जिसने भजन-सिमरन में मन लगाया,
उसने जीवन का धन सच्चा पाया,
मानव सेवा में सुख जिसने बाँटा,
उसने हर पल ईश्वर को मुस्कुराया।
बुज़ुर्गों के चरणों में शीश झुकाया,
उनकी दुआओं का खज़ाना पाया,
जिसने उनके दर्द को अपना समझा,
उसने जीवन का अर्थ समझ पाया।
न धन की चाह,न शोहरत का मेला,
सेवा से जिसने मन को सँवारा,
दुखियों के चेहरे पर हँसी जो लाई,
उसने प्रभु का दरबार निहारा।
दौलत वह नहीं जो तिजोरी में सोए,
दौलत वह है जो किसी के काम आए,
जिससे किसी की आँखों में ख़ुशी आए,
और किसी का बुझता दीप जल जाए।
अंत समय न धन साथ जाएगा,
न नाम,न महल,न संसार जाएगा,
किशन,भजन,सेवा और बुज़ुर्गों की दुआएँ रहेंगी,
यही कमाई आत्मा के संग जाएगी।

क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318