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Home Hindi Editorials

मोबाइल, तनाव और भागदौड़ के दौर में क्यों जरूरी है 7-8 घंटे की गहरी नींद?

by Page 3 News International Desk
June 19, 2026
in Hindi Editorials, Hindi News
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स्लीप डेफिसिट का खतरा:कम नींद से बढ़ रहा है हार्ट अटैक, डायबिटीज और डिप्रेशन का जोखिम

पर्याप्त नींद: शरीर और मस्तिष्क के लिए प्रकृति का सबसे सस्ता और प्रभावी टॉनिक- आओ चैन की नींद सोएं पर्याप्त नींद है स्वस्थ, ऊर्जावान और सफल जीवन का आधार -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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गोंदिया – आधुनिक डिजिटल युग में मनुष्य विज्ञान, तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की नई ऊंचाइयों को छू रहा है, परंतु विडंबना यह है कि विकास और व्यस्तता की इस दौड़ में वह अपनी सबसे महत्वपूर्ण जैविक आवश्यकता—नींद—से लगातार समझौता करता जा रहा है। आज मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, ओटीटी प्लेटफॉर्म, देर रात तक काम करने की संस्कृति, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और तनावपूर्ण जीवनशैली ने लाखों लोगों की नींद छीन ली है। विश्वभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद केवल आराम का माध्यम नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का मूल आधार है। यदि भोजन शरीर के लिए ईंधन है, तो नींद शरीर और मस्तिष्क की मरम्मत और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि भारतीय संस्कृति और साहित्य में भी नींद को अत्यंत महत्व दिया गया है। लोकगीतों, कहावतों और फिल्मों में नींद को सुख, शांति और संतोष का प्रतीक माना गया है। “रातों की नींद उड़ जाना” आज भी चिंता और तनाव का सबसे प्रचलित प्रतीकात्मक वाक्य है। वर्तमान समय में यह केवल मुहावरा नहीं रहा, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अनिद्रा और अपर्याप्त नींद अब जीवनशैली से जुड़ी सबसे तेजी से बढ़ती समस्याओं में शामिल हैं।
साथियों, यदि हम पर्याप्त नींद न आने के कारणों पर विचार करें, तो इसके पीछे अनेक कारक जिम्मेदार हैं। अनियमित दिनचर्या, देर रात तक मोबाइल और लैपटॉप का उपयोग, लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना, मानसिक तनाव, आर्थिक चिंताएं, कार्यस्थल का दबाव, कैफीनयुक्त पेय पदार्थों का अत्यधिक सेवन, धूम्रपान, शराब, शारीरिक गतिविधियों की कमी तथा असंतुलित जीवनशैली प्रमुख कारण हैं। इसके अतिरिक्त मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, थायरॉइड विकार, अवसाद और चिंता संबंधी रोग भी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।
आज चिकित्सा विज्ञान यह स्वीकार करता है कि अनिद्रा (इंसोम्निया) केवल एक छोटी समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य विकार है। इसमें व्यक्ति को सोने में कठिनाई होती है, बार-बार नींद टूटती है, या सुबह उठने के बाद भी ताजगी महसूस नहीं होती। परिणामस्वरूप व्यक्ति दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन, तनाव और कार्यक्षमता में कमी का अनुभव करता है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे, तो मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर गंभीर दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं।
साथियो, अल्पकालीन प्रभावों की बात करें तो नींद की कमी से एकाग्रता प्रभावित होती है, निर्णय लेने की क्षमता कमजोर पड़ती है, स्मरणशक्ति घटती है और कार्य में रुचि कम होने लगती है। व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर क्रोधित होने लगता है तथा सामाजिक और पारिवारिक संबंधों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। विद्यार्थियों में इसका असर अध्ययन और परीक्षा परिणामों पर पड़ता है, जबकि नौकरीपेशा लोगों में कार्यक्षमता और उत्पादकता घट जाती है।
