चंदन सिंह | पेज 3 न्यूज़ वर्ल्डवाइड | नई दिल्ली

गांवों की कनेक्टिविटी, सुरक्षित प्रवेश-निकास और पैदल यात्रियों की सुविधा को मिले सर्वोच्च प्राथमिकता
नई दिल्ली। दिल्ली के बाहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क अवसंरचना एवं कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए प्रस्तावित परियोजनाओं को लेकर दिल्ली सचिवालय में संबंधित विधायकों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में बवाना विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री रविंद्र इन्द्राज सिंह ने कंझावला-मंगोलपुरी एलिवेटेड कॉरिडोर तथा बवाना क्षेत्र में सहायक जल निकासी नाले के ऊपर प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर क्षेत्रीय हित से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
लगभग 11.70 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित कंझावला-मंगोलपुरी एलिवेटेड कॉरिडोर का उद्देश्य पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के प्रमुख मार्गों पर यातायात दबाव कम करना तथा आवागमन को सुगम बनाना है।
मंत्री रविंद्र इन्द्राज सिंह ने कहा कि बवाना विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में गांव और ग्रामीण आबादी निवास करती है। इसलिए ऐसी बड़ी आधारभूत संरचना परियोजनाओं की योजना बनाते समय स्थानीय गांवों और ग्रामीण आबादी की कनेक्टिविटी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि कॉरिडोर में गांवों और स्थानीय क्षेत्रों के लिए उचित प्रवेश-निकास व्यवस्था, बेहतर कनेक्टिविटी, यातायात सुरक्षा तथा पैदल यात्रियों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि परियोजना का लाभ केवल मुख्य मार्ग से गुजरने वाले यातायात तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आसपास के गांवों और स्थानीय निवासियों को भी बेहतर आवागमन सुविधा मिलनी चाहिए।
मंत्री ने निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय यातायात और दैनिक आवागमन प्रभावित न हो, इसके लिए चरणबद्ध निर्माण योजना तैयार करने पर भी जोर दिया। साथ ही भविष्य में बढ़ने वाले यातायात को ध्यान में रखते हुए परियोजना की क्षमता और कनेक्टिविटी का समुचित आकलन करने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि बवाना, कंझावला और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से बेहतर सड़क कनेक्टिविटी की जरूरत रही है। ऐसे में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप इन परियोजनाओं का विकास क्षेत्र के संतुलित एवं समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
रविंद्र इन्द्राज सिंह ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि डीपीआर के क्रियान्वयन के आगामी चरणों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सुझावों और जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए परियोजना को अंतिम रूप दिया जाए, ताकि इसका अधिकतम लाभ बवाना विधानसभा क्षेत्र की जनता सहित बाहरी दिल्ली के नागरिकों को मिल सके।