चंदन सिंह | पेज 3 न्यूज़ वर्ल्डवाइड | नई दिल्ली
मनोज तिवारी के पचरा और मालिनी अवस्थी के लोकगीतों ने बांधा समां, हर्ष मल्होत्रा बोले—भारत की विविधता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति
नई दिल्ली, 31 अगस्त: मानसून की विदाई के अवसर पर राजधानी दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित ‘बदरिया’ के रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम में पूर्वांचल की लोक संस्कृति, संगीत, नृत्य और भारतीय सांस्कृतिक विविधता के अनेक रंग देखने को मिले। मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली सरकार के सहयोग से माता चकेरी देवी फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में हजारों लोगों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में पूर्वांचल की पारंपरिक लोक संस्कृति को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया। सांसद मनोज तिवारी ने पारंपरिक पचरा गाकर दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया, वहीं प्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने लोकगीतों की प्रस्तुति से पूरे माहौल को संगीतमय बना दिया। दोनों कलाकारों की प्रस्तुतियों पर हजारों दर्शक मंत्रमुग्ध नजर आए।
भोजपुरी और मैथिली गीतों ने बिखेरा लोक संस्कृति का रंग
कार्यक्रम में लोक गायिका अनुराधा सिंह ने भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी, जबकि विभिन्न समूहों की नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। वाद्य संगीतकार शौभिक सरकार, सौरव गांगुली, संभवी पाठक, सनवी पाठक, रूपक डे और चंदन तिवारी ने भोजपुरी एवं मैथिली गीतों की प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में लोक संगीत की जीवंत छटा बिखेरी।
तालकटोरा स्टेडियम में बड़ी संख्या में पूर्वांचल समाज के लोग पहुंचे। कार्यक्रम संयोजकों योगिता सिंह और बृजेश राय सहित पूरी टीम ने उपस्थित लोगों का अभिनंदन किया। आयोजन के दौरान पूर्वांचल की सांस्कृतिक परंपराओं, लोक संगीत और सामाजिक जुड़ाव की भावना प्रमुखता से दिखाई दी।
‘भारत की विविधता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति’—हर्ष मल्होत्रा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि भारत की विविधता ही देश की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि देश में हर 50-60 किलोमीटर पर भाषा और बोली का स्वरूप बदल जाता है, लेकिन भारत की मूल संस्कृति एक ही है—बंधुत्व, आत्मीयता, परोपकार और समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए कुछ करने की भावना।
मल्होत्रा ने कहा कि यही भारतीय संस्कृति की पहचान है और ऐसे सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजन इस भावना को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।
उन्होंने कहा कि ‘बदरिया’ कार्यक्रम का आयोजन दूसरी बार किया जा रहा है और पिछले वर्ष भी उन्हें इसमें शामिल होने का अवसर मिला था। उनके अनुसार, इस आयोजन में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता के अनेक रंग दिखाई देते हैं, लेकिन इसकी विशेषता केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं है।
सांस्कृतिक आयोजन के साथ सामाजिक सरोकार पर भी जोर
हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि ‘बदरिया’ की खासियत यह भी है कि इसमें समाज के उन वर्गों की चिंता करने की भावना दिखाई देती है, जो किसी कारणवश वंचित, शोषित या पीड़ित हैं।
उन्होंने कहा कि समाज का दायित्व है कि कोई भी व्यक्ति स्वयं को अकेला या उपेक्षित महसूस न करे। समाज के प्रत्येक बच्चे को अच्छी शिक्षा मिले, परिवार सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें तथा माताएं और बहनें स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनें—इसी दिशा में सामाजिक प्रयास किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह भावना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर और सशक्त समाज के संकल्प का भी मूल भाव है।
योगिता सिंह और टीम के प्रयासों की सराहना
मल्होत्रा ने माता चकेरी देवी फाउंडेशन की अध्यक्ष एवं प्रदेश महामंत्री योगिता सिंह तथा उनकी पूरी टीम के सामाजिक सरोकारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन सेवा और सामाजिक चिंता की भावना को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मातृशक्ति और गणमान्य लोगों की उपस्थिति ‘बदरिया’ की सफलता और इसके व्यापक सामाजिक जुड़ाव को दर्शाती है।
कई प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी
कार्यक्रम में दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, प्रदेश संगठन महामंत्री पवन राणा, दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा, दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही, उपमहापौर डॉ. मोनिका पंत, माता चकेरी देवी फाउंडेशन की अध्यक्ष एवं प्रदेश महामंत्री योगिता सिंह, प्रदेश महामंत्री विष्णु मित्तल, फाउंडेशन के न्यासी एवं भाजपा नेता बृजेश राय, प्रदेश उपाध्यक्ष विक्रम बिधूड़ी, दिल्ली भाजपा पूर्वांचल मोर्चा अध्यक्ष संतोष ओझा, दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा लता गुप्ता, भारत एक्सप्रेस के सीईओ उपेंद्र राय, उद्यमी आदित्य कुमार हलवासिया, भाजपा कार्यालय मंत्री कैलाश जैन और अमित गुप्ता सहित अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोगों की मौजूदगी ने इसे राजधानी में पूर्वांचल की लोक संस्कृति और सामाजिक सहभागिता का एक प्रमुख आयोजन बना दिया।