यदि यही स्थिति लंबे समय तक जारी रहे, तो इसके परिणाम और अधिक गंभीर हो सकते हैं। शोध बताते हैं कि लगातार अपर्याप्त नींद लेने वाले लोगों में उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा, स्ट्रोक, अवसाद और प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी का खतरा बढ़ जाता है। पर्याप्त नींद न लेने से शरीर में सूजन बढ़ाने वाले जैविक तत्व सक्रिय हो जाते हैं, जो अनेक दीर्घकालिक रोगों का कारण बन सकते हैं। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि लगातार खराब नींद व्यक्ति की जीवन प्रत्याशा और जीवन की गुणवत्ता दोनों को प्रभावित कर सकती है।
साथियों, वर्तमान परिस्थितियों में एक नई समस्या “स्लीप डेफिसिट” या “नींद का ऋण” बनकर सामने आई है। अनेक लोग सप्ताह भर कम नींद लेते हैं और सप्ताहांत में अधिक सोकर उसकी भरपाई करने का प्रयास करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उपाय पूर्णतः प्रभावी नहीं है, क्योंकि शरीर को नियमित और गुणवत्तापूर्ण नींद की आवश्यकता होती है। नींद का लगातार जमा होता ऋण मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकता है।
साथियों, नींद केवल शरीर को आराम नहीं देती, बल्कि मस्तिष्क को भी व्यवस्थित करती है। जब हम सोते हैं, तब मस्तिष्क पूरे दिन प्राप्त सूचनाओं को व्यवस्थित करता है, यादों को मजबूत बनाता है और अनावश्यक सूचनाओं को हटाता है। यही कारण है कि पर्याप्त नींद लेने वाले लोगों की स्मरणशक्ति, रचनात्मकता और समस्या समाधान क्षमता बेहतर होती है। आधुनिक शोध यह भी दर्शाते हैं कि अच्छी नींद मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाती है तथा चिंता और अवसाद के जोखिम को कम करती है।
साथियों, विशेषज्ञों के अनुसार वयस्कों को प्रतिदिन औसतन 7 से 9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेना आवश्यक है। किशोरों और बच्चों के लिए यह आवश्यकता इससे अधिक हो सकती है। केवल घंटों की संख्या ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि नींद की गुणवत्ता भी उतनी ही आवश्यक है। बार-बार टूटने वाली या अशांत नींद भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है।अच्छी नींद प्राप्त करने के लिए कुछ सरल उपाय अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो सकते हैं। प्रतिदिन एक निश्चित समय पर सोने और जागने की आदत डालें। सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल, टीवी और लैपटॉप का उपयोग बंद कर दें। रात में कैफीनयुक्त पेय पदार्थों से बचें। नियमित व्यायाम करें, परंतु सोने से ठीक पहले भारी व्यायाम न करें। शयनकक्ष को शांत, स्वच्छ और अंधकारयुक्त रखें। ध्यान, योग और मधुर संगीत भी मन को शांत कर बेहतर नींद में सहायक हो सकते हैं।
साथियों, पर्याप्त नींद लेने के लाभ अनेक हैं। इससे रक्तचाप नियंत्रित रहता है, हृदय स्वस्थ रहता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, स्मरणशक्ति और एकाग्रता बढ़ती है, मानसिक संतुलन बना रहता है तथा व्यक्ति पूरे दिन ऊर्जावान और प्रसन्नचित्त महसूस करता है। अच्छी नींद हमारे चेहरे पर प्राकृतिक चमक और मुस्कान भी बनाए रखती है।
अतः यदि हम उपरोक्त विवरण का अध्ययन और विश्लेषण करें तो स्पष्ट होता है कि “नींद उड़ी तो सेहत बिगड़ी” केवल एक कहावत नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सत्य है। पर्याप्त नींद हमारे शरीर और मस्तिष्क को पुनर्जीवित करने वाली प्राकृतिक औषधि है। यह हमें शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाती है। इसलिए आधुनिक जीवन की भागदौड़ में भी हमें अपनी नींद को प्राथमिकता देनी चाहिए। वास्तव में चैन की नींद ही स्वस्थ, सुखी, सफल और संतुलित जीवन की आधारशिला है।”आओ चैन की नींद सोएं, क्योंकि पर्याप्त नींद ही स्वस्थ जीवन का सबसे सस्ता, सुरक्षित और प्रभावी टॉनिक है।”

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संकलनकर्ता: कर विशेषज्ञ, स्तंभकार, साहित्यकार, अंतरराष्ट्रीय लेखक, चिंतक एवं अधिवक्ताएडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया (महाराष्ट्र)

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