँ देकर नहीं,संस्कार देकर महान बनाइए,
बच्चों को जीवन की सही राह का ज्ञान कराइए।
किशन आज थोड़ी सख्ती होगी,कल सुख अपार मिलेगा,
संस्कारवान संतान से ही परिवार और समाज क़ो उद्धार मिलेगा।
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

