सतगुरु निर्मलता की राह बख्शते हैं
मन के अंधेरों में उजियारा करते हैं।
मोह-माया के बंधन धीरे-धीरे काटते हैं
भटके हुए जीवन को सच्ची दिशा देते हैं।
जब मन में छल-कपट का बसेरा होता है
सतगुरु का ज्ञान ही सच्चा सवेरा होता है।
अहंकार झुकता है,हृदय पवित्र होता है
गुरु-कृपा से हर कर्म समर्पित होता है।
सतगुरु भीतर सोई चेतना जगाते हैं
झूठे जगत से सत्य की ओर बुलाते हैं।
प्रेम और करुणा का दीप जलाते हैं
हर सांस को प्रभु-स्मरण से महकाते हैं।
न कोई भेद रहे,न मन में अभिमान रहे
हर प्राणी में प्रभु का पावन सम्मान रहे।
सतगुरु ऐसी निर्मल दृष्टि हमें देते हैं,
टूटे मन में भी प्रेम के फूल खिला देते हैं।
गुरु की राह पर चलना ही सच्ची साधना है,
निर्मल मन रखना ही जीवन की आराधना है।
किशन जिस हृदय में गुरु-वचन का प्रकाश रहता है
उसके जीवन में हर पल परमात्मा का वास रहता है।
