मेरी पीर हरो गुरांजी,चरणों में सिर धर दूँ,
मन के सारे दर्द सुनाऊँ,अपना सब कुछ कर दूँ।
अंधियारे में राह दिखाओ,ज्योत हृदय में भर दो,
मेरी सूनी झोली भर दो,जीवन सफल कर दो।
मेरी पीर हरो गुरांजी,टूटे मन को थामो,
भटके हुए मुसाफिर को,प्रेम की राह बताओ।
कर्मों के जो भार चढ़े हैं,कृपा से उन्हें उतारो,
डूब रही इस नैया को,गुरुदेव पार उतारो।
मेरी पीर हरो गुरांजी,दुख की रात मिटाओ,
सूखे नयनों में गुरुवर, प्रेम के दीप जलाओ।
जिस पल मन घबराने लगे,नाम तुम्हारा आए,
तेरी मेहर की छाँव मिले तो,हर संकट मिट जाए।
मेरी पीर हरो गुरांजी,अहंकार मेरा हर लो,
मन में दया, क्षमा और सेवा का सागर भर दो।
जिसने मुझको ठेस लगाई,उसको भी मैं अपना मानूँ,
तेरी सीख पर चलकर गुरुवर, हर इंसान में तुझको जानूँ।
मेरी पीर हरो गुरांजी,अंतिम अरदास यही है,
तेरे चरणों से जुड़ी रहे,मेरी हर एक साँस यही है।
क़िशन मोह माया कुछ साथ न जाए,नाम ही संग निभाना
जब अंतिम बेला आए गुरुवर,चरणों में मुझे बुलाना।
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318
